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Original subtitles

ए ए

[संगीत]

[संगीत]

[संगीत]

बोलो

[संगीत]

[संगीत]

[संगीत]

[संगीत]

[संगीत]

[प्रशंसा]

[हंसी]

[संगीत]

बहुत मीठा निकलेगा हुजूर

[संगीत]

[संगीत]

तूने फिर लगा ली दुकान

[संगीत]

फौजदार साहब के दफ्तर में

सरकार

[संगीत]

[हंसी]

[हंसी]

[संगीत]

[प्रशंसा]

आए थे

अब अपने घर का खर्चा कैसे चलेगा

[संगीत]

[प्रशंसा]

[संगीत]

[संगीत]

इंसान के बच्चे से ज्यादा तुम्हें जब की

फिक्र है जब उसके वालिद ने इसकी फिक्र

नहीं कारी तो हमें क्या आंख पहुंचता है

लेकिन हम इसे ऐसे

छोड़ के

[संगीत]

कहानी कोई नहीं मिला

[संगीत]

[संगीत]

खुदा के लिए बुरे भाका मत बोलो

अब यह हमारा बच्चा है

तुम तो बाद में से बात निकलते हो

हमारा मतलब

ही ऊंची जाट का हुआ और इसके बाद दें को

पता ग गया तो वो ये नहीं कहेंगे की हमारे

बा को 1 जुलाई की हाथ लगाने की हिम्मत

कैसे हुई वो जो कहेंगे सब बाद में कहेंगे

पहले तो हमें उनका मुंह रोशन लेंगे की कम

नसीब के जानो तुम्हारी ऊंची जाट तो मैं

यही सिखाती है की बच्चा जाना और उसके

जिनवरों के हवाले कर दिया

[संगीत]

[संगीत]

[संगीत]

तू तो बड़ा चेहरे

कितना खूबसूरत है

और देख मलिक का करिश्मा की तेरी किस्मत

में हम जैसे लिख दिए

[संगीत]

[हंसी]

बात यह है हुजूर की हमको एक बच्चा मिला है

बच्चा मिला है तो हम क्या करें लहरतारा

तालाब के किनारे मिलाओ

नहीं सरकार बचाव बहुत छोटा है शायद आज ही

पैदा हुआ है

इसका बच्चा है वो ही तो नहीं मालूम सरकार

और तुम उसे उठा ले

थे हुजूर वहां दिया बंद में तो उसे जानवर

नहीं का जाते का जान देते पाप की औलाद

होगा

तो हुजूर तो हम उसे पर ले चलो

हम मौलवी साहब को कुछ देना भी पड़ेगा की

नहीं

तो अब हम तो कुछ नहीं कर सकते नहीं तो हम

भी तुम्हारे साथ कम कर देते

हैं

[प्रशंसा]

हमें नाम दिया है

हम भी कल चले जाएंगे मालवी के यहां

जीव ओ जीव अपनी तो भैया भैया राम कहानी है

तानी स्नान ध्यान करके सीधे जाएंगे फौजदार

साहब के दफ्तर में अपनी कपड़ों की गठरिया

जलानी है हम तो सोच लिए हैं भैया की मुंशी

केदारनाथ के तोर पकड़ लेंगे

योगिया को कुछ भिक्षा तो दो

[संगीत]

[संगीत]

[संगीत]

कोरी से जुलाई हो गए क्या फर्क पड़ा जो

हाल तुम्हारा है वही हमारा

हमारा कहना तो यह है भैया यहां ना कोई

हिंदू है और ना कोई मुसलमान यहां सिर्फ दो

मजहब हैं एक अमीर और दूसरा गरीब वहां भैया

वह क्या बात कहीं है इसीलिए भैया हम तो ते

कर लिए हैं की हम अपना कपड़ा खूब छान बनिए

कोई बेचा करेंगे कम से कम इस हार्ड बाजार

के झंझट से तो बचेंगे और तुम्हारी लिए तो

यह बहुत ही अच्छा है हां वो तो है पर किस

भाव लेट है वो था पांच तक लेट है और 11 तक

का बचता है क्या

हम तो नॉर्थ अकेले भेजते हैं फिर भी दो

जीतल की बिक्री नहीं होती

और उसकी दुकान पे भीड़ अच्छी है तुमने

भैया हम तो कपड़ा बन सकते हैं बेचना नहीं

आता बेचना तो उसे ही आता है

और वो भी तो हिंदू है यह सिपाही लोगों से

काफी परेशान नहीं करते

भूल गए यहां सिर्फ दो ही मजाब है अमीर और

गरीब

होता है जिसका नाम है चांदी का जूता

मिला है हां इस का नाम रखवाने जा रहे हैं

मौलवी साहब के यहां उसके मां-बाप का

धर्मजात का कुछ पता चला

अभी कुछ पता नहीं चला फिर भी उसे कोई तो

धर्म माना ही पड़ेगा ना

पीना तुम्हारे पास एक गे है ना

हां तो और तुम उसे जान से भी ज्यादा प्यार

करते हो बहुत

तुम मुसलमान हो और तुम्हारी गे का क्या

धर्म है

अरे

जानवर का क्या धर्म होगा

[हंसी]

जो पीर की गे का है

और जो बच्चा हुआ बड़ा होगा समझदार होगा तो

खुद ही तो है कर लगा की वो हिंदू है या

मुसलमान तो फिर तुम मौलवी के पास कैसे जा

रहे हो मेरा मतलब है अगर वो हिंदू हुआ तो

हमें लगता है की तुम्हारे हिसाब से तो वो

जहां पड़ा था उसे वहीं पड़ा रहने देना

चाहिए था ताकि कुछ ना

कोई नहीं जाता की भैया तूने हिंदू खाया है

या मुसलमान

[संगीत]

का देते हैं की लहरतारा के किनारे से हम

कोई मजा उठा के नहीं ले हैं एक बचाव को

उठा के ले हैं इंसान का बचाव

[संगीत]

[संगीत]

[संगीत]

खबरदार जो मेरे बच्चे को गली दी जुबान

खींचा लूंगी एक एक ही है तुम लोगों ने ये

बताया था हमारी जबान रहेगी

क्यों बकबक कर रही है नीम गुर्जर गंज से

कोई ऐसे बात करते हैं तो इन्होंने हमारे

बच्चे को हराम को जल क्यों कहा भैंस

बकरियां कुत्ता बिल्ली का बच्चा पालो तो

वो सब हल के चले और इंसान का बच्चा हराम

का जन्म

तो अपनों से कहे बर बोल लेती है

कान खोल के सुन लो सब लोग

हमारे हिसाब से जो नाम निकाल रहा है

वह तो सिर्फ किसी अल दज के मुसलमान का ही

हो सकता है

कम से कम आप बता तो दीजिए आपने क्या नाम

निकाला है दरअसल जी बच्चे का नाम सागर

होना चाहिए था

उसका नाम निकाल रहा है

कबीर

[संगीत]

[संगीत]

नीम भौजी

रो रही हो क्या

[हंसी]

हुआ

महसूस तो कर सकते हैं

भैया कहां गए

6 महीने का होना चाहिए

भैया हमारे बड़े में कुछ का रहे थे क्या

नहीं वो तो हमसे का रहे थे

[संगीत]

[संगीत]

[संगीत]

हुजूर की तारीफ दिल्ली दरबार के बड़े

सारनाम शेयर हैं तो ये तुम्हें पहले बताना

चाहिए था ना

अच्छा भैया

हकीम साहब से का देना

भारत भाई जान वाले हैं फौजी लेक अरे हमारे

दिमाग में एक बात आई है तानी रुक तुमलक

तैमूर लांग की फौजी में भट्टी होने की सोच

रहे हो वहां लंगड़ा की तुरंत मारती होती

है

तुम्हारी मत करो

हम सोच रहे हैं

की जो तुम्हारा क्या नाम बताया पहले बात

तो ये की वो हमारा नहीं तुम्हारा भाई है

और नाम है उसका तैमूर लांग तैमूर लांग तो

ये जो फेल कर रहा है हमारा मतलब एक ही खून

खराब तो यही कम अगर हम तुम करें तो क्या

होगा ये सब हम करेंगे ही क्यों जुम्मा

काफी नहीं है कहां नहीं जी हम का रहे हैं

मां लो अगर करते हैं तो पहले तो कोड

पढ़ेंगे फिर कल कोठरी में और अल्लाह ने

चाहा तो सली पे भी मटका

और जब ये तमूरा लोग वापस अपने देश जाएगा

तो क्या होगा

तो हम भी खुशी मनाएंगे और यह भूल जाएंगे

तो फिर एक के गले में फैंसी का फंदा और

दूसरे के गले में माला क्यों

है की वो डेड टांग वाला ये सब कर कैसे लेट

है ऐसा कौन सा कम है ससुर जो तुम कर सकते

हो और हम नहीं कर सकते कहो तो अभी तुमको

उठाई के दे मारे

मजाक बाजी का पूरा

कमल देव एक ही काफी है

इस तरह

सुल्तान

हैं हमारी झोपड़ी हमारी सल्तनत और हमारे

बीबी बच्चे हैं भाई रहिए

कल को अगर ये डंडे के जोर पर हमारी झोपड़ी

पर कब्जा कर ले हमारी बकरियां खोल कर ले

जाए तो क्या खाओगे इसको तुम

नहीं मजाक मत करो वो तो ठीक है पर तुम

कहना क्या छह रहे हो हम कहना यह चाहते हैं

जी तरह हम और तुम अपनी अपनी सल्तनत में

मस्त रहते हैं मेहनत और मस्कत करके उसकी

बेबो ही करते हैं उसे तरह की सुल्तान लोग

नहीं जा सकते क्या

सब ससुर तैमूर लांग कोई छोटा कोई बड़ा

सो जा तेरा कुत्ता कटे कान मां गई है पीछे

क्यूट आप गया खाली हाथ सो जा सो

तू भी गंगाराम की तरह आदि पागल है देखो

हमको कुछ भी का लो पर हम आए मर्द एक कुछ

ना कहना

वो क्या है बेचारा बड़ी मुश्किल से सोया

है कहे तबीयत तो ठीक है ना माशाल्लाह सब

कुछ ठीक है

दांत निकाल रहे हैं ना उन्हें के मारे

बचाव परेशान हैं

इस बखत यहां कौन भारत मिलेगा सब बाजार

करने गए हैं

अच्छा बोलो क्या कम था लल्लन आया है अच्छा

बड़ी खुशखबरी लाया है हमारे भाई जान

मिलने वाला है

की वो गंगा पर के गांव से दस्त हो बकरा खर

के ला रहे थे तो रास्ते में चुम्मा से

बेटा हो गया

वह या अल्लाह ये तो वो है बदमाश है ना

जिसने सिर्फ एक गया की खातिर पीरा की जान

ले ली हां हां वही लूटेरा पर सुनो तो सही

उल्टा चारों कसाइयों ने इस को पकड़ लिया

और खूब मार लगे वो सुख बंद के कोतवाली में

पेस कर दिया

कोतवाल का कहना है की चारों का साइए कोई

नाम मिली हो सकता है कोतवाली में नौकरी ही

मिल जाए अगर ऐसा हो गया भौजी तुम्हारी

डेरा पे हम गी के दिए जलवाय देंगे

पर अब भाई तो हमें थोड़ा सा तेल चाहिए

भौजी

का बताए रमजान

[संगीत]

अरे कहे भैया राघव बड़े-बड़े

हम तो चौक जा रहे थे

भैया की हमको 4:30 तक

ऐसा कौन बाहर टूट पड़ा है की तुमको आज ही

इतनी बड़ी रकम की सरकार पद गई अब क्या

बताएं भैया तुम्हारी भौजी की बीमारी में

महाजन तो थाई थक उधर ले लिया था अब वो

कहता है की कोई लंगड़ा राजा आने वाला है

ना जान तो भगाना पद जाए इसलिए आज ही रकम

दो नहीं तो अपनी मेहरारू को गिरवी रखो अब

तुम ही बताओ भैया हम क्या करें हम तो बोले

की हमको गिरवी रख लो पर वो नहीं मानता

अपने पति धरण में बात की तुमने

हां पर किसी चमार के पास इतनी रकम नहीं है

हम तो एक दूसरे महाजन से भी बात करके ए

रहे हैं

और क्या करें

कहां से ए रहे हो

फिर तो सुना होगा सुल्तान का ऐलान

फौजी में भारती हो रही है

हमें फौजी के बेवफा होने का डर है वरना

अभी दिखाए जाते हैं

[हंसी]

जय गौरव दादा

चलिए ठीक है जय सियाराम जय सियाराम

[संगीत]

बोलिए कौन बिरादरी चाहिए

तीतर

[हंसी]

होने की क्या जरूर है

जैसे

तुम चलो ठहरे पर शाम तक हम लोग कुछ और बटर

कर आते हैं चलो

हम अभी आते हैं

[संगीत]

[संगीत]

[संगीत]

[प्रशंसा]

[संगीत]

[संगीत]

[प्रशंसा]

[संगीत]

[प्रशंसा]

[संगीत]

[संगीत]

[संगीत]

[प्रशंसा]

[संगीत]

[प्रशंसा]

[संगीत]

कोई लंगड़ा सुल्तान

लगता है बचाव की मां थी

अम्मा अम्मा

लेते हैं

तो हमारे पेट से पैदा हुआ था तो हमारा है

तो वह जो गधा था वह धोबी की बहुत वफादारी

से सेवा किया करता था

लेकिन पास में एक मंदिर था उसका पुजारी जब

भी शंकर बजना था वह गधा जोर-जोर से लगता

था

तो बहुत दोनों तक तो धोबी की समझ में नहीं

आया

क्यों रोकने लगता है

[संगीत]

फिर उसने सोचा सोचा फिर उसको लगा की हो

सकता है पिछले जन्म में यह गधा कोई खून और

आप साधु महात्मा रहा होगा

तो यह सोचकर उसने उसे गधे का नाम संकेश्वर

स्वामी रख दिया

कैसे मा गया

मा गया तो धोबी को बहुत अफसोस हुआ

क्यों भाई क्यों रो रहे हो उसने कहा

तो लोगों ने सोचा की संकेश्वर स्वामी जरूर

कोई बार्कर महात्मा रहे होंगे तो वह सब

लोग भी अपने-अपने बार मुरवाए के रन बैठ गए

धीरे-धीरे एक गांव से दूसरे गांव तक

पहुंचने पहुंचने पहुंचने पूरे देश में ये

खबर फेल गई और सारे लोग अपने मुंह दाढ़ी

बाहर मुर्गा के रन बैठ गए जब राजा ने यह

सुना तो उसने भी रन की और सर मुंडवाने की

थान ली पर रानी बहुत होशियार थी रानी ने

कहा अरे पहले पता तो लगाओ

और कहा की पता लगाओ

उसे कभी भी सच नहीं मानना चाहिए

साइन की फूफी झूठ बोल रही थी

तुम सच बोल रही हो

पटर-पटर-पटर-पटर चलती रहती है त्योहार का

कम सर पर पड़ा है इतना बड़ा हो गया ये

नहीं की जा के बप्पा के कम में कुछ हाथ

बताएं

[संगीत]

तुम्हारे पास अभी कहे नहीं

इसी को बीच के तो दो रोटी नसीब होती है

सलाम वालेकुम वालेकुम सलाम मियां

अपना बना कपड़ा हम खुद ही पहने लगेंगे तो

खाएंगे क्या

बेटा दुनिया का यही असूल है तुम्हारे पापा

कपड़े बनाते हैं तो पहना अमीर लोग हैं

तो रहते अमीर लोग

की खुशी में हमारी खुशी है

शाम को सूरज कहां चुप जाता है

क्या का रहे थे उधर बड़ी चीज है सूरज

खा-मारे-पीना-पानी चिंता के ताली मुंह

बिचैवा गोरखपुर

[प्रशंसा]

[प्रशंसा]

मामा से तो आता मांगते पिक्चर नहीं मांगते

वाला है कल हम से पूछ रहा था की चाचा तुम

हिंदुओं की मुसलमान हम बोले की बेटा

मुसलमान है तो बोला कैसे पता तुम हमले

कहां पता क्या बस है मुसलमान तो बोला जब

तक किसी बात की सच्चाई का पता ना चल जाए

तब तक हम उसे बात को नहीं मानते अब तुम ही

बताओ कैसे साबित करें

[हंसी]

[संगीत]

चमचंद्र गोरख

[हंसी]

[संगीत]

[प्रशंसा]

[प्रशंसा]

बम बम कहां जा रहे हैं

निवास पढ़ने और कुछ पूछना है तो वह भी पूछ

लो अब ज्यादा शकर नहीं

दिया

[संगीत]

[संगीत]

[संगीत]

[प्रशंसा]

यतीम है मगर इसकी मुमानी ने इसे बड़े लाल

प्यार से पाल है माली हालात गिरने की वजह

से किसी रईस की लौंडी बनाना चाहती है

कितनी उम्र है अभी तो काली है

हुजूर आप ही के गुलिस्तान में खिलकर

महकेगी ईद के मुबारक मौके पर ले जाइए अल

हजरत

[संगीत]

[संगीत]

[प्रशंसा]

ठीक नहीं है

हां साहब फरमाइए

कैसे

तुम भी कमल करते हो

बेटा वहां कोई नहीं जा सकता है

जो जाके बकरियां को पानी मिला था

ऐसी ऐसी बातें करता है कई नजर एन ग जाए

क्या

तुम बात चला कर तो देखो

[प्रशंसा]

[संगीत]

हेलो हेलो

तो फिर आप कौन हैं

हम तो पंडित हैं बेटा हम केवल ब्राह्मण के

बच्चों को पढ़ा सकते हैं अरे तुमने रुक

क्यों गए चलो

चलो

[संगीत]

अच्छा

[संगीत]

[संगीत]

वालेकुम अस्सलाम रहमतुल्लाह बरकातहू

अच्छा अच्छा अच्छा अच्छा

इस पक्ष में सुर्खाब के पर लगे हैं या साथ

में आसमान से उतार कर आया है

हम पूछते हैं की बीमा अगर पढ़ने लगे तो

इमारतें कौन बनाएगी क्या जुलाहगर पढ़ने

लगे तो कपड़ा कौन बनेगा

[संगीत]

[प्रशंसा]

[संगीत]

तो इमारतें कौन बनाएगी पढ़ने लगे तो कपड़ा

कौन बनेगा हम

मिलेगा

[संगीत]

कर्म ना कीजिए

आखिर

कब्र

[संगीत]

[प्रशंसा]

वो तो कहानी भी नहीं है

तो उसे भी नहीं मिला

[संगीत]

हा

ठीक है

तो बाहर गए ही क्यों

ढूंढने गए थे

का रही है

आखिर जाएगा कहां यही कहानी बाजार के आसपास

के लिए डंडा खेल रहा हूं

जय राम जी की भैया आओ भैया तैमूर कैसे हो

सब खैरियत है

ना कबीर

[संगीत]

[संगीत]

इधर ए भस्म देख के डर रहा है डर मत बेटा

यह तो हमारा स्नान है

तुम ठीक कर सकते हो

चल हमारे साथ हम बताते हैं कैसे

8 साल का बच्चा

अरे पूरे स्व

जी

मंत्र

[संगीत]

[संगीत]

ओम

[संगीत]

[संगीत]

[हंसी]

[संगीत]

[हंसी]

कबीर के पापा

भाई हेलो

भाई

हेलो अंकल

[संगीत]

[प्रशंसा]

[संगीत]

[प्रशंसा]

ए ए

[प्रशंसा]

[संगीत]

[प्रशंसा]

[संगीत]

[प्रशंसा]

[संगीत]

[प्रशंसा]

[संगीत]

[प्रशंसा]

[संगीत]

ए ए

[संगीत]

खुदा

[संगीत]

रहे थे

हम बताएं

अरे तुम तो बड़ी पत्र ए गई हो भौजी

देव का पट निकम्मा निकाल जाए तो यह गलत

होती है हमको

हम का रहे थे

उसको इतना ही दर्द है

इसके यहां रहते बकरियां गई तो हमें पता है

यह बड़ा झंझट करेगा तुम का ललन को ऐसे

भक्ति बुलवाना जब ये यहां ना हो पर यह है

की बुद्धि बकरा गोष्ट कुछ ज्यादा चला नहीं

हां खाल का दम मिल जाएगा

तो क्या ही मिलेगा और फिर

और फिर बाकी तो सब खैरियत ही है ना

कबीर

कबीर वन

आई कहां खिसक गया

चलो कुछ का लो

रात में तन खाना पड़ेगा

[प्रशंसा]

और फिर

[प्रशंसा]

[संगीत]

ए कहां जा रहे हो हम मदरसे जान हैं पढ़ने

के लिए

हल्के में दो लंगड़े होगा

अगर बाबू साहब ने मुंशी जी से शिकायत कर

दी तो पूरे मोहल्ले की खालवा देंगे

बाबू द्वारिका और नाथ

[प्रशंसा]

[संगीत]

से बात क्यों नहीं करते

और मदरसा तेरा दिमाग फिर गया क्या

किनारे से उठा के ले थे

अगर तुम कहती हो तो उनके कान में बार दाल

देते हैं

बोलो क्या बात है

या साथ में आसमान से उतार कर आया है

हम पूछते हैं की बीमा अगर पढ़ने लगे तो

इमारतें कौन बनाएगी क्या जुलाहा अगर पढ़ने

लगे तो कपड़ा कौन बनेगा हम

[संगीत]

[संगीत]

ए

[संगीत]

करिया कहां है

वापस करो

कहां जा रहे हो सुनो तो

कहां है

[संगीत]

कौन जाट है

की

भेजेंगे इस बार तो छोड़ दिया बच्चा समझ के

उल्लू ऐसे नहीं बोलते बोलो जय राम जी के

पास जय राम

जी चाचा

चाचा

भजन करोगे

हम वहां जा सकते हैं

वह हमें कहां मिलेंगे

वह तो गए

राम के पास

[संगीत]

क्या बात है

क्या बेटा

जी हमारे हमारे

पापा

और बकरियां को

वापस को भेज दो

राम जी के पास

ही चले गए

ए

[संगीत]

देखो

[संगीत]

यहां चलो किनारे पे

अरे चलो भैया हाथ बाजार का बखत हो रहा है

वो अभी तो खुदा का बांदा है

ये सब खुदा के बंदो का ठेका ले रखा है

चलो हातिम जी से पूछते हैं

[प्रशंसा]

सलाम वालेकुम

अस्सलाम क्या है

शाम को ही जौनपुर से आए थे जौनपुर गए थे

अच्छा गेंद साहब को दरअसल बात क्या है

रोजाना रात को साइन में माल के सो जय करिए

और तीन रोज बड़ा के फिर मिल लीजिएगा जी

बहुत अच्छा दरअसल बात क्या है की फिरोजाट

तुगलक के जमाने से होता ये ए रहा है की

जरा जूतियां देना जी अर्ज कर रहा हूं

हुजूर तू पापोस उठा के दे दीजिए

हां तो होता यह ए रहा है की सल्तनत के

तमाम विरह्मणों का जरिया दीगर हिंदुओं को

अदा करना पड़ता है कहां है जरिया खुद नहीं

देते

हिंदुओं की हर बिरादरी का एक-एक नुमाइंदा

मुजहेरा करने जौनपुर गया था की ब्राह्मण

का जरिया ब्राह्मण से ही वसूल किया जाए

रात को सोए एक पर बाद साइन में दर्द महसूस

हुआ आवाज दी मतलब

तो डॉक्टर पूरा वो त्योहार के दिन अच्छा

भाई हम चलते हैं चलो

ठीक है तुम्हारा बेचारे खूबचंद जी गुर्जर

गए इतने अफसोस की बात है और तुम तमाशा

देखने जा रहे हो आप सोच के कब है वो तो

अल्लाह प्यार होगा ना हकीम भी बता रहे हैं

अल्लाह को प्यार हो जाना ही तो आप सोच की

बात है कहां है अब तुम हमारे प्यार हो ये

कोई अब सोच की बात है

क्या हुआ माफी करने के बाद तो रू का खुदा

से बेटा हो जाता है ये तो औरत खुशी की बात

है

एक आदमी के अब्बा मा गए थे तो उसको

मुजाहिद साहब समझा रहे हैं

देख रहे हो आप का सैया सर पे ना हो तो ये

हाल होता है चलो

आदेश आदेश गुरु संदेश पहुंचा जागी चेतन

किया तू कहे भरवारा हम एक सवाल पूछने आए

हैं

अभी हम नातन का तमाशा देख रहे थे हमें तो

सारे करतब ऐसे ही लगे जैसे आप लोग करते

हैं वो भी कर्तव्य के भिक्षा मांगते हैं

आप भी वही करते हैं

तू सीखने की जिज्ञासा है तुझ में कोई और

होता तो हम भस्म कर डालते

है हम और वो नटखट नहीं है एक बराबर है

क्या वो गिलास हम जोगी पर उससे क्या फर्क

पड़ता है पुरी बात सुन और गन सके तो गन

अभ्यास से शरीर के कर्तव्य दिखाना एक बात

है और हर साधना दूसरी उनका शरीर बहुत करता

है हमारा शरीर जो उनकी किया संसार में

लिपट है और हमारी किया मुख आप लोगों भजन

करते हो खाता पीते हो तो आपकी नहीं होती

ध्यान रहेगा तभी चेतन रहेगी हम शरीर के

भीतर कुंडली लगाते हैं जो हमें परमपद की

तरफ ले जाति है जहां जोगीराम जाता है

संसार में व्याप्त आनंद में उसे दुनिया के

रविशे का ज्ञान ही नहीं राहत आनंद प्रकाश

में को जाता है मां मुनमुन होता है

भोजपुरी समझ नहीं आई बहुत मुश्किल है परी

कुंडली कैसे लगाते हैं कहां होती है यहां

रीड की हड्डी जहां खत्म होती है इसे जागते

हैं शून्य में प्राणायाम में ध्यान लगाकर

केसरी मुद्रा धरण करके शरीर में 32000

नदियां होती हैं पर इनमें ला के बीच जो

सुना नई होती है उसे जगह का कुंडली नहीं

ऊपर चढ़ती है ऊपर चढ़ती है ऊपर चढ़ती है

छह चक्र को भेज कर सस्ता चक्र तक पहुंचाना

ही योगी का लक्ष्य है

तो ये कुंडली बीच में से वापस भी लोट आई

होगी

रास्ता बैंड और कुंडली नहीं वापस वर्षों

लगता हैं

होली के झरने की बात हो रहे हैं

जर तो कुछ गर्माहट पहुंचे

हमने तो कभु नहीं सुना होली पर ऐसा जा रहा

क्या कर रहे हो

हम तो जानते थे यह कम सिर्फ तुम कर सकते

हो

प्रभु

तुम्हारा लड़का ऐसा कुछ करेगा

तुम्हारा कबीर बात तो गलत कहता है

अब तुम ही बताओ यह कोई बात हुई अरे है

ही नहीं गया

तो फिर गया कहां बताओ

हम नूर को थोड़ा कपड़ा

इससे भी कुछ अच्छा कम करके आए हो क्या

नहीं हम तुमसे पूछ रहे हैं की अल्लाह के

कम का सवाब देता है की नहीं अरे कम नसीब

पेट भर जाता है फिक्र का है करती हो आज की

चटनी रोटी है तो कल के राम मलिक

तो मलिक है चाहे अल्लाह कहो चाहे राम उससे

क्या का रहे थे ना की तुम्हारा कबीर बात

गलत कहता है पर लगती रही है

कहां से सीखने हो तुम यह सब सबसे पहले तो

यह बात हमें अम्मा ने बताई थी

अरे भैया जब ये छोटा था तो इतने सवाल क्या

करता था की तलने के लिए कुछ भी का देते थे

अब जैसे हम तो एक ही है

कभी-कभी नाश्ते

नहीं गया

अब भक्ति में उसे ईश्वर मानो या दोस्त

तक पड़ता है स्वामी जी आप कहते हैं की राम

ने ही संसार अच्छा है वही पालनहार है और

उन्हें का अंश है हमारी आत्मा तो हम और वह

अलग-अलग हुए

राम और हम

यानी परमात्मा और आत्मा

हमें बेकार ए गया है उससे मुक्ति पानी है

और भक्ति को जगन है पर महाराज आप संस्कृत

में तो बोलते ही नहीं सब बड़े पंडित तो

संस्कृत में ही बोलते हैं

की राम को केवल संस्कृत आई है क्या

जब हमें एक दूसरे से बात करनी है सत्संग

करना है तो दूसरे की बात तो समझ में आनी

चाहिए ना

देखो बेटा

बस अब कई दो कहानी कबीर सुनो भाई साधु यह

खाने लायक हम कहां हैं अरे तुम हो यह सब

नहीं जानते बस हम जानते हैं

ग

जय हनुमान

[संगीत]

चलो

खुद त्योहार का आनंद ले रहे हैं ना दूसरों

को लेने दे रहे हैं एक हमारे घर के पीछे

करो छोटा सा लाईकवा इतनी बड़ी बड़ी बात

कहीं और राजा बाबू ने इन्हीं शजर नसीरिया

में कल हमें भी बहुत परेशान किया एकदम सही

बात है कहे रे तुम लोग बुरी बात छोड़ नहीं

सकते

उसका है अरे फिर छोरी कब से है अभी से और

अब कभी नहीं पियेंगे भांग और गंज और तुम

दोनों इनकी कोई गलती नहीं है

पर कल इनकी गलती थी कहे क्योंकि कल हमने

इनको गंज पिलाया था और हम कभी नहीं

पियेंगे गाना क्योंकि सब लोग कहते हैं

बुरी चीज है अरे तुम मां रहे हो की नहीं

खाता

नहीं भाई हम तो सिर्फ इस मारे का रहे थे

की नसे में आदमी अपने आप में नहीं राहत

तुम्हारे पीछे वो घंसुआड़े होश पड़ा है ये

कैसा त्योहार अब फिर हो समझ में ना आए तो

हमारी टूटी टांग देख लो भौजी को तो मालूम

है की नशा बाजी में गई है एटा और अब घूम

रहे हैं तैमूर लांग बने अरे अब क्या है आप

तो सब ले तुम्हारी बात रख लेना पीछे है हम

भी का लेंगे

[संगीत]

[संगीत]

[संगीत]

अम्मा

खटाना हो तो एक बात कहें

बुरी लगे वाली बात तो

हमारे ख्याल से अगर किसी को कोई नुकसान ना

पहुंचे

तो सच बोलने में कोई बुराई नहीं है

की तुम दिन रात कहे घूम रही हो

जान वाला तो गया

[संगीत]

हम तो तुम्हें समझने की कोशिश कर रहे थे

[संगीत]

दुनिया में बहुत मशहूर है

और माशा अल्लाह एक बच्चे का आप भी है

ब्याह करो बच्चे करो

बस यही जिंदगानी है क्या हम तो यह जानते

हैं की इंसान इंसान बंता है अब चाचा

तुम्हारे इशारे पर इतना बड़ा हाथी चला है

अगर ज्ञान नहीं होता तो आदमी हाथी को बस

में कर सकता था बहुत तो सही पर नहीं चाचा

हमें अभी ब्याह गौना नहीं करना है अभी तो

हमें बहुत कुछ सीखना है कहा है हम तो फिर

कहेंगे की गौना कर दो सही र पर चलने लगेगा

हम तुम्हें अच्छे नहीं

सबसे जानते हैं

जब तुम हमसे यह पूछने आए थे

की करने के बाद आदमी कहां जाता है

[प्रशंसा]

कर्तव्य पालनपुर करें

[संगीत]

जब इन सब सांसारिक बंदों से छठ जो

तब ए जाना

तभी तुम्हें दीक्षा देंगे

ओम श्री गंगा नमः

की ओम शांति शांति लाभ

जिला है

की तेरे हाथ का छुआ जल हम पी लेंगे

की लोट के साथ-साथ ही जुलाहा भी तो शुद्ध

हो ही गया तू कौन जाट है

गंगाजल डायलॉग पंडित जी

दिखाई दे रहा है क्या

देख रहे हो दंगल

कैसे नहीं कर सकते

नूर

कबीर

तुम्हारा इस वक्त का कम

हमारी बात तो ठीक है चलो भीख मांग रहे हैं

भीख मांगने को तुम ठीक कहते हो कहे का

बुराई है इसमें और फिर ठीक तो साधु संत

जोगी सब मांगते हैं हमको तो उनका भी भीख

मांगना ठीक नहीं लगता

ग सकते हो गाने के बदले उसकी मजबूरी लिया

करो

[संगीत]

पता नहीं

तुमसे मां बहुत जुड़ गया है

[संगीत]

अगर जुड़ना मां से होता है तुम्हारी यह

बात हमको पसंद नहीं

जा रहे हैं

की हम भर में आएंगे

राम राम

हमें मिल गया गुरु मंत्र

कबीर

तुम

कल शाम को हम यहां बैठे सोच रहे थे की

जहां भी हम मलिक की तलाश में जाते हैं

हमें भाग दिया जाता है इसी अब सोच में

दुबे हम सो गए

अभी आपने हमें छूकर राम राम कहा तो लगा

जैसे आपने

हमें पुकार हो क्योंकि महाराज हम मलिक को

बाहर ढूंढ रहे थे हमारा राम तो हम ही में

है

आपने हमें बता दिया गुरुजी

मेले कर लिया

अगर आप दोनों लोग सुख-दुखार जीत से ऊपर उठ

गए बेटा

मुसलमान

तुम लोग किसी के मोहल्ले में रहते हो

कल सुबह से कोतवाली में पेस करो

[संगीत]

[प्रशंसा]

[प्रशंसा]

[प्रशंसा]

हम क्या करें

[संगीत]

चलो चलो

[संगीत]

हम नीम के बेटे हैं

जो हमें पोखरा के किनारे करने को छोड़ गई

वो हमारी मां कैसे हो शक्ति है

हमारी मां यह है

और अगर यह जुलाई

[संगीत]

[संगीत]

[संगीत]

मुश्किल यह है की कुछ ऐसे बाद जब पहले की

तरफ से किसी खतरे का अंदेशा ना रहा तो

उन्हें रहेगूसर की तामीर के कम में लगा

दिया गया

मगर इसमें मुश्किल क्या है मुश्किल ये है

हजूर की अब उन लोगों को फौजी टट्टू माना

जाए या तमिल मजदूर कुछ भी मां लीजिए

अल मुश्किल ये है की अभी तलाक लोगों की

तनख्वाह हमारा महत्व नहीं आता करता रहा है

गाया की कम वो तमीरात का ही कर रहे हैं

जानना चाहूंगा

हां तो मेरे डाबी फरमाइए आपका क्या ख्याल

है

अली वकार

खासतौर पर फौजी की रसद और प्यादों वगैरा

की आमतरफ की गई है और इसी वजह से इस कम

में फौजी टैटू को लगाया गया था अरे नहीं

नहीं वो तो ठीक है लेकिन आप के बड़े में

कुछ का रहे थे ना हां वैसे बात तो बहुत

पुरानी है लेकिन एक दिन हुआ क्या की हम

नदी के तट पर कुछ तीर्थ यात्रियों को गंगा

जी के महात्मा के बड़े में बता रहे थे तो

वही वो आपका क्या नाम है उसका अरे कभी कभी

ए गया और अपने लोट में हमको गंगाजल पिलाने

लगा और अपने पीलिया

समझ के छोड़ दिया नहीं तो मां तो हो रहा

था की शर्म के नतीजा क्यों गंगा जिम चमक

है हमें तो ये कुछ विकसित सा लगता है लगता

है उसे दिन शास्त्र में भी पिता और बाद

में चौक पर कर कोड खाए वो अलग फिर भी जब

इस जिला ही की एक बात काबिले दादा है की

शहर भर में बहस का मुद्दा बना हुआ है आप

दादा देते रहिए और यहां जान पर बनी है

कैसे समझ लीजिए दो महीने पहले एक दीवान को

कलाम बैंड करने के लिए दो खाता में रखें

थे मगर सखी ने क्या किया ना जान को क्या

पट्टी पढ़ाई या अल्लाह जान कोई जादू टोना

किया और इस जुलाहे के साथ में लिए और अब

तो सुन रहे हैं की वह लोग इस की कुछ दुख

बंधिया को कलाम बैंड करते फिर रहे इस

जुलाई को कुछ सजा देना बेहद जरूरी है

वरना एक दिन यह मर्द ही बनकर फैलने वाला

है

अगर आपकी इजाजत हो तो हम कुछ अज करें

उसके बस्ती के कुछ लोगों को बुलाकर उनके

दिलों में दहशत पैदा कर दी जाए की कबीर

उनके नुकसान का बहस हो सकता है

आप क्या कहते हैं

फरमाइए

वह बाबू द्वारका

लोग इनके बात है समझना तो पड़ेगा

आगे बात तो है बाबू साहब ने कोई खास गलती

तो बता ही नहीं गलती हम बताते हैं

जिसमें अयोध्या जी के महंत की साड़ी निकाल

रही थी उसे मुरली के लड़के ने क्या किया

बीच में घुस गया

उसकी पूजा करेंगे अरे भैया हमारा तुम्हारा

लकवा होता तो पंडित तो बाद में पीटते पहले

क्या किया की इस बात में उल्टा पंडित तो

सही

झगड़ा नहीं चाहिए की नहीं और समझो ना तो

ये बात गलत है या नहीं

है की हमें बता दिया

पता ही नहीं चलेगा की कहां गया

बेटा

कहे चूल्हे से मुठ मार रहे हो

हम कर देंगे रोटी

करना

नहीं किया और स्व किया एक बात ये है की

तुम अपने कम से कम रखो ऑरेंज के फटते में

गौड़ का है

उसे दिन मुरली के लायक वहां को लेक

तो एक 10 बरस का बच्चा लाठी से पितृ और हम

कुछ ना बोले जब उसका आप चुप-चाप खड़ा देख

सकता है तो तुमको क्या इतना दर्द मा रहा

था

अब इसका क्या जवाब दें अच्छा ठीक है तो

इसका जवाब दो की तुम मुला मौलवी से कहो

लिस्ट हो हमसे गलत बात बर्दाश्त नहीं होती

चाहे वो पंडित कहे चाहे मिलन

गलत बात करते हैं

मलिक को पेट भरने का धंधा बना लिया है

तो पेट भरत है पर वो एक का पेट भर के

दूसरे का कटता नहीं है

और उसके लिए पंडित और चमार मालवी और

जुलाहा राजा और रैंक सब बराबर है वहां

राजा बाबू वह

थोड़े में इतनी बड़ी बात तो बड़े-बड़े

नहीं का पाते

हम हम अभी आते हैं

पर एक बात समझ में नहीं आते की जुलाहा

होकर यह महतो और पंडितो के आश्रम में कहा

जाता है

और उसे जैसे तुम मानते हो यह शंकर चाचा

मानते हैं ये नूर मानते हैं वैसे ही हम भी

मानते हैं एकदम ही गलत बात है हम तो भोले

बाबा को मानते हैं बस

ठीक है तुम उसे भोले बाबा का लो

करीम चाचा अल्लाह

पता नहीं है की अलग-अलग नमन से तुम सब

हमारे ही मलिक को मानते हैं

की यह कौन धर्म मानता है

मलिक तक पहुंचने के अलग-अलग रास्ते

से चले जो

हम हमेशा कहते थे की लाइका गलत बात करता

है पर लगती सही है पर आज पता चल गया की

बात सही कहता है इसीलिए सही लगती है

तुम्हारी मस्ती में एक पीर आलिया पैदा हुआ

है तिरौलिया

और तुम उसे पहचान भी नहीं पे

अल में आना तो तुम लोग हो तुम लोग

बंदगी साहब

हम चाहते हैं की हमारी जान छोटी जाट वालों

की बस्ती है

वह भी हम लोग मिलजुल के सत्संग शुरू करें

आपने ज्योति की लिक पकड़ी है

उसको हर तरफ फैलाना आप ही का कर्तव्य है

शायद हमने बहुत कोशिश की के लोग यही पर आए

मगर हम लोगों के कम ऐसे हैं की जी दिन

मजबूरी ना करें उसे दिन घर में चूल्हा

नहीं चल सकता इसलिए शुरू में इतना समय

निकालना बहुत मुश्किल होता है

तो अच्छा होता है

गुरु का आशीर्वाद भी मिल गया

पर हम मलिक को तभी याद करते हैं जब कोई

मुसीबत आई है

और यह गलत बात है

दुख में सुमिरन सब करें

सुख में करें

जो सुख में सुमिरन करें

दुख कहे को जो सुख में सिमरन करें दुख कहे

को हुए

दीजिए हम पूरा ही दोरा देते हैं सब ध्यान

से सुन दुख में सुमिरन सब करें सुख में

करें एन कोई

जो सुख में सुमिरन करें

सीधी सी बात है

हमारी तो वही भाषा है जो तुम्हारी है

कागज की लेखी

वो कहते कागज की लेखी

मैं कहता हूं की अच्छी

बहुत ही बढ़िया

संसार में अगर आदमी आदमी से प्रेम का नता

जोड़ लेने

तो फिर कौन जमाजार्था जोड़ना

यही तो अल धन

मुझे

सत्संग हो रहा है क्या

तो हम हंस रहे हैं की हमारे जैसा अनपढ़

गवार प्रवचन

और जुड़ने से आई है ताकत

लिखो

पोथी पड़ी पड़ी

पंडित भयानक्य

प्रेम का

पढ़े सुपंडी

लोग भर रहे हैं

हमें तुरंत चाहिए

अरे गंगा जी के पांडा पुजारी इतनी मार

लगाएंगे की तुम्हारे

[हंसी]

हर दिन शुभ है और हर जगह पवित्र शरीर की

आत्मा ही तो परमात्मा है

तो उसे चाहिए यहां खोजो चाहे गंगा जी के

घाट पर फूलों के दिन खोजो

[संगीत]

[प्रशंसा]

[संगीत]

खुदा

[संगीत]

और अब हम तुमसे

आखिर पिक्चर मांगते हैं

[संगीत]

[संगीत]

[संगीत]

यह पूरा तंत्र तुम्हारा ही है

इसका तुम जो करना चाहे

कर प्यार

[संगीत]

लोगों का ताला देखा

अपनी गुजरी अच्छी

दूसरों की चादर अच्छी

हमें

अब जिंदगानी में भरोसा हो चला

एक जगह

तो माला और जब से राम नहीं मिलते

माला तो कर में फायर

जब फायर मुख माही

मनुवा तो चौहदीस फायर यह तो सुमिरन नहीं

मलिक के सुमिरन की खातिर एन माला और

तस्वीर की जरूर है

हां

तो भाई बात यह चल रही थी

की जब मां सीधे ही मलिक से जुड़ सकता है

तो फिर माला

[प्रशंसा]

[संगीत]

[प्रशंसा]

[संगीत]

[संगीत]

है मनहरण

तेरी बात दिल को नारी लगे तेरी जोली मुझे

प्यारी लगे

[संगीत]

तेरी गली मुझे

प्यारी लगे

तू मेरी

है तेरी गली मुझे

प्यारी लगे

[प्रशंसा]

[संगीत]

सुभान अल्लाह क्या बात है

आ हुजूर आपसे एक बात अर्ज करनी थी

हुजूर लेकिन हमारी लड़कियां जरा परेशान है

बताइए

रोजाना हुजूर बिना नहा और हमारा वो सोनी

का वक्त होता है हर तरह से समझा के देख ले

मगर वो ऐसे गीत है की मानते ही नहीं आप

बताइए

तब वह आपको भी परेशान करने लगा है हम ही

को तो परेशान करता

है बताइए हुजूर

लगता है जुलाई का कुछ ना कुछ इंतजाम करना

ही पड़ेगा

जय श्री राम

कबीर जी

आश्रम ग्रहण कीजिए

कैसे पधारे

महाराज

सुना है क्या पहु मूर्ति पूजा का उपदेश

देने लगे हैं

नहीं तो

पता चला है की आपने कौन हो नए देवता की

पूजा का उपदेश दिया है और उनका नाम बताया

है शालिग्राम

कौन है यह किशोर की

यह की

जनसाधारण के मां में

[संगीत]

इसलिए तुरंत

निराकार ब्रह्मा का ध्यान लगाना उनके लिए

कठिन हो जाता

तो ध्यान लगाने के लिए हमने

सरकार और

निराकारों के सामने रख दी

इस फॉर्म के

हाथ पाओ

आंख और नाक नहीं है इसलिए यह छोटा भरम

है शालिग्राम

जान सामान्य के लिए तो यह सीधी आवश्यक है

चलांग तो आप जैसे कुछ

सिद्ध पुरुष लगा सकते हैं

या फिर

मार्ग कुछ अलग

हमें लगता है

हम तुम्हारे आप की उम्र के हैं फिर भी हम

तुम्हें

कबीर साहब कहते रहे क्योंकि तुम हमारे लिए

कहु पीर आलिया से कम नहीं थे पर हमें क्या

पता की यहां राम नाम की आड में यह खेल चल

रहा है

जहां तक हम जानते हैं वहां तक तो जैसे

भगवान श्री कृष्णा की 16000 पटिया होने पर

भी उन्हें योगेश्वर कृष्णा कहा जाता है

वैसे कबीर जी चाहे कितने भी विवाह कर लेने

इनका ब्रह्मचर्य टूट है

और जहां तक इनके पहले विवाह की बात है वह

तो इन्होंने श्री राम से किया है

पूछिए

आप कहानी करते हैं की मैं तो राम की

बहुरिया हूं

जैसा वह

हम पर भरोसा रखें महाराज

और चाचा आप हो

की जैसे अभी हम ब्रह्मचारी

हैं वैसे ही उसे लड़की के आने पर भी

ब्रह्मचारी ही रहेंगे

और जैसे अम्मा को दिया बच्चन निभा रहे हैं

वैसे ही यह भी वचन निभाएंगे

ठीक है

वास्तव में ज्योत से ज्योत जाली है

धन्य हो प्रभु

शादी करने गया है

आप उल्टी बात कर रहे हैं मुंशी साहब उसके

नागरिकतार करने पर तमाम पंडितो मौलवियों

अमीर उमराव और यहां तक तवायफ के सामने

हमारी ना कट जाएगी

सरदार नहीं है डरने और धमकाने का असली

मौका तो यही है

बना दिया उसने

हुजूर हम कुछ अज करें हां हां फरमाइए

[प्रशंसा]

[प्रशंसा]

[प्रशंसा]

[प्रशंसा]

[संगीत]

तुम यहां आज बुझा रहे हो

[प्रशंसा]

सकता है

नाश्ता रहेगी

[हंसी]

कोतवाल साहब आज तो बीबी को बनाना बहुत

मुश्किल हो जाएगा

दोस्त उठ गया तो अच्छा दोस्त मिलन मुश्किल

हो जाएगा

[हंसी]

जब मां गए हम तो आपको क्या नुक्सा तलाश

कहलायेगा

पट्टी में आज लगता कर इल्जाम तपोश करो

अगर कोतवाल साहब आपने प्रपोज कण को

गिरफ्तार किया या नहीं जब इस वक्त वो

हवालात की हवा का रहे होंगे और जुलाहों को

गलियां दे रहे होंगे

बीच की सोच कर भी रूप ना होती है अरे तो

आंखों पे पट्टी बंद लो या फिर यहां से दफा

हो

जो इसके दिन भी नजदीक ए गए अब लगता है अरे

तुम हरामजादे

[संगीत]

लगे होगी जिसने भी लगे है यह सोचकर लगे है

की बस्ती के खास खास लोग तो कभी सांप की

बारात में गए हैं कोई बुझने वाला भी पैदा

नहीं होगा

[संगीत]

[संगीत]

हमने कुछ कहा ही नहीं हम तो बस इतना पूछ

रहे थे

तो इसका मतलब ये है की आप उन्होंने लगा

हरामजादे

मैं फूड दाल

ना ये देख बस्ती के सबसे बुजुर्ग हिंदू की

लाश पड़ी है कहे एक मुसलमान के झोपड़िया

का बचाव खाता हैं और फिर कौन हो लाइका

बच्चा ये बात कहता तो लाल भी देते तुम हर

को नहीं जमीन में गढ़ देना चाहिए बजा इसके

की जुगाड़ सोचो कमिना अपन की बात कर रहे

हो की हम लोग ये खबर पहचाने चाहिए इससे

आगे कुछ सोच लेंगे ये बात भाई ना देखो

दौड़ के दूर कभी सांप कहिए

हम शादी करके लड़की को धोखे में नहीं रखना

चाहते

हम दूसरी शादी नहीं कर सकते हैं

और हमारी अम्मा ने तुम्हें जवान दे राखी

थी

बेटा

अरे अरे तुम लोग कैसे बड़े बूढ़े हो लड़के

को समझते कहे नहीं

क्या समझाएगा

बारात लेकर भी आए हैं और शादी भी नहीं

करेंगे अरे बेटा बेटा हम तुम्हारे पाओ

बढ़ते हैं अच्छा ये क्या करते हो ठीक है

मत करो शादी लड़की को यहां से ले जो वरना

हम लोगों को मुंह दिखाने लायक नहीं रहेंगे

इसके लिए हमने कब माना किया है

ठीक है आप लड़की को लेकर आओ हम चलते हैं

[हंसी]

[संगीत]

पर अभी तक आई पता नहीं चल का रहा की आज

लगे तो किसने लगे और कहे हम लोगों ने किसी

का बिगड़ा है

यह तो पक्का हम भी नहीं कर सकते हैं की आप

किसने लगे

पारित जानते हैं की

बर्दाश्त नहीं कर का रहे हैं की दो कौड़ी

के लोग उनके बनाए हुए आंदोलन को तोड़ने के

खातिर अब जोड़ा गए हैं

जानते होंगे की सामने गए तो ससुरी पुरी

बोल खुला जाएगी और फिर इसको कर्म में उन

सब का थोड़ा थोड़ा हाथ है जिनके स्वार्थ

हमारे भाई चेयर से टकराते हैं और कोतवाल

का कमिना बन तो देखिए कभी साहब वो हिंदुओं

को गिरफ्तार करके साबित क्या करना चाहता

है यही की वो उसमें शामिल थे

और उनकी कलाई खोलना का सिर्फ एक ही तरीका

है

की जुलाहा पट्टी के खास खास लोग कोतवाली

जाए और अगर लगे भी है तो भी हमें उनसे

कौनो जिला नहीं है कबीर साहब ने कांटे की

बात कहीं है कबीर साहब हमेशा कांटे की ही

बात कहते हैं तुम ही कहते हो कहते की बात

तो पढ़ तो गए दो चांटे और क्या करोगे चलो

अब यहां बी फालतू जुबान चला रहे हो देखते

हैं कोतवाल साहब के सामने क्या बोलते हो

हमें क्या बोलना है तो सही बोलने को चले

कबीर साहब

क्या परेशानी है किन लोगों को जिन्होंने

आज लगे थी आज उन्होंने नहीं लगे है

तुम्हें हमसे ज्यादा पता है

क्योंकि भाई भाई के घर आज नहीं लगता है

देखो बाहरी है

अगर आपका फायदा यही साबित करने में है की

आज उन्होंने ही लगे है तब भी हमें उनसे

कोई शिकायत नहीं और हम सब जुलाहे मिलकर

उनके रिहाई की मांग करते हैं देखो मेरे सर

में दर्द हो रहा है

ठीक है फिर हम हकीम से जाकर बात करते हैं

सोच लो फिर तुम्हें हर जान की खुटी कौड़ी

भी नहीं मिलेगी हमें हर्जाना नहीं अपने

भाइयों की रिहाई चाहिए तुम ही बोलते रहोगे

किसी और

को भी मेरे साथ सुभान अल्लाह

एक जमाने में मेरे जुबान से आपके लिए गलत

अल्फाज निकले थे कोई बात नहीं

भैया तुम जो अपना कम करो और हां सुनो यह

तंजहाम कोतवाली में जमा कर देना

कबीर साहब आप चाहे तो मेरी जुबान का

टुकड़े टुकड़े कर डालिए लेकिन लेकिन मुझे

अपना शागिर बना लीजिए ए जो भाई

हमारे यहां तो ना कोई उस्ताद है ना सागर

ना कोई सेवक है ना स्वामी

ना कोई धर्म ही है ना धर्मी

बहुत गड़बड़

[संगीत]

है

[संगीत]

चलो

[संगीत]

संत जी

सेवा करो

का नाम है तुम्हारा

की तो मैं भी तो कहां

मैं कुछ खाने को बच्चा है

ना कुछ पारने को

वैसे तो

अम्मा के करने के बाद यह घर

घर सा लगता ही नहीं है

इस को हमने त्रिवाचा दिया था

की अगर तुम्हारी खुशी इसी में है

तो कर लेंगे

तुम्हें भूख लगी होगी

और तो कुछ है नहीं हमारे पास

हम तो खुदा ही अपने नहीं हैं

बस यह तन्हाई जो यहां है

मां तो कहानी और लगा है ऊपर वाले से

निकाला

सो हमने भी छाती पे पत्थर रखकर अम्मा को

तिर्वा दे दिया

और मोहम्मद के पास जान के लिए आजाद हैं

[संगीत]

तो फिर

एक तो रात होने वाली है ऊपर से बिजली चमक

रही है और फिर बस्ती के बाहर शायद कीचड़

भी हो ऐसे वक्त में अकेली जननी का जाना

ठीक है

हमारा यार

हम यहां रुक तो कुछ भी सोच सकता है

[संगीत]

हमन है

इश्क मस्ती

हम उनको

होशियारी क्या

रहे आजाद या जग से

हम

दुनिया से

यारी क्या

हमन है इश्क मस्ती

जो बिछड़े हैं

प्यार से

यह हम अपने प्यार के लिए ग रहे हैं

रहा नाजुक है

आजाद या जग से

हम

दुनिया से यार क्या

हमन है इश्क मस्ती

पिया हमसे

एन हम बिछड़े प्यार से

नैपल

खुश रहो

पर हमारे यार मोहम्मद को

हमेशा याद रखना

[संगीत]

तू इस वक्त

अकेली

यहां

बस हम ए गए हमेशा के लिए

हमारा बाबू हमसे कुछ नहीं का सकता

हमें पागल हो गई हूं और तुम भी उसके दीदार

करोगे तो पागल हो जाओगे

और एक दिन ऐसा आएगा

जब साड़ी दुनिया उसकी दीवानी होगी

सुने कबीर साहब की मेहरारू घर से भाग गई

है हुकूमत वह तो खुद ही कबीर साहब ने भाग

दिए लेकिन व्यास तो हुआ ही नहीं था तो फिर

घर में कैसे ले आए वो कहां से ले आए चुप

शर्म नहीं आई ऐसी वैसी बातें करते हो इतने

बड़े महात्मा के बड़े में

हो गए तो भस्म कर देंगे कौन कबीर साहब

बंदगी

[हंसी]

फनी की बात कभी नहीं करते सलाम वालेकुम

कबीर साहब बंदगी

हां तो अगर ज्ञान की दरकार है और मां में

उठ रहे तरह-तरह के सवालों के जवाब चाहिए

तो बस एक ही रास्ता है

सत्संग करो

कबीर संगत साधु की

साहब एक खुशखबरी बतानी है आपको सत्संग की

खातिर हम लोगों ने एक बहुत अच्छी जगह ढूंढ

निकाल है

और वहां एक बड़ा सा कबूतर भी बावा दिया है

और साहब उसे चबूतरे का नाम भी हम लोग ने

रख दिया

[हंसी]

देखिए

तरक्की और कोई फिक्र नहीं है

की अब कबीर अपने आप में एक बहुत बड़े ताकत

बन चुका है इसलिए तो छेड़ने का मतलब है की

बात काशी में ही नहीं जौनपुर दिल्ली के

दरवाजे की

लेकिन आप लोग बेफिक्रा रहे

कुछ ना कुछ तो हम जरूर करेंगे

बहुत कठिन है लोग को बस में करना

भूल जाते हैं हम

की कल यहां बैठा है

कब हमें उठा ले

और सब यही का यही धारा र जाए

तू मत जान बावरे

मेरा है सब कोई

खिलाओ

और अपने मलिक से

हमेशा यही प्रार्थना करो

खेसारी इतना दीजिए

जेम कुटुम सम है

मैं भी भूख ना रहूं

साधु एन भूख जाए

आप अपना कम करिए ना

सत्संग हो रहा है आप अपनी जरूरी बात कहानी

और जाकर करें फिर भी बात का है हम ही तो

जान हम बता तो रहे हैं आप अपना कम करिए

हमें अपना कम करने दीजिए ये कबीर साहब और

सब सत्संगों का अपमान है

और आपको हमारा बात करना

चाहेगा कोई भला आदमी तो यह कम कर ही नहीं

सकता या तो कोतवाल होगा या कोई और बड़ा

आदमी

बड़ा जो देखन मैं चला

अपना

मुझे बड़ा एन कोई

जल में कुंभ

कुंभ में जल है

[संगीत]

[संगीत]

[संगीत]

अरे हमें पता ही नहीं चला आप सब लोग हमारे

साथ ही ए रहे हैं

आप सब लोगों से जान का का नहीं पे माफी

चाहते हैं आप सब लोगों से जान का कहानी

चाहते हैं

[संगीत]

मेरे साथ बात यह है की आपकी जान खतरे में

है

तभी तो साहब अब आपकी जान और हो कीमती है

[संगीत]

हर बात का जवाब

है तो हम सब गरीब अनाथ हो जाएंगे

गुरु ने कहा था

की अंधियारा

अगर एक जगह रहे

तो अच्छा लगता है सुखिया सब संसार है

तो अच्छा लगता है

पर प्रकाश को तो हर तरफ फैलना ही चाहिए

फैला दो उजियारा दुनिया के हर कोनी में

हमारे ही दर पर आता था पहले कहता था हमें

कुंडली जागरण करना सिखाए हम ही से योग की

शिक्षा ली अब हमारा ही उपवास करता है

हमारा सर्व सत्यानाश कर देंगे वही आपका

कभी हम रिक्शा को एडम ग्राम बताता है अब

बताइए योगी भिक्षा नहीं मांगेगा तो खाएगा

कहां से हमारी वेशभूषा हमारे चिन्ह हमारा

आचरण व्यवहार सभी कुछ उसे पर लगता हैं

विकेट समस्या आज पड़ी है इस चुनौती का तो

सामना करना ही पड़ेगा

काबे और कैलाश में जिसको ढूंढ जैन

रविदास प्यार राम तो बैठे हैं मां माही

कहां ढूंढे रे बंदे मैं तो तेरे पास में

[संगीत]

अपने अंतरमन के

अंदर के दरिया में डुबकी लगाने से ही राम

मिलते हैं

परमार्थी रतन मिलते हैं

अंदर जान पर ही

अभ्यासी को अनंत सुने पड़ता है

सहस्त्र दाल कमल और भंवर गुफा दिखाई पढ़ते

इसी तरह एक-एक सीधी चढ़ चढ़

परमात्मा का साक्षात्कार करता

हम गलत नहीं का रहे थे नायाब कोतवाल ने

दोपहर तक कभी सांप को पकाने का फैसला किया

है तुम्हें कैसे मां गैलन मामू ने खबर दी

तुमने बात कर रहा है यह कहा पकाने का

फैसला किया है ऐसे कैसे पकाने देंगे

हमारा यह रास्ता नहीं है

हमारा सच्चाई का रास्ता है उसमें हथियार

की जरूर नहीं पड़ती है

दुश्मनों खुदा का बांदा है

उसमें परमात्मा का अंश है

और फिर प्यार का जादू तो दुश्मन को भी

दोस्त बना देता है

देखो दोपहर तक जुलाब पट्टी के मोहने पे कम

से कम 30 आदमी हथियार लेकर खड़े हो जान

चाहिए और 20 तो मनाई फरसा बालम लेकर अपने

घर में छिपे हैं जैसे ही कोनो खतरा दिखे

कभी सांप की डेरा के चारों तरफ फेल जाए

पर कबीर साहब को इस बात के कानों कान खबर

ना हो ऐसा कम करें का है जो कभी साहब नहीं

चाहते अरे साहब तो सबको अपने जैसा समझते

हैं उनको मालूम नहीं है सर्व नायाब कोतवाल

कितना है तो जरूर आएगा

और सब प्यार का जादू धारा का धारा र जाएगा

तुम सिर्फ दो लोगों के साथ कभी

और उनके खैर माकूतम के लिए जुला पट्टी के

बाहर

200 हथियार बन सिपहिया के साथ हम तो हैं

ही तुम फौरन

क्या बात है

[प्रशंसा]

सैयद मोहम्मद गैसू दराज के साथ शहर काशी

में तशरीफ़ ला रहे हैं तो तो कोतवाल साहब

ने उनके हिफाजत और इत्तकबाल की जिम्मेदारी

हुजूर को देने का फैसला किया है

पट्टी क्यों जी हां यही पैगाम मिला है की

वो सीधे जुलाहा पट्टी जाकर कबीर साहब का

दीदार करेंगे और वापस राजघाट होते हुए

बांधवगढ़ तशरीफ़ ले जाएंगे

शेर खान

जब तमाम अदना और आधा लोगों के दिलों में

कबीर के दही हमदर्दी का जज्बा पैदा हो

सकता है

जब राजा साहब और ख्वाजा गिसू दराज कबीर

साहब की दीदार के लिए जुलाहा पट्टी जा

सकते हैं

तुम कैसे का सकते हो की हम गलत नहीं है

कबीर साहब उससे संत गिरी से निपटते हैं

हमको तो कुछ समझना ए जाए

कोतवाल साहब वहीं रुक जाइए अगर एक कम हो

आगे बढ़ाया तो पांच आदमियों की लाश है

दूल्हा पट्टी में तड़पती नजर आएंगे अरे

भाई पहले हमारी बात तो सुनो नहीं पहले

हमारी बात सुनो हम लोग गरीब लोग जो हमेशा

तुम्हारे सामने रिया आते रहे आज अपने अपने

घर में बालम और बरसा लेकर तुम्हारी बात जो

है कहे अरे पूछो क्या है

कहे बस्ती में आज लगवा के हिंदू मुसलमान

में फुट डराए के हमारे साहब को कमजोर

बनाने की कोशिश की फिर वो कुछ ना हो सका

तो आज इस महात्मा को पकाने की खातिर आए हो

और वो भी सिर्फ चाट हो सिपहिया ले के जो

पहले फौजी लेक आओ

घोड़ों को किसी दूर दर्द की छांव में बंद

दो

[प्रशंसा]

अस्सलाम वालेकुम

नहीं छोड़ो एक छोटा बच्चा है पत्थर हूं

छोटा सा ही था

एक कपड़ा मिलेगा

हम लोग चाहते हैं की राजा साहब के आने से

कब यहां पर सफाई और पानी का चिड़ा कर दें

की तुम्हारा माहिया चौबारा नहीं जहां दिन

में कर बक्स भाई होती है गरीबों की बस्ती

है मगर भाई राजा साहब

दो-तीन झाड़ू और एक अपने की मशक का इंसान

हो सकता है

शुक्रिया

देखा साहब के प्यार का जादू सिर्फ जादू

नहीं

तो करिश्मा है

[संगीत]

आपके दर्शनों के लिए पधार रहे हैं

प्रणाम कबीर साहब

हमारे साथ चिश्ती संप्रदाय के बहुत बड़े

संत ख्वाजा सय्यद मोहम्मद

का लाभ उठा ही लेंगे

बिरादर

हमारे जहां को भी अपनी माशाल्लाह टशन करो

साहब

हमें कुछ ज्यादा तो पता नहीं है

पूछिए जो जानते हैं बता देंगे

हम तो बस इतना मानते हैं

सदा तेरा दिल तो है सनम

और भी कुछ खाने की जरूर करोगे

मलिक आपको जानता है

तो फिर आपको कोई दूसरा ना भी जान तो फर्क

नहीं पड़ता वह वह

सुभान अल्लाह सुभान अल्लाह

जी हां ठीक का रहा था करिश्मा कैसे किया

साहब

ना कछु किया

ना कर सका

ना करने योग शरीर

जो कुछ किया शहर किया

भाई कभी कभी

ऐसा कैसे हो सकता है की मलिक की याद सिर्फ

मंदिर या मस्जिद में ही आए

और वह भी मंगलवार या जुम्मे के दिन

और वह किसी खास समय पर

बाकी जगह में बाकी दोनों में बाकी समय में

कहे मलिक की याद नहीं आई

पूजा

नमाज पड़ी और अल्लाह ताला को भूल गए

खबर मिली है की

सूफी संत बड़ीउद्दीन शाह मदर का इंतकाल हो

गया

उनके ना रहने से अच्छे केमोन में रुकावट

आएगी माटी माटी रही समय

पवन लिया सांगला है

अगर पहले से ही पानी को बाप मां के चले

यानी की

शहर के नायक कोतवाल का तबादला जौनपुर कर

दिया गया है और ये ओडा अब मुश्किल

दिया गया है

नायक कोतवाल बनते ही बीमा पद जाना कुछ समझ

नहीं आया भाई मौलवी महोदय ऐसा है की

दीपावली से पहले के रितु कुछ होती ही ऐसी

है परंतु हमें सर्वाधिक प्रसन्नता इस बात

की है ये कम से कम आप तो निश्चित रूप से

हम हिंदुओं के हितों का ध्यान रखेंगे भाई

देखिए अब हमारा कोई धर्म नहीं और सब धर्म

हमारे हैं

अरे कोटवा साहब आप तो बिल्कुल कबीर की तरह

बात कर रहे हैं नहीं हमारा मतलब ये है की

हकीम का अजब होता है हर बसर और हर मजहब की

हिफाजत करना और मजहब की फलावू अभी लोग तो

करते हैं वो कैसे

आज से 1438 वर्ष पहले हजरत इस मसीह का

मजहब इस दुनिया में आया और दुनिया के एक

कोनी से दूसरे कोनी तक फैलता चला गया

सिर्फ दिमाग से

मनवार महोदय हमें तो ऐसा नहीं लगता की

आपने हमारे धर्म के रक्षा के लिए क्षमा

कीजिए बिल्कुल भी दिमाग से कम दिया है

शायद

आप कभी वाला मसाला हाल नहीं कर पे हैं जी

देखिए हमने हमेशा हर मुमकिन कोशिश की है

लेकिन अब वो शोहरत के मार्शल के इतने करीब

ए गया है की उसका सैया भी हमारी यादों के

बाहर तक पहुंच चुका है जनाबे अली मकतब में

आजकल बच्चे

ऐसे-ऐसे अजीबो गरीब सवालात पूछने लगे हैं

किसने जुबान पे लाना अभी हराम है लेकिन

बच्चे सब सीखने कहां से आजकल कुछ लोग उसकी

नजर में गली कुछो में गेट फिरते हैं सबके

साथ बच्चे भी सुनते हैं और फिर घर में या

मदरसे में उन सब देहाती अल्फाज का मतलब

पूछते हैं

लिखने वाले ने किया है और दूसरा तुम कर

रहे हो कैसे इतना अच्छा ग के

मजबूरी

किस बात की गाने

तुम ही रखो और गांव

अरे यह मर्दों का गांव है मर्दों का समझी

अरे ये पागल है पागल

चल

दो चीज होती हैं

जोड़ना

और छोड़ना

कबीर साहब

जोड़ना तो बहुत ही बड़ी चीज है

पर छोड़ना भी कम मुश्किल चीज नहीं

जो आदमी जितना छोड़ना चला जाता है

उतना ही मलिक के करीब पहुंचता जाता है

पर सांप कौन सी छोड़ने की बात कर रहे हैं

आप

वही चीज

जो तुम्हारे पास नहीं है

जो चीज हमारे पास नहीं है

नहीं

आदमी एक मालदार आदमी कुछ दिन में ढंग से

जरूर होगा और तब उसे आसानी से छोड़ सकता

है

पर हमारे तुम्हारे जैसे निर्धन के लिए धन

से उगना बहुत कठिन कम है

क्योंकि धन उसे कभी मिला ही नहीं

बहुत बड़ा त्याग चाहिए

पर जब तक अंदर से उबोगे नहीं

तब तक छोड़ोगे नहीं

और बिना छोड़ें बिना कोई

मलिक की र नहीं मिलती

रावण के जलने पर इस तारे कष्ट सारे रोग

अपने आप ही जन्मतें वो भी तो छोटे-छोटे

रक्षा ही होते हैं ना

परेशानी की कोई बात नहीं है बस जाते ही लव

कर दो

कर फिर चला ले तो फौरन आराम पहुंचेगी

क्या हुआ

सुन रहे हैं यहां पर

और तो और इन लोगों ने अभी कोतवाली को भी

नहीं छोड़ मगर यह कौन अगर कोतवाल साहब के

कानों तक इसकी आवाज पहुंच गई तो यह कबीर

का ही है

परंतु गाने वाला शायद कोई और है

धर्म स्थापित करना चाहता है

कौन है आप लोग

जी बहन बना रहा है अगर देख सकते तो अब तक

तुम्हारी खफादिया फोड़ दी होती हां छोड़

दो इसे छोड़ दो

लगता है सच में चला है भाई देखो तुम्हारा

गाना मैं बहुत अच्छा लगा इसलिए तुम्हें

यहां बुला लिया

जोर जबरदस्ती करता होगा

नहीं हुजूर

यह तो हम अपनी मर्जी से गेट हैं

जा सकते

रविदास प्यार राम तो बैठे हैं मां माही

कभी साहब भी तो यही कहते हैं की मोका कहां

ढूंढे रे बंदे मैं तो तेरे पास में

माशाल्लाह अब आप एकदम दुरुस्त है

बहुत बड़ा जो मर्जी बन कर फैलता जा रहा है

उसकी कोई दवा करें तो जान वो क्या मारा है

कबीर आप तो हर मर्द की दवा जानते हैं ना

हुजूर गजब हो गया क्या हुआ वो नूर तो भूख

और प्यास दम तोड़ गया|

तुम ऐसा करो हमारा बात तो मैं हकीम साहब

बाबू साहब अब क्या करें क्योंकि अब अगर डर

गए तो डरना कैसा है आप तो कुछ जानते ही

नहीं कौन नूर कैसा नूर मा गया होगा

किसी से डरते हैं लास्ट को अपने कब्जे में

रखो क्योंकि अगर लास्ट उसके घर वालों को

मिल गई तो बात और भी बाढ़ शक्ति है

हम जो करते हैं करते हैं करते नहीं अब तो

जा सकते हो

पैसे नूर ने उसकी हिरासत में दम तोड़ दिया

ना और गेट रहना की माटी माटी रही

हो और क्या बोल रहे हो

सबसे पहले तो नूरी चाचा को इसकी खबर करनी

चाहिए

उनका दुख बर्दाश्त कर पाओगे

करना ही पड़ेगा

कुछ लोग कोतवाली जाए वहां जाकर नूर चाचा

की लाश लेकर आए हम लोग उनके घर जाते हैं

अब तो तुम्हें हकीम परगना बना दिया जाएगा

अरे नासपेटे अल्लाह मिया ने तुझे

कर्म जेल इतना तो देख लिया होता की ये डेड

पसली का अंडा तेरे से भी सकेगा या नहीं

मैं तो बेवफा हो गई हूं पर अल्लाह करें

तुझे भी कीड़े

पड़े एक बार उन्हें आंख भर के देख ले

साहब नायाब कोतवाल का कहना है इस सब पे

जिम्मेदार आप हैं यह

खाने तो दो उसे पुरी बात कुछ नहीं साहब

हमने उनसे का दिया है की जब तुम लोग

जुलाहा पट्टी में आज लगवाएं की हम लोगों

ने फुट नहीं डलवा पे तो आपका कर लोग उन

लोगों ने का मतलब यह है की अगर आई बात हम

लोगों के मां में बैठ गई कौन बात की नूर

की मौत के जिम्मेदार कबीर साहब हैं तो हम

लोग उनके साथ छोड़ देंगे और उल्टा हमें

उन्हें पता है की अब तुम्हारी कोई चालाकी

नहीं चलेगी लाश कहां है

शायद बहुत लड़ने जा करने पर भी नायाब

निलाहट देने से इनकार कर दिया है

क्योंकि कोतवाल ने तो पहले इनकार कर दिया

था तो फिर आप कैसे राजी हो गया

इस बात का पता नहीं चलना चाहिए बोलो चाचा

कबीर साहब को तो नहीं बताओगे चलो नहीं

बताएंगे तो फिर ध्यान से सुनो ये तो तुम

जानते ही हो गायब कोतवाल ने नूर चाचा की

लाश कोतवाली के बाहर लटकवादी थी और उसे पर

सिपहिया का पहरी लगा दिया था अच्छा पहले

क्यों तो इसलिए की लास्ट शूटर कहानी भाग

ना जाए

और सुनो हम लोग ने कहा किया की नायक

कोतवाल का पुतला बनाया आदम कहे अब सनोज भी

की पूछ नहीं रहोगे कहे अच्छा अच्छा बोलो

बोलो हां तो रात को पुतला लेकर हम गए

कोतवाली कोतवाली का है फिर गोली बीच में

अच्छा ठीक है बोलो हां तो वहां जाकर हमने

कहा देखा की दो सिपाही लास्ट में पहरी दे

रहे थे और उसमें से एक सिपाही को बड़ी

गहरी नींद ए रही थी आज तो दूसरे को भी रही

थी पर वो तनिक ज्यादा ही वफादार बन रहा था

अरे वो सोच रहे होंगे की हम पहले भी दे

रहे हैं तो किस पे एक तो लास्ट वो भी मनी

हुई हां तो आखिरकार दोनों सिपहिया ने ते

किया की एक सिपाही हो जाएगा और दूसरा पहले

देता रहेगा और उसके बाद वो सिपाही उसको जग

देगा तो वो पहने देगा और वो हो जाएगा नहीं

नहीं वो सब तो ठीक है पर तुम लोग को ओला

लेकर कहे के लिए गए थे वहां

तो फिर क्या हुआ बाद में बताता हूं पहले

अपनी पुरी बात तो कर लो हां हमारा इरादा

ये था की लास्ट को उतार कर उसकी जगह

कोतवाल का पुतला मटका देंगे

[प्रशंसा]

और बस जैसे ही एक सिपाही सोया दूसरे का

मुंह बांध हाथ पर बंदे और झाड़ियां में

डाला और लास्ट उतरी और पुतला लटकाया और

लॉस लेक

12 दिन और फर्क हुआ कहां हुआ फिर का हुआ

यह जन के लिए हम इन्हें वहां छोड़ आए थे

अब यह वापस ए गए हैं बाकी सब बता देंगे

आगे का हाल सनोज तो हंसते हंसते बेहाल हो

जाओगे फिर भी सुना दो पर चर्चा बात ये है

की हमें लोरी चाचा का भी हाल देखना है ठीक

है चलते हैं चलते चलते देख लेंगे

हां तो बताओ क्या हुआ

सवेरा तो नहीं था आगे बताओ क्या हुआ जो

सवेरा होने पर हुआ वो है सुनने लायक तो

बताओ ना इंतजार किसका कर रहे हो मतलब

घुमाइए जो सिपाही सो गया था सवेरे जब उसकी

आंख खली तो वो क्या देखा है देखा है दूसरा

सिपाही गायब और जब दूसरी तरफ देखा है तो

क्या देखा है

सामने भीड़ हंस रही है और जिधर देख कर फिर

हंस रही है उधर देखा है तो क्या दिखता है

देखा है लॉस की जगह कोतवाल का खुद का लाड

रहा है और चौथी तरफ देखा है तो क्या देखा

है क्या देखा है सामने से नायाब कोतवाल की

सवारी चली जा रही है

ये सब क्या है

कुछ दोनों

भाई

हमारी शक्ल ऐसी दिखती है क्या

फौरन करो

अरे अब मैं क्या करूं

[प्रशंसा]

क्या हुआ साहब बड़े परेशान ग रहे हो मेरा

दिमाग मत चाटा भाई

साड़ी परेशानी की जड़ या कमबख्त पुतला है

पूछने को गली दे दिया

किसी को बताना मत मगर तुम ही बताओ की इसका

करें क्या बता दे बता दो भैया साड़ी उम्र

आपकी गुलामी करूंगा तो फिर ऐसा है की अगले

हफ्ते दशहरा है और हमारे मोहल्ले में जो

रावण का पुतला बना था वो बीमा है तो तो

क्या इसमें इसी तरह के और लगाकर हमें दे

दो हम इसे रावण मां कर जल देंगे इससे आपका

कम भी हो जाएगा

तो फिर बस इस भाइयों को ये निक सलाह देकर

हम सीधे यहां चले ए रहे वो तो ठीक है पर

हमें दूसरी बात की फिक्र का जा रही है कौन

सी बात थी

उसे बात की कसम खाई है

की अब हम कभी सांप का पद जाएंगे और सारे

शहर में घूमते हुए कोतवाली के सामने

[प्रशंसा]

है तो यही

पर नूड़ा के गुसल कफन के बाद बोले अब हम

कुछ समय

कुछ दिन

अकेले रहना चाहते हैं

आप लोग सत्संग करें

जरूर करें

पर हमें अब

कुछ दिन

कुछ सोचना है

ध्यान करना है

और फिर जाना है बाहर

काशी से बाहर

जान को बोल रहे थे

अब हमें रास्ता

सबकी मांगे खैर

ना कहु से दोस्ती

ना कहु से

हमने भी सोच लिया की दुनिया में जितनी दूर

दूर तक उनके ज्ञान का प्रकाश फाइल उतना ही

अच्छा है

उन्होंने यह कहा की

समय बर्बाद मत करना

राम नाम की ल है

ल सके तो ल

अंतकाल पछताएंगे

प्राण जाएंगे छठ

गति हुई सीधे कोतवाली की तरह भी जा रही है

उसकी देखभाल की खातिर कोई है

किसी को सजा नहीं मिलनी चाहिए

है की नूर ने उनका ही पद गाते-गाते अपनी

प्राण दे दी और इस बात का

कहानी एन कहानी वो अपने आप को दोषी मानते

हैं

बहुत प्यारी थीi

[संगीत]

कोतवाली में हम बताते हैं क्या करो कोतवाल

का ध्यान बताने के लिए सब लोग सारे शहर

में तितर-वितर हो जो और कबीर साहब के पद

गेट रहो और जैसे ही नूरी वहां पहुंचने

वाली हो कोतवाली के सामने सब लोग पहुंच जो

चलो भाइयों चलो चलो सारे शहर में फैंस जो

[संगीत]

[संगीत]

[संगीत]

तू ही कोतवाल है

[संगीत]

[प्रशंसा]

कहां चला रक्षा देख काशी की गली कुसुम का

बच्चा बच्चा कबीर साहब का पांच ग रहा है

अगर असली मां का जाना है तो नीचे ए और

कैसे

[प्रशंसा]

[संगीत]

तो यहां खत्म होती है

अगर सत्य

की कहानी

[संगीत]

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