All language subtitles for Mirzapur - 01x05 - Bhaukal.AMZN.WEB-DL.DDP5.1.H.264-NG.Hindi.C.updated.Addic7ed.com

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Original subtitles

[खटखटाने की आवाज़]

अफ़सर : खोल काहे नहीं रहे हैं?

[खटखटाने की आवाज़]

अफ़सर : इतना देर क्यों लगा रहे हो, भाई?

[खटखटाता है]

क्या बे! खोलो!

जी, साहब।

ये इतना देर काहे लगा दिए खोलने में?

साब, वो आँख लग गया था।

अरे, कागज नहीं दिखाए क्या साहब को? हैं?

[गहन धुन बजती है]

ये क्या है?

अरे, साहब, पता नहीं कौन चूतिया ये पानी का जर्किन इस कालीन ?

गिर गया फिर। और ये जितना भी लाल वाला कालीन है, ये सब रंग छो

निकलो।

[ट्रक का हॉर्न बजता है]

दो सेकेंड लेट खोले होते, हम ठोक दिए होते साले को।

[हँसता है]

[गहन धुन बजती है]

[टीवी पर भड़कीला संगीत बज रहा है]

[भीड़ वाहवाही कर रही है]

[लाउडस्पीकर पर आदमी] हेलो!

देवियो और सज्जनो, बच्चे और बच्चियो, दिल थामके बैठिए। प्र?

वोट नंबर एक...

आराम से।

बॉडी बिल्डिंग टॉप 20 क्लासिक चैंपियनशिप 2017

अभी देंगे हमको कम्प्यूटर? कबसे रुके हुए हैं।

थोड़ा काम निपटा लें।

गुड्डू : ले लो, यार।

तुम भी क्या याद रखोगे। [लंबी साँस लेता है]

[गोली चलाने का नाटक करता है]

गुड्डू बेटा।

[गहरी साँसें लेता है]

अजीब सी गुदगुदी मच रही है ना तुमको? हैं।

[गहरी साँस लेते हुए] हैं? हैं? हैं? हैं?

[गहन धुन बजती है]

मिर्ज़ापुर की गांड फाड़के रख देंगे।

गुड्डू बेटा। हम्म?

[गहरी साँसें लेता है]

[धीमी आवाज़ में] अब सब डरेंगे साले।

हमको बंदूक की मदद से डर नहीं बढ़ाना है।

डर की मदद से बंदूकें बढ़ानी हैं।

[गहरी साँसें लेता है]

एक, दो, तीन, चार, पाँच...

मिर्ज़ापुर

[थीम म्यूज़िक बजता है]

[साइकिल की घंटी बजती है]

[अस्पष्ट बातचीत]

स्वीटी : हो गया भैया, चलें?

-कितना वक्त... -कैसी हो, स्वीटी?

गुड्डू : तुम्हारे लिए लाए हैं।

इसमें क्या है?

खोलके देख लेना।

[मोटरसाइकिल की रेस बढ़ाता है]

देर तो नहीं हुई?

नहीं, हम भी बस अभी पहुँचे हैं।

[दरवाज़े पर खटखट]

राजन मिश्रा?

हम्म।

हम बबलू पंडित। ये गुड्डू पंडित।

उस्मान भाई फोन किए होंगे आपको?

हाँ।

[खिलौने की आवाज़]

महीनों से व्यापार मंदा है मुकेरी बजार में।

काहे?

अरे, क्या बताएँ?

साली सारी झंडू बंदूकें हमारे ही किस्मत में आ रही हैं।

चाहे फट जा रही हैं, नहीं तो जाम हो जा रही हैं।

अब, एक के बाद एक ग्राहक वापस करके जा रहा है।

और जब ग्राहक चीज वापस करेगा, तो पैसा तो लौटाना ही पड़ेगा ??

क्या करें?

बीवी है हमारी।

दो साल पहले सादी हुआ है।

लीजिए ना!

[हिचकिचाते हुए] असल में, पानी के साथ देने के लिए मिठाई-विठ?

तो चीनी दे दिया उसने।

परिवार में कौन-कौन है?

माँ-बाऊजी हैं...

नहीं, तुम्हारे नहीं, बीवी के परिवार में कौन-कौन हैं?

जौनपुर से हैं ना वो? हम्म?

गुड्डू : और साला भी है ना तुम्हारा?

हम्म?

-हाँ। -हाँ।

तुम्हारा कॉल रिकार्ड निकलवाए हैं।

यही वो साले साहब हैं ना जिनसे लम्बी-चौड़ी बातचीत चलती है त

हाँ, तो इससे क्या मतलब?

और हर हफ्ते तुम्हारे साले साहब एक संदूक लेके आते हैं और ए

ऐसा क्या है उस संदूक में?

अरे, उसमें घर का सामान-वामान रहता है, और क्या?

ये तो झंडू नहीं हैं।

जौनपुर से तुम्हारा साला तुमको झंडू बंदूक पकड़ाए जाता है

और तुम उसको अच्छी वाली बेच देते हो।

फायदा तुम्हारा, नुकसान कालीन भैया का काहे?

अब तुम ये तय कर लो कि तुम...

[गहरी साँसें लेता है]

[चिल्लाते हुए] अरे, गुड्डू भैया, ये क्या कर दिए आप?

अबे, बहुत बतिया रहे थे, यार।

कालीन भैया बंदूकें दिए हैं।

[बच्चा रोता है]

[काँपती आवाज़ में] नहीं... नहीं, गुड्डू भैया, उन लोगों को छो?

जाओ, बाहर जाओ। बाइक पे बैठो।

[औरत रोती है]

नहीं, नहीं, मेरा बच्चा।

[मोटरसाइकल के इंजन की आवाज़]

उनको छोड़ दिए ना?

हाँ, छोड़ दिए। और ये ले आए हैं।

-ये क्या है? -माँ का दूध।

इसको लेके देखेंगे।

फिर दोबारा जाएँगे लेने।

यही तो सौदा किए हैं ज़िंदा छोड़ने के लिए।

रमाकांत : अरे, गुप्ता!

-ये कोरियर कर देना। -ठीक है।

और रसीद याद से दे देना।

[हँसते हुए] रसीद दे देंगे। और, पंडित जी, ये मिर्ज़ापुर है।

आप चाहे जितनी मर्जी चिट्ठियाँ भेज दीजिए, कुछ नहीं बदलने ?

[पंडित मंत्र पढ़ रहा है]

पूजा समाप्त हुआ।

प्रसाद खाएँ, दक्षिणा दीजिए।

जी। लीजिए।

कल्याण व दीर्घावर्ष।

कल्याण हो।

कल्याण हो।

कल्याण हो।

और? क्या-क्या सोचा है?

[धीमी धुन बजती है]

थोड़ा इस्टाइल बदलना पड़ेगा, कालीन भैया,

कबूतरों से डीलिंग करने का।

और थोड़ी सिस्टम की सफाई भी करनी पड़ेगी।

व्यापार तभी आगे बढ़ पाएगा।

कालीन भैया : और क्या-क्या करें?

भैयाजी, इन गोलियों के काम के लिए आप औरतें और बच्चों को रख ?

कालीन भैया : काहे?

वो बीड़ी नहीं पिएँगे।

औरतें समय से अपना काम भी खतम करेंगी।

उनको अपने घर जाके अपनी रसोई और अपने बच्चों को भी संभालना

और एक घड़ी लगवा दीजिएगा कहीं पे। शिफ्ट का वक्त भी बताती र

नमस्ते, भैयाजी।

-सलाम वालेकुम, मामू। -मकबूल : वालेकुम सलाम।

ये मकबूल के भांजे हैं, बाबर।

आप लोग साथ में रखिए और इनको काम-वाम सिखाइए।

जी।

इनके बस की कुछ नहीं है।

अपनी पढ़ाई भी पूरी नहीं किए हैं।

मकबूल, परिवार, परिवार होता है,

चाहे जैसा भी हो।

उसके साथ खड़ा होना पड़ता है।

मकबूल : एक बात कान खोलकर सुन लो, बाबर मियाँ।

जी।

अगर काम हाथ में लिए हो, तो वफ़ादारी से करना।

उससे बढ़कर कुछ नहीं है हमारे व्यापार में।

क्या सलाह है तुम्हारी कबूतरों के लिए?

बबलू : भैयाजी, हम चाहते हैं कि सारे कबूतरों को दावत पे बुल?

[रहस्यमय धुन बजती है]

[पंडित मंत्र पढ़ता है]

सभी लोग आरती के लिए खड़े हो जाइएगा।

[सब आरती गाते हैं]

[घंटी बजती है]

[बातचीत की आवाज़ बंद]

पंडित : बोलिए, सत्यनारायण भगवान की...

सब : जय!

कालीन भैया : मकबूल।

खाना तैयार है?

[धीरे से] खाना लग गया, भैयाजी।

गुंडा 1 : मकबूल भाई, ये कालीन भैया हम लोग को अलग काहे बिठा द?

चुने हैं तुम लोगों को। कोई संदेश देना चाहते हैं।

दीजिए।

देंगे। खाना तो खा लो।

कालीन भैया : कुछ ज़रूरी बात।

हमने कुछ निर्णय किया है, एक नया सिस्टम लाने का।

आज के बाद, कोई भी कबूतर उधार पे कट्टा नहीं उठाएगा।

सिर्फ़ नकद देकर।

लेकिन, भैयाजी, उधर आप नकद पे माल देंगे,

और इधर ये लोग हम लोगों से हर हफ़्ता पैसा उठाते हैं।

आज के बाद, आपसे पुलिसवाला पैसा नहीं उठाएगा।

-भैयाजी... -अरे, गुप्ता जी, आप खाना खाइए।

खाने के बाद पान खाएँगे ना? बात हो जाएगी।

ओ भैयाजी, झंडू बंदूक का क्या करेंगे?

जी, उस्मान भाई, उसका भी कुछ ना कुछ कर लेंगे हम।

कालीन भैया खाना बहुत बढ़िया बनवाए हैं।

-[बंदूक चलती है] -[चीखता है]

[कराहता है]

आखिरी खाना बढ़िया होना चाहिए।

क्या है ना, जौनपुर से कोई भी कनेक्सन मंजूर नहीं है।

[खाली बंदूक की आवाज़]

-[गोलियाँ चलती हैं] -[आदमी कराहते हैं]

[काँच टूटते हैं]

गुप्ता जी, अबसे आप बाज़ार में कबूतरों से पैसा नहीं उठाएँ?

कालीन भैया का नाम बदनाम होता है बाज़ार में जब उनके कबूतर?

और फिर जिंदा भी रह जाए।

लेकिन कालीन...

अरे, नहीं, नहीं। आप निश्चिंत रहिए।

सबॉर्डिनेट संभाल लेंगे।

जितना कट्टा बाज़ार में बिकेगा, उतना ही हिस्सा आपको भी मि?

फिर एक नए संबंध, नए समीकरण की शुरुआत है, पान खिलाइए इनको, ब

[रहस्यमय धुन बजती है]

गुप्ता : सिंह।

तो, चलें, भैयाजी।

युद्ध स्तर पर शुरुआत करेंगे अब।

गुड्डू : निशाना लगाओ।

लो। लो, लो, लो।

[चिल्लाकर] अरे, ले ना!

-[गोली चलती है] -[कनस्तर खनखनाता है]

उपाध्याय : भैयाजी, कट्टे फट सकते हैं।

अरे, आप क्वालिटी डिपार्टमेंट के हेड हैं, उपाध्याय जी।

क्वालिटी सही रखे होंगे, तो काहे फटेंगे?

वो डेढ़ हजार वाला लो।

रुको, रुको, रुको।

दाहिने हाथ से चलाते हो ना?

[हँसता है]

बायें हाथ से काहे निशाना लगा रहे हो?

एक काम कीजिए,

दाहिने में एक ठो और ले लो।

एक बार में दोनों की टेस्टिंग हो जाएगी। वक्त भी कम बरबाद ह

लीजिए, लीजिए।

चलिए, लगाइए निशाना।

-उपाध्याय : भैयाजी... -तान दो।

[कराहता है]

ट्रक के स्टियरिंग पाइप से बनती है ना कट्टों की बॉडी,

तो फटने तो नहीं चाहिए।

फिर ये, काहे फट जाते हैं, बताइए।

हम्म?

देखिए, ढूँढिए, कोई ना कोई दिक्कत जरूर मिलेगी।

और जब तक नहीं मिलेगी, तब तक हम ऐसे ही क्वालिटी चेक करते रह?

ठीक है?

चलते हैं।

[चिल्लाते हुए] भोसड़ी वालो, तुम सबसे अभी करवाएँ क्वालिटी च

चल यहाँ से। चल। चल अंदर।

अब हम जो ट्रक वाले पाइप है ना, नहीं निकलवा पाएँगे।

अबे, हाथ रहेंगे ना, तभी ना खाएँगे।

भोसड़ी वाले,

हम ही से ही कट्टा चलवा रहे थे।

धन्यवाद।

पंडित जी, कितनी चिट्ठियाँ लिखेंगे आप?

हिंसा बहुत बढ़ गई है, सर। ऐसे तो ये शहर ही खतम हो जाएगा ना।

अभी आपको तो बेहतर मालूम होगा।

[धीमी आवाज़ में] हम तो सुने हैं, पंडित जी, कि आप ही के दोनों

देखिए, आप हमारे पुराने मित्र हैं।

हम बचपन से देखे हैं उन दोनों को।

उम्मीद करते हैं कि आप जल्द ही उनको रोक लेंगे।

समझ रहे हैं ना आप?

कम्पाउन्डर : अरे, आ गए, मुन्ना भैया?

दुल्हन का घूंघट उठाइए।

-हाँ, चलो भई। -पंकज : हाँ, मुन्ना भाई।

चखने में नहीं पूछेंगे क्या है?

औरत : सुबोध?

कुछ खाने के लिए ले आऊँ?

अब तो दोस्त भी आ गए।

कम्पाउन्डर : अरे, नहीं, नहीं, दादी। हमको कुछ नहीं चाहिए।

हम लोगों की जरूरी मीटिंग चल रही है।

तुम जाओ, खाना खाके सो जाओ।

औरत : ठीक है।

बहुत प्यारी हैं तुम्हारी दादी।

इसलिए तो जान से ज़्यादा प्यारी है हमको।

बहुत महंगे लगते हैं ये, गोलू।

तो लौटा दीजिए, अगर आप अनकम्फ़र्टेबल हैं तो।

[चीभ चटकाते हुए] अनकम्फ़र्टेबल तो नहीं हैं, बस,

तुझे कोई देगा ना, तब समझेगी तू।

सीरियस लगते हैं गुड्डू तुम्हारे लिए।

तुम हो ना, दीदी?

वरना, बेकार में उनका दिल टूटेगा।

सीरियस तो हम हो जाएँ, लेकिन पापा का क्या करेंगे?

अगर तुम सीरियस हो, तो हम पापा को समझा लेंगे।

हम हैं ना साथ में। वक्त आएगा तो खड़े रहेंगे।

[चूमने की आवाज़ निकालती है]

गोलू हट।

[जीभ चटकाती है]

[कैमरे की आवाज़]

[झनझनाहट]

लड़का : दो मटका कुल्फ़ी।

फोटो से भी अच्छे लग रहे हैं असल में।

हम कि झुमके?

तुम्हारी वजह से झुमके।

हम ना एकदम सीधे टाइप के आदमी हैं, स्वीटी।

हम झुमका दिए, तुम ले लीं। अब पहन भी ली हो।

तो बात आगे बढ़ रही है।

तो अब हम तुमको कुछ सीधे-सीधे बताते हैं।

हम ना जुर्म में शामिल हैं।

हमारे अपने कारण हैं उसके लिए।

अब अगर तुमको झुमका वापस करना है, तो अभी कर लो।

हम बुरा नहीं मानेंगे।

हम भी ना, सीधी टाइप की लड़की हैं, गुड्डू।

काहे वापस कर दें झुमका?

हमपे अच्छे लग रहे हैं, तुम ही तो बोले।

बंदूक से हमें डर नहीं है। बचपन से देखे हैं।

बस...

तुम अपना ध्यान तो रखोगे ना?

अपना ही नहीं, तुम्हारा भी ध्यान रख लेंगे, स्वीटी।

[हँसती है]

अच्छा, भैया, ज़रा सुनो। तो इसमें से कपड़े बिल्कुल मतलब सूख

मतलब निकालो और पहन लो?

आदमी : थोड़ा सुखाना पड़ेगा, आंटी जी। लेकिन एकदम टॉप मॉडल ??

डिंपी कहाँ है?

वसुधा : सहेली के यहाँ गई है, नोट्स लाने।

तुमको मालूम है, मिर्ज़ापुर में इतनी रात को सेफ नहीं है, फ??

डरने की कोई जरूरत नहीं है, पापा।

हाथ तो लगाके देखे डिंपी को कोई।

हाँ, हम तो भूल ही गए थे। उसके भाई गुंडा जो बन गए अब।

पापा, अब बस भी कीजिए ना। एक तो घर में नई चीजें आना शुरू हुई

अरे, चीजें कितनी नई ले आओ,

रोटी तो गेहूँ की ही खाओगे ना?

हाँ, लेकिन रोटी के साथ दाल की जगह मुर्गी तो खा सकते हैं।

आदमी : हो गया, भैया।

खा लो ना।

तुम खा लो। मुर्गी दें?

[गहरी साँसें लेता है]

आज सौ की जगह, दो सौ मारेंगे।

पहले से ताकत महसूस हो रही है।

-140, 141, 142, 143... -अरे, बस करिए।

...144, 145, 146, 147...

मकबूल : ये है मिर्ज़ापुर के मशहूर अपराधी,

अपहरण करने वाले, चेन खींचने वाले,

गली के गुंडे, चोर।

शहर के सबसे बड़े कमीने बुलाए हैं।

कीजिए जो बात करनी है।

भैयाजी, कोई दिक्कत है क्या?

हम तो कालीन भैया को पैसा समय-समय पे देते आए हैं,

वफ़ादारी के साथ।

वफादार हैं, इसी लिए तो आप सबको यहाँ बुलाए हैं।

[लंबी साँस लेते हुए] देखिए,

हमारा व्यापार है कट्टा बनाना,

और आपका है कट्टा चलाना।

है कि नहीं?

तो अगर हमने कट्टे बनाने बंद कर दिए, तो फिर आप चलाएँगे क्य??

घंटा?

हम चलाएँगे नहीं, आप भी बनाकर क्या करेंगे?

घंटा?

[सब हँसते हैं]

[चिढ़ाते हुए हँसता है]

शाबाश!

तो, दोनों का काम जो है, वो एक-दूसरे से जुड़ा है।

हमको कट्टे का उत्पाद बढ़ाना है,

तो तुम लोग को कट्टा ज्यादा चलाना पड़ेगा।

हमारे पास जितना कट्टा है, उतना ही चलाएँगे ना?

और हममें से कइयों के पास तो कट्टा है ही नहीं।

अगर आपकी ये समस्या हम हल कर दिए तो?

हाँ, तब...

ठीक है।

[रहस्यमय धुन बजती है]

आइए, उठा लीजिए।

इनके पैसे?

मुफ़्त है।

जितना चाहे उठा लो।

[बंदूकों की खड़खड़ाहट]

कम लगे, फ़ैक्टरी में खड़े हो,

और मिल जाएगा।

तो, अब इससे जितना कमा सकते हो, कमा लो।

शर्त ये है कि कट्टे चलते रहने चाहिए। ठीक है?

सभी : जी, भैयाजी।

और एक चीज। हो सकता है कि पुलिस एकाध बार आप लोगों को पकड़े??

लेकिन आप लोगों को कोई ज्यादा दिक्कत नहीं आएगी। इसकी गार??

सभी : जी, भैयाजी।

बबलू : जी, राम-राम।

तो, शहर ठंडा पड़ा है,

थोड़ा गरम कीजिए।

देखना, भैयाजी, इस बार दीवाली होगी मिर्ज़ापुर में।

[अस्पष्ट बातचीत]

[रहस्यमय धुन बजती है]

मुन्ना : क्या सोचके मुफ़्त में कट्टे बाँट दिए?

नतीजा निकलेगा, इसकी क्या गारंटी है?

और हमसे एक बार पूछे भी नहीं।

वो कालीन भैया को हमेशा लूप में रखे हैं, मुन्ना भैया।

और आप थोड़ा-सा धीरज रखिए। देखिए, नतीजा निकलेगा बहुत जल्द।

देखिए, हम लोग अभी सिर्फ़ सप्लाई बढ़ाए हैं।

एक बार उन लोगों के मुँह पे भी खून लगेगा, तो उन लोगों की माँ

आप बस प्रोडक्शन वालों से बोल दीजिए, ओवरटाइम के लिए तैयार

[धीमी नाटकीय धुन बजती है]

उस्मान : मुन्ना भैया, इन दोनों लड़कों का कुछ कीजिए। बहुत ??

तो, तुमको क्या लगता है,

हमको नहीं दिख रहा है?

पापा फ़ैसला लिए हैं। थोड़ा धीरज रखो।

जी, भैयाजी।

-मुन्ना : कुछ करते हैं। -जी।

रखो फोन।

अबे, कम्पाउन्डर।

हम्म?

पूरा शहर हाथ में बंदूक लेके घूम रहा है।

और तुम साले, अभी तक उस्तरे पे अटके हुए हो।

[आह भरता है]

मुन्ना भैया,

उस्तरे में प्यार है।

जब "खच" की आवाज़ आती है,

तब लगता है किसी को मारे हैं।

तुम तो साले आशिक की तरह बात करते हो।

एक बार गले पे फेर दो,

तो आदमी का मुँह से नहीं,

गले से कुल्ला होता है।

चीख भी नहीं निकलती है साले की।

छींटे उड़ते हैं बस।

भल्ल-भल्ल करके।

इससे मारना कला है, भैयाजी।

लेकिन हमको अभी मूतना है।

हम मूतके आते हैं।

हम भी चलेंगे आपके साथ मूतने।

वाह, दोस्त!

ये हुई दोस्ती।

मूत भी लगा तो साथ।

हम्म।

चलो।

-लेकिन, पकड़ेंगे अपना-अपना, हाँ? -[हँसता है]

[थूकता है]

[पेशाब करता है]

ए, मादरचोद।

ये क्या है, बे? साफ़ करो इसे।

माफ़ कीजिए, भैया। धो लीजिए, पेशाब ही तो है।

भोसड़ी के।

मुन्ना : हमें समझा रहे हो। हैं?

समझा नहीं रहे। आप तो फ़ालतू में बिगड़ रहे हैं।

कम्पाउन्डर : क्या बोला बे, भोसड़ी के? हैं?

मुन्ना भैया फ़ालतू में बिगड़ रहे हैं?

-नहीं। हम तो... -हैं? चलो, चाटके साफ़ करो।

[हाँफता है]

तेरी...

मादरचोद, हमपे मूतके भाग रहे हो? हम्म?

मुन्ना भैया, पेलते हैं साले को। लीजिए, कोशिश कीजिए।

-कम्पाउन्डर : कीजिए, कीजिए, कीजिए। -[हड़बड़ाता है]

[हाँफता है]

चुप। अबे, क्या इतरा रहे हो इतना!

[फुसफुसाते हुए] थोड़ा शांत रहो, बे। पहली बार है हमारा।

[ज़ोर-ज़ोर से चीखता है]

-[उस्तरा चलता है] -[ज़ोर-ज़ोर से चीखता है]

मुन्ना भैया, तकनीक लगाइए।

दीजिए, डेमो देते हैं आपको।

ऐसे गले पे रखिए,

-फिर देखिए। -[खून गलगलाने की आवाज़]

[खाँसता है]

तुम सही बोले थे, बे कम्पाउन्डर।

उस्तरे का अपना मजा है, गुरू।

[हाँफते हुए] आप जब कहेंगे, आपके लिए फिर से डेमो दे देंगे, म??

दोस्त हैं आपके।

कोई मजाक है।

हाँ, अब मूत लेते हैं।

अरे, सुनो। यहाँ आओ।

[चूमता है]

मुन्ना : एक बात कहें, कम्पाउन्डर?

कम्पाउन्डर : जी?

मुन्ना : पूरे मिर्ज़ापुर में, हमारे सबसे करीब तुम ही हो।

एक हमारी मम्मी थीं,

और अब तुम हो।

हमारा कभी चूतिया मत काटना, बे।

पुलिसवाला : देखो, हसीना, इन सब हिजड़ा लोगों का नेता तुम ही ह

इसलिए तो तुमसे माँग रहे हैं।

हाँ, तो लीजिए ना, साहब। मैं कहाँ मना करती हूँ।

-इसके अंदर रखा है पैसा। -बबलू : रुकिए, रुकिए।

हाथ डालके निकाल लीजिए।

[चिल्लाते हुए] पता नहीं तुम लोगों को भीख माँगना मना है? गै?

अरे, क्या हम ही लोग इस शहर में गैरकानूनी कर रहे हैं, साहब?

-बाकी सबको इजाज़त है। ए, साहब। -पुलिसवाला : ए, ए, ए!

-ए, रुको ना, साहब। -अबे...

-अरे, कहाँ चल दिए? -रुक जाओ, दो मिनट।

[चिल्लाते हुए] कान्स्टेबल बनाके रख लीजिए अपने यहाँ।

नहीं माँगेंगे भीख! इज्जत हमें भी बहुत प्यारी है, साहब।

ए, रुको ना, साहब। ए, कहाँ जा रहे हो? ए मादरचोद भड़वे। भड़वा ?

आजा, ए सकीना, जैसमीन।

आय-हाय। नमस्ते, बबलू भैया, गुड्डू भैया।

नमस्ते।

हमको जानते हो?

अरे, इस शहर में कहीं भी कुछ होता है ना, तो सबसे पहले हमें प??

कमाल का नेटवर्क है हमारा। आप लोग को नहीं जानेंगे? हाँ?

सुनो।

अरे, जोड़ी सलामत रखे।

चल, जैसमीन, आजा।

-ये ले 500 तू पकड़। -[हँसता है]

लोग जानने लगे हैं, बबलू, हम लोग को। हैं?

गुड्डू : मम्मी!

वसुधा : हाँ?

गुड्डू : लो, बे।

वॉशिंग मशीन खरीदके लाए थे, हाथों से कपड़े धो रही हैं?

अरे, तुम्हारे पापा के धो रहे हैं, भई।

काहे?

क्योंकि हम मना किए हैं, उस मशीन में अपना कपड़ा धुलवाने से

बच्चों जैसी बातें काहे कर रहे हैं, पापा?

ना, ना।

ये शहर तुम लोग का हुआ है।

ये घर आज भी हमारा ही है।

पापा, लेकिन ये रोज-रोज की बहस तो नहीं हो पाएगी ना?

आप बता दीजिए आपको चाहिए क्या, हम कर देंगे।

तुम्हें पता है हमें क्या चाहिए।

वो तो ना हो पाएगा।

शुरू मजबूरी में किए थे, अब मजा आ रहा है।

-अच्छा, सुनिए। -वसुधा : हम्म?

-जो पर्दे पसंद की थी ना आप... -वसुधा : हम्म?

...वो जाके ले लीजिए।

और डिंपी से भी कह दीजिए, वो जीन खरीद ले अपने पसंद की।

हाँ, अपनी तरफ़ से दे देंगे, नहीं तो नहीं लेगी वो।

एक ना हमें कुछ दिनों से बात करनी थी तुम लोगों से। सोच रहे ?

वो जो परचूनिया है ना, जिससे हम सौदा लेते हैं,

वो कुछ इज्जत से बात नहीं करता हमसे।

सही से। हमें अच्छा नहीं लगता।

सीधा कर दें साले को?

वो... वो बंदूक है तुम्हारे पास?

है।

सही है।

तो, हम तैयार होके आते हैं।

ठीक है।

वही वाली साड़ी पहनके चलेंगे। हम्म?

[धीमी आवाज़ में] काहे कर रहे हो, भाई, ये सब?

गुड्डू-बबलू की मम्मी है, बे।

इज्जत तो करनी पड़ेगी।

हाँ, लेकिन उसको कायदे से समझाइए ना, ये मारपीट करने का क्य??

अरे, यार।

वो जो पहले नहीं कर सकते थे, अब कर सकते हैं, तो काहे ना करें?

इसी का नाम तरक्की है।

[गहन धुन बजती है]

खाते में लिख देना।

-और पंडिताइन? -हम्म।

हाँ? [हँसता है]

क्या हाल-चाल, गुड्डू?

हमारा तो बढ़िया है।

तुम्हारे अभी पता चलेंगे।

[चीखते हुए] ए, गुड्डू! गुड्डू, गुड्डू! गुड्डू, गुड्डू, गुड्??

[राहत की साँस लेता है]

कूचके रख देंगे सारी उँगलियाँ,

और खोपड़िया में डाल देंगे गोली, समझे?

अब वो गुड्डू नहीं हैं जो लिबे-लिबे करते थे।

हमारी मम्मी को चाहिए पूरी इज्जत।

गुड्डू : हैं? दुकानदार : हम्म।

[धीमे से] और ये पंडिताइन क्या है, बे चूतिए? हैं?

[काँपती आवाज़ में] हमसे कह दिए होते, भाभी जी।

हम समझ गए।

[घबराहट में हँसता है]

हम समझ गए, गुड्डू भैया।

और... तुम्हारा ना, पूरा... पूरा महीने का राशन मुफ़्त।

पूरे साल भर का मुफ़्त।

नहीं, नहीं, नहीं, नहीं! जिंदगी भर का राशन मुफ़्त किया आपका,

[ज़ोर से] अरे, सुनो।

हमारे मरने के बाद भी, पंडिताइन... पंडित जी के घर पे राशन मु??

[काँपती आवाज़ में] और कोई सेवा, पंडित... भाभी जी?

इसका कितना दें आपको?

[घोड़ा खींचकर बंदूक चलाता है]

[बंदूक चलाता है]

[चिल्लाते हुए] गुड्डू पंडित!

बबलू पंडित!

इस शहर में रहना है,

तो ये दे नाम याद रख लो, भैया।

अभी कह रहे हैं।

जैसा चाहेंगे, सब पूरा वैसा ही चलेगा।

[गहन धुन बजती है]

कालीन भैया द किंग ऑफ़ मिर्ज़ापुर

क्या, भैयाजी, हमसे नकद ले रहे हैं आप।

उधर अपराधियों को आप मुफ़्त में कट्टे बाँट रहे हैं।

[हँसते हुए] थोड़ा इंतजार कीजिए, उस्मान भैया।

व्यापार बढ़ने वाला है अब आपका।

आदमी : हाँ, भई।

-[गोली चलती है] -[औरत चीखती है]

[हाँफता है]

औरत : मेरी बच्ची, मेरी बच्ची!

[गोली चलती है]

आदमी : चलो उतरो।

अरे, तुम्हारा दो-चार जो सामान चोरी हो गया, उसके लिए एफ.आई.आ

-पर... -हैं?

जान-माल तो आप ही का था ना?

तो, अपने जान-माल के सुरक्षा के लिए, खुदई कुछ प्रयास कीजिए ?

पुलिस अफ़सर : समझ रहे हैं बात को?

बबलू : देखिए, जब शहर में डर बढ़ेगा, सिर्फ डराने वालों को जर

डरने वालों को भी हथियार रखने पड़ेंगे, बचाव के लिए।

हमले में भी बंदूक, बचाव में भी बंदूक,

हम बनाएँगे मिर्ज़ापुर को अमरीका।

[साइकिल की घंटी बजती है]

चल, पैसे निकाल।

[बंदूक चलती है]

[बंदूकें चलती हैं]

इस महीने अपराध काफ़ी कम हो गए।

अपराध दर्ज ही नहीं करेंगे, तो गिरेगा ही ना, सर। [हँसता है]

कालीन भैया : सोच रहे हैं ये

गुड्डू-बबलू को कालीन के व्यापार में शामिल कर ही लेते हैं?

अच्छा नतीजा दिया है दोनों ने।

कुल मिलाके बुद्धि और डेयरिंग का अच्छा संतुलन है।

एक बात कहें, कालीन भैया?

कालीन भैया : हम्म।

गुड्डू-बबलू बहुत तेजी से ऊपर आए हैं।

हमको लगता है, मुन्ना बाबू खुद को कटा हुआ महसूस कर रहे हैं??

मूर्ख है मुन्ना बाबू जो खुद को कटा हुआ महसूस कर रहे हैं।

और आखिरकार, ये व्यापार तो उन्हीं के पास जाना है।

आईजी : ओम प्रकाश जी,

मसाला थोड़ा कम डलवाइए।

सरकार हिसाब माँगेगी एक-एक मिर्ची-मसाले का।

आपको याद था, सर।

अब, भई, तुमसे काम करवाना हो,

तो बिना आइसक्रीम के कैसे करवाएँगे?

[हँसता है]

अरे, स्ट्रॉबेरी है, सर।

वनीला से थोड़ा आगे बढ़िए।

-खाके देखिए। अच्छी है। -[हँसता है]

कैसी है?

भोकाल है, सर। [हँसता है]

[गला साफ़ करता है]

तो, ऐसा है, मौर्या साहब,

खून-खराबा हो रहा है मिर्ज़ापुर में।

और यूपी में चुनाव का समय है।

लखनऊ में अफ़रा-तफ़री मची हुई है।

तो ऊपर से ऑर्डर आए हैं कि आपको... मिर्ज़ापुर भेजा जाए।

[गहन धुन बजती है]

जी, सर।

[छींकता है]

अगर सर्दी ज़्यादा है, तो मत खाइए।

सर, हम लोग पुलिसवाले हैं। खाना-पीना तो लगा रहेगा।

[दोनों हँसते हैं]

तो, सही है।

जाइए और शहर साफ़ करिए।

ठीक है।

[नाटकीय धुन बजती है]

मिर्ज़ापुर में आपका स्वागत है।

मिर्ज़ापुर

[थीम म्यूज़िक बजता है]

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