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[लाउडस्पीकर पर आदमी] हाँ, तो भाइयो और बहनो,
-अब इंतजार का समय समाप्त हो गया है। -[मेले का संगीत सुनाई द
20 साल पहले
अब से कुछ ही देर में,
हमारे कलाकार आपके बीच यहाँ आएँगे।
[मेले का संगीत जारी है]
[लाउडस्पीकर पर आदमी] सियावर रामचंद्र की...
-सियावर रामचंद्र की... -लोग : जय!
-सियावर रामचंद्र की... -लोग : जय!
-सियावर रामचंद्र की... -लोग : जय!
हमको भी दो। हमको भी खाना है।
हम काहे दें? अपना खरीदो।
[लाउडस्पीकर पर आदमी] और आज हम देखेंगे सूर्पनखा की नाक कैस
अब तो सूर्पनखा भी आ गई। अखण्डा, बाऊजी कहाँ रह गए?
अरे, रतिशंकर, आते ही होंगे।
औरत : बड़ा घना वन है।
आदमी : जी, देवी।
औरत : यहाँ अवश्य फल मिलेगा।
मुन्ना, तुम्हारे लिए। मजा करो।
रतिशंकर : आइए, बाऊजी। बैठिए।
-बैठो-बैठो। -नमस्ते।
-अभी आई है। सूर्पनखा ही है। -अच्छा।
दिख गया फल।
ले आओ।
जो आज्ञा, देवी।
[ठहाका लगाता है]
[चिल्लाता है]
-[लोग चीखते-चिल्लाते हैं] -अजीत ठाकुर के लौंडे!
[चिल्लाता है]
[शरीर कटने की और चिल्लाने की आवाज़ें]
[बच्चा रोता है]
[हड़बड़ी में] तुम मुन्ना को लेके जाओ।
[गुस्से से चिल्लाता है]
[तीखी चिल्लाने की आवाज़]
[कराहता है]
[कराहता और हाँफता है]
[हाँफता है]
बहुत उछल रहे हो, त्रिपाठी।
लेकिन तुम ये भूल गए हो कि मिर्ज़ापुर का एक ही बाहुबली है।
वो है अजीत ठाकुर।
मिर्ज़ापुर के बाहुबली तो हम बनके ही रहेंगे।
बाऊजी, हम यहाँ परिवार के साथ हैं।
और अजीत ठाकुर हम पर हमला करवा रहा है?
[चीखते हुए] मादरचोद!
मिर्ज़ापुर अब ठाकुरों का नहीं, त्रिपाठियों का होगा।
[गहन धुन बजती है]
कितना समय और लगेगा?
दो घंटे और लगेंगे, ठाकुर साहब।
[गोली और चीख]
[गोलियाँ चलती हैं]
-[टायर घिसटते हैं] -[गोलियाँ चलती हैं]
-[गोलियाँ चलती हैं] -[सब कराहते हैं]
[चिल्लाते हुए] अखण्डा, रतिशंकर!
चलो!
उधार चढ़ा दिया हम पर अजीत ठाकुर।
परिवार था हमारे साथ। तब लड़के भेजे आपने।
हम तो बस हिसाब बराबर कर रहे हैं।
[गोली चलती है]
[अस्पष्ट बातचीत]
[मक्खियाँ भिनभिनाती हैं]
[खिलौना चलने की आवाज़]
[गहन धुन बजती है]
[ऊँची आवाज़ में] अजीत ठाकुर अब नहीं रहे!
ये रहा सबूत।
मिर्ज़ापुर अब हमारा है।
हम सत्यानन्द त्रिपाठी।
मिर्ज़ापुर के नए बाहुबली।
हमारे दो उत्तराधिकारी होंगे।
अखण्डानन्द त्रिपाठी,
और
मुन्ना त्रिपाठी!
और ये है
रतिशंकर शुक्ला!
हमारे परिवार के सदस्य जैसे,
हमारे वफ़ादार।
[खिलौना चलता है]
-[चिल्लाते हुए] सत्यानन्द त्रिपाठी! -[सभी नारे लगाते हैं] ज
-सत्यानन्द त्रिपाठी! -ज़िंदाबाद!
-सत्यानन्द त्रिपाठी! -ज़िंदाबाद!
-सत्यानन्द त्रिपाठी! -ज़िंदाबाद!
-सत्यानन्द त्रिपाठी! -ज़िंदाबाद!
मिर्ज़ापुर
[थीम म्यूज़िक बजता है]
[आदमी चीख रहा है]
इससे अच्छा तो आप गोली ही मार दिए होते।
लो।
[गोली चलती है]
तो फैसला पक्का कर लिए हो तुम, शरद?
यहाँ जौनपुर में आके व्यापार नहीं संभालोगे?
आपका सवाल नहीं बदलता है, हमारा जवाब नहीं बदलता है।
हमको आपका ये... ये व्यापार नहीं संभालना है।
एक बार बीटेक का फाइनल इयर हो जाए, तो एमटेक की कोशिश करेंग??
[हल्की धुन बजती है]
हमको मिर्ज़ापुर चाहिए, शरद।
कैसे भी।
जौनपुर है तो आपके पास। उसी को संभालिए।
मिर्ज़ापुर छोड़ दीजिए।
और, पापा, अब इस घाव को भूल जाइए।
[चिल्लाकर] कैसे भूल जाएँ?
अरे, इसी से तो याददाश्त तेज रहती है हमारी।
भेजे थे लड़का मुन्ना को निपटाने।
फेलियर हो गए भोस...
जबकि मुन्ना उस खानदान की सबसे कमजोर कड़ी है।
आप सिपाही के पीछे लगे हैं,
लेकिन शतरंज राजा को मारके जीती जाती है,
पर वो भी उसकी बिसात पे नहीं।
इंतजार कीजिए जब अखण्डानन्द मिर्ज़ापुर में नहीं, किसी न्
आसान होगा।
[हँसता है]
चलो, बे, गाड़ी चलाओ।
दो घंटे में शरद की फ्लाइट है।
नमस्ते, भैयाजी।
आ जाओ, राजराजेस्वर।
क्या, भैयाजी। राजा नाम है हमारा।
आप भी खींच लीजिए।
तुम्हारे पास है ही क्या जो खींच लें।
गाड़ी तैयार है?
जी, भैयाजी।
चलो।
[पिछवाड़े पर मारता है]
[चिल्लाते हुए] भैयाजी!
हम्म?
भाभी, क्या बनाना है?
[गहन धुन बजती है]
त्रिपाठी कार्पेट कंपनी
आदमी 1 : नमस्ते, भैया। आदमी 2 : नमस्ते, कालीन भैया।
नमस्ते, भैया।
नमस्ते, भैयाजी। लोहा उतार दिए हैं।
[मशीनें चलने की आवाज़]
[ऊँची आवाज़ में] भैयाजी, इतना सारा लोहा आता कहाँ से है?
[ऊँची आवाज़ में] ट्रक के स्टियरिंग व्हील के पाइप से बनते ??
सस्ता और टिकाऊ।
और यही पहले, एम्बेसडर कार और यामाहा मोटरसाइकिल के पाइप स?
क्वालिटी कंट्रोलर हो, उपाध्याय।
फटने नहीं चाहिए।
जी, भैयाजी।
ये सब, तैयार हो गया माल।
दिखाओ इनको।
भैयाजी,
[हिचकते हुए] वो जो घर पे दिए थे,
ये...
ये ज्यादा सेक्सी है।
हाँ, वो... वो हम बनाते नहीं हैं।
बाहर से मंगाते हैं, पार्टी के हिसाब से।
या फिर उनके लिए जो परिवार हैं।
भैयाजी।
हाँ।
और ये बुलेट कहाँ से आती हैं?
कई ज़रिए हैं।
जिसकी जितनी औकात, उसके उतने ज़रिए।
[गहन धुन बजती है]
[गोलियाँ चलने और खोल गिरने की आवाज़]
कितनी गोलियाँ चली, दीक्षित?
दीक्षित : पैंसठ, सर।
और खोखे कितने बरामद हुए?
दीक्षित : सर, 35।
गुप्ता : बाकी? दीक्षित : बाकी...
-[फुसफुसाते हुए] बह गए। -[दोनों हँसते हैं]
मकबूल : बुलेट का क्या है ना, प्रिंटर के कारट्रिज जैसी है।
ओरिजिनल भी खरीद सकते हैं, और पुरानी में भरवा भी सकते हैं।
प्रिंटर तो काम दोनों सूरतों में करेगा।
मकबूल : ये खाली खोखे लिए, इनमें बारूद भरा, और जाम कर दिए।
नया लगवाए हैं।
पिछले महीने दो नए लड़के रखे थे।
खाने के बाद, यहीं बीड़ी जला लिए,
उड़ गए।
ऊपर वाले के करम से, फ़ैक्टरी में कोई नुकसान नहीं हुआ।
कालीन भैया : मकबूल, निकलना है।
-[आदमी चिल्लाता है] जे.पी. यादव! -[लोग नारे लगाते हैं] जिंदाब
-जे.पी. यादव! -जिंदाबाद!
-जे.पी. यादव! -जिंदाबाद!
[नारे लगाना जारी है]
[चटखारे लेकर खाता है]
माननीय मुख्यमंत्री जी कैसे हैं, जे.पी. यादव जी?
हम्म, भैया ठीक हैं।
चुनाव सर पे हैं तो, उसी में व्यस्त हैं।
इस बार मिर्ज़ापुर में विरोधी पैसा बहा रहा है।
टक्कर देगा।
नहीं, नहीं, इस बार तो पूर्ण बहुमत है।
पूरा यूपी आपके साथ है।
यूपी का घंटा करेंगे, त्रिपाठी?
यूपी वाले हमारे होने चाहिए।
लोग कहते हैं राजनेता हरामी होते हैं।
हरामी तो साली जनता होती है।
जो पैसा फेंके, उसके साथ जाके सो जाती है।
[हँसते हुए] क्या समझे?
हाँ, समझ रहे हैं। [गला साफ़ करता है]
समझ रहे हो तो फंड्स किधर हैं, त्रिपाठी?
पूर्वांचल की गद्दी है ये मिर्ज़ापुर, जिस पर राज कर रहे हो
और ये तुम्हारी इसलिए है क्योंकि
सी.एम. भैया और हम तुम्हारे सर पे हाथ रखे हैं।
जिस दिन हाथ खींच लिए, सर नंगा हो जाएगा तुम्हारा।
[गंभीर धुन बजती है]
[गला साफ़ करता है]
जे.पी. यादव जी, व्यापार थोड़ा नरम चल रहा है।
कोशिश कर रहे हैं हम।
कोशिश?
हम करते हैं प्रबंध, आप चिंता मत करिए।
[हँसते हुए] हमें काहे चिंता होगी, त्रिपाठी?
बहुत व्यापारी हैं यूपी में।
लेकिन सी.एम. एक ही हैं।
और, हाँ, वो, रतिशंकर शुक्ला हमारे संपर्क में हैं।
वो कॉल किए थे।
ऐसे ही।
नहीं, तुमसे मतलब तो नहीं, पर सोचा बता दें।
-[घड़ी की टिकटिक] -[हँसता है]
अरे, आओ, आओ, आओ, सत्या।
ये पोस्टर देख लीजिए, यादव जी।
प्रचार के लिए छपवाए हैं।
कद क्या है तुम्हारा?
पांच फीट, आठ इंच।
पार्टी में क्या कद है तुम्हारा?
सी.एम. भैया के बराबर साइज का अपना फोटो डलवा दिए तुम?
[घबराहट में हँसते हुए] बदली करवा देंगे।
कितने हैं?
बीस हजार हैं, यादव जी।
सत्यप्रकाश जी, जब ये छोटा हो जाए ना, तो छपवाके बिल हमको भे?
हम्म?
यादव : चलिए।
प्रणाम।
कालीन भैया : प्रणाम, प्रणाम।
-[आदमी चिल्लाता है] जे.पी. यादव! -[लोग नारे लगाते है] जिंदाबा
-जे.पी. यादव! -जिंदाबाद!
-हमारा नेता कैसा हो? -जे.पी. यादव जैसा हो!
[नारे जारी हैं]
मकबूल, लाला से मीटिंग फ़िक्स करवाओ।
-[नारे जारी हैं] -[इंजन चालू होता है]
सुनो,
पोस्टर में हमारा भी फोटो डलवा दो।
भैया के बगल में।
सेम साइज़।
[रहस्यमय धुन बजती है]
[फूँक मारती है]
काली नेल पॉलिश? छी!
नेल पॉलिश ना हम अपने लिए लगा रहे हैं। हर चीज़ लड़कों के ल??
देख, कैसी चमचमा रही है।
अब चलेगी सॉलिड।
[होंठ चटकाते हुए] अरे, नहीं देखनी है।
और वैसे भी, इसको हाथ में लेके हम करेंगे क्या?
कभी हमें कहीं बचाने के लिए तुझे बंदूक चलाने की जरूरत पड़
सीख ले तू भी।
अच्छा बाबा, मत ले।
-एक बात पूछें, गोलू? -हम्म।
गुड्डू के साथ बात आगे बढ़ाएँ क्या?
अब हम ही मिले हैं ये लव अड्वाइज़ देने के लिए?
कभी बायफ़्रेंड तो बनाया नहीं है।
तो, काहे नहीं बनाई हो?
क्या करोगी सिर्फ़ किताबें पढ़के?
एक बार शादी हो गई तो ये सब मज़े थोड़े ही कर पाओगी।
दीदी, आप कर रही हैं ना, काफ़ी है।
जा रहे हैं हम।
गोलू : जल्दी आइए, पापा।
आपकी बारी है।
हाँ, हाँ। आ रहे हैं, आ रहे हैं।
आ गए, आ गए।
[हँसते हुए] बंदूक अच्छा चमकाई हो तुम।
आह!
हमारी बारी है।
ये... अरे!
और, कैसा चल रहा है तुम लोग का कॉलेज?
ठीक ही है।
कोई परेशानी हो तो मुन्ना भैया को बता देना।
उनसे तो कॉलेज में रोज मिलती होंगी तुम लोग।
मुन्ना ही तो परेशानी की जड़ हैं।
जहाँ-तहाँ दीदी का रस्ता रोकके खड़े हो जाते हैं।
मुन्ना भैया एक दिन मिर्ज़ापुर के राजा होंगे।
और उनके घर की जो भी बहु बनेगी ना, राज करेगी शहर पे।
हाँ, तो चमकने दीजिए किसी और की किस्मत।
हमें क्या?
और ये मुन्ना को मुन्ना भैया, मुन्ना भैया क्यों कहते हैं आ
वो एक नंबर के मजनू-छाप गुंडा हैं बस।
रधिया?
रधिया : जी?
मुन्ना भैया थकके आए हैं।
जा, जाके आराम दे उनको।
भाभी,
मुन्ना भैया ना, तोड़के रख देते हैं।
एकदम जानवर टाइप घंटों तक लेते हैं हमारी।
अच्छा?
आज छोड़ दीजिए, बहुत थक गए हैं।
जा।
जा।
[रधिया आहें भरती और हाँफती है]
[चिल्लाते हुए] मुन्ना भैया, मुन्ना भैया!
[रधिया कराहती और हाँफती है]
मुन्ना...
[और ज़ोर से आहें भरती है]
लाला : ना आपका मिर्ज़ापुर, ना हमारा नेपाल बॉर्डर।
न्यूट्रल जगह ठीक रहता है।
लाला,
रेशम की मात्रा थोड़ी ज़्यादा चाहिए हमको।
वो, मुन्ना नहीं आए?
आप की तरफ़ से तो हर दफ़े वही आया करते हैं।
हाँ, वो तबियत नासाज़ है थोड़ी उनकी।
चुनाव सर पे है,
पैसों का थोड़ा प्रेसर है इसलिए।
[हिचकते हुए] भई, त्रिपाठी जी, आप तो समझते हैं।
रेशम हीरे के जैसा है।
सप्लाई कन्ट्रोल करने से ही दाम कन्ट्रोल होता है।
[हामी भरता है]
अरे, भई, आपसे हमारे पुराने रिश्ते हैं।
कोशिश करके देख लेंगे।
लाओ, बेटा, बिल दो।
[हँसते हुए] ना, ना, ना।
ये हमारी बेटी के लिए है।
[आह भरता है]
अब हम इजाज़त चाहेंगे।
[गहन धुन बजती है]
सावधानी अच्छी चीज़ है, लाला।
[हँसता है]
तुम दारा को पहले से जानती थी ना?
हाँ, लेकिन हमारी अरेंज शादी है।
तू टॉपिक मत बदल, हाँ।
एक बार साफ़ कर देते हैं।
अगर तुम हमारी शादी में नहीं आई ना, तो देख लेना।
तो, शादी नहीं करोगी?
नहीं करेंगे हम शादी।
सलाम, अब्बू।
हाँ, सलाम।
हाँ, भई पूरा बाज़ार ही खरीद लाई हो।
अब्बू, ये हमारी सहेली है, डिंपी।
-नमस्ते। -नमस्ते।
मिर्ज़ापुर में रहती है। हमने इनसे गुज़ारिश की,
तो बस, बस पकड़के आ गए आज़मगढ़।
बहुत खूब। बेटी, ये तुम्हारा रोगन जोश।
शुक्रिया, अब्बू।
[रेडियो पर औरत] हम, आरजे सुरभि आ गए हैं दोपहर के खाने के बा??
आपकी सुस्ती भगाने। छमीली छमिया कार्यक्रम में।
दिल जवान, तन में तूफ़ान।
सुनिए ये गाना।
सभी : नमस्ते, कालीन भैया। नमस्ते। नमस्ते, कालीन भैया।
नमस्ते, भैया।
कालीन भैया, इज़्ज़त करते हैं लोग आपकी।
मकबूल : मिर्ज़ापुर में ही नहीं, पूरे पूर्वांचल में।
अरे, मकबूल, इज़्ज़त नहीं करते हैं, डरते हैं सब।
और डर की यही दिक्कत है
कि कभी भी खत्म हो सकता है।
चलो, लस्सी पिएँ।
[गहन धुन बजती है]
[रेडियो पर संगीत बजता है]
-अरे, भैयाजी, नमस्ते। -नमस्ते।
-का हो, त्रिभुवन? -हाँ, भैयाजी।
भैयाजी, बहुत दिनों बाद दर्शन दिए?
जब इधर से गुजरते हैं, तो जरूर आ जाते हैं आपके यहाँ।
लस्सी पिलाओ।
[रेडियो पर गाना बज रहा है]
[अशुभ धुन बजती है]
-मकबूल : [चिल्लाते हुए] भैयाजी। -[गोलियाँ चलने की आवाज़]
[तीखी चिल्लाने की आवाज़]
[आदमी चिल्लाता है]
मकबूल, भोसड़ी वालों को ज़िंदा पकड़ना है।
रुक।
-कालीन भैया : पकड़ मादरचोद को! -[आदमी कराह रहे हैं]
[बच्चा रो रहा है]
-[मारने की आवाज़ें] -[आदमी कराहता है]
[खाँसता है]
[कराहता है]
आदमी : हमें माफ़ कर दीजिए।
नाम?
[काँपती आवाज़ में] नाम बता दिया तो वो मार देंगे।
[दोनों रोते हैं]
रतिशंकर भैया भेजे हैं।
आदमी : पैसा और बंदूक दोनों दिए।
[काँपती आवाज़ में] वैसे तो साथ में आम तौर पर फोटो भी देते ह
लेकिन कालीन भैया को हम दोनों चेहरे से जानते थे तो...
मकबूल। हम चलते हैं।
मकबूल : जी, भैयाजी।
माफ़ कर दीजिए।
[हकलाते हुए] दो छोटे-छोटे बच्चे हैं हमारे।
दुआ देंगे तुम्हारे बच्चे हमको, अगर हम तुम्हें अभी उड़ा द?
वैसे भी, क्या देकर जाओगे उनको?
सबसे चूतिया कौम होती है बाप।
हमको गोली मत मारिएगा।
हम किसी के बाप नहीं हैं।
हमको...
नाम बता दिया ना?
आदमी : [रोते हुए] हाँ।
हम गोली नहीं मारेंगे।
[अशुभ धुन बजती है]
[गाड़ी आकर रुकती है]
[औरतें सिसक रही हैं]
कालीन भैया : लग रहा है रतिशंकर का दिमाग टनटना रहा है।
अभी तक गीदड़ की तरह छोटे-मोटे हमले करवा रहे थे।
पर अब मुन्ना पर, उसके बाद हमारे ऊपर।
हम कह तो रहे हैं कि जाके ठोक देते हैं रतिशंकर शुक्ला को।
चूतिया समझे हैं वो हम लोग को।
मुन्ना, तुम शांत रहो तो...
क्यों रहें शांत?
चुप रहो एकदम।
बेटा, अभी रतिशंकर तैयार होंगे कि हम कुछ करेंगे।
सही वक्त देखके हम सुलझा लेंगे।
अगली बैठक में बात उठाते है, बाऊजी, रति पर।
आसपास के जिले के सब बाहुबली भी रहेंगे...
और घंटा होगा आपकी बातचीत से कुछ।
कालीन भैया : फिर वही बात।
तुम साँस लो।
कसके खींचो और छोड़ो।
और हाँ, वो,
गुड्डू-बबलू को तुम अपना गन डिस्ट्रीब्यूसन सिस्टम समझा द
बाकी हम देख लेंगे।
ठीक है, बाऊजी। चलते हैं, बस राय लेने आए थे।
मिर्ज़ापुर की गद्दी पर तुम बैठे हो, अखण्डा, हम नहीं।
जो भी निर्णय लोगे, ठीक ही लोगे।
ठीक है।
हम भी चलते हैं।
ये काम अधूरा नहीं छोड़ना चाहिए था।
[बिजली गरजती है]
जखम बहुत गहरा है।
आराम से लेटे रहो।
औरत : लीजिए।
[बारिश की आवाज़]
नमस्ते, बाऊजी।
पानी मिलेगा?
[हाँफता है]
क्या हुआ, रतिशंकर?
घबराए हुए लग रहे हो।
वफ़ादार?
[चिल्लाते हुए] अरे, कुत्ता समझा है जो वफादार हैं?
[कराहता है]
[चिल्लाता है]
[गोलियाँ चलती हैं]
[आदमी चिल्लाता है]
[टूटने की आवाज़]
[चीखता है]
[चीखता है]
[जलने की आवाज़]
[तीखी चिल्लाने की आवाज़]
[आदमी चीखता है] नहीं!
[कराहता है]
[चिल्लाता है] अखण्डा!
[हाँफता है]
मारना नहीं।
मारना नहीं।
डॉक्टर : रीढ़ की हड्डी में गोली लगी है उनको।
शायद वो चल नहीं पाएँगे।
आईसीयू
मकबूल।
मकबूल : जी, बाऊजी?
तुम्हारी अम्मी की तबियत कैसी है?
अस्पताल में हैं, बाऊजी। ठीक हो जाएँगी।
मकबूल खान हमेशा आपका वफ़ादार रहेगा, बाऊजी।
किसी भी कीमत पर।
बाऊजी : अखण्डा।
[मॉनीटर की बीप]
रतिशंकर को... लेकर आओ।
[गहरी साँसें लेता है]
रति।
वफ़ादारी गाली नहीं,
गुण है।
जौनपुर देते हैं तुम्हें।
मिर्ज़ापुर की तरफ़
आँख उठाकर कभी मत देखना।
बाऊजी : अखण्डा,
इसको छोड़ आओ,
ज़िंदा।
भाई थे हम, रतिशंकर।
[हाँफते हुए] नहीं थे, अखण्डा।
[फुसफुसाते हुए] नहीं थे।
और ई बात तुम भी जानते हो, हम भी जानते हैं।
और सबसे ज़्यादा कोई जानता है ना, तो वो हैं बाऊजी।
बाऊजी का नाम मत लो तुम।
गोली मारे तुम बाऊजी को?
ऐसे तो ना जाने देंगे तुमको।
[कराहता है]
कालीन भैया : ये तुमको याद दिलाएगा कि तुम मिर्ज़ापुर से कु
कुत्ता। जो वफ़ादार नहीं था।
आ गए, भैयाजी।
मुन्ना आ गए?
उस्मान : अंदर हैं, भैयाजी?
ये हैं हम, त्रिपाठी परिवार।
हम लोग बंदूक बनाते भी हैं, और उसे कंट्रोल भी करते हैं।
ये हैं कबूतर।
जो हमसे गन लेते हैं, और फिर उसे आगे बेचते हैं।
और सबसे जरूरी चीज,
ग्राहक।
जो आगे कबूतर से बंदूक खरीदता है।
और ये सारे नेटवर्क को हेड कौन करता है?
मुन्ना त्रिपाठी।
भैयाजी, अगर...
अगर कट्टे से किसी को ठोक दिए, तो कट्टा ट्रेस नहीं होता क्??
और मान लीजिए, कल को अगर पकड़े गए तो?
उस्मान : देसी कट्टे का कोई नंबर नहीं होता।
डेढ़-दो हजार की चीज है।
उस्मान : ठोका, नारियल फेंका...
और वैसे भी, कट्टा सिर्फ़ ठोकने के लिए थोड़े ना इस्तेमाल ह
डराने के लिए भी तो इस्तेमाल होता है।
जैसे चुनाव में।
या फिर मजे-मजे में ऐसा हवाई-फायर करने में।
जैसे आप किए थे उस दिन वो सादी में?
[गहन धुन बजती है]
[गला साफ़ करते हुए] ये कट्टों का व्यापार बढ़ाने के लिए जॉ??
बढ़ाओ इसे।
बुद्धि से, चाहे बल से।
खुली छूट दे रहे हैं।
हो पाएगा?
हो पाएगा।
काहे नहीं हो पाएगा? जरूर होगा।
जी।
[जोड़े की आहें भरने और हाँफने की आवाज़ें]
इस बार बहुत मेहनत किए।
हुआ तुम्हारा?
हुआ ना। सुने नहीं आप?
सच बोल रही हो?
अरे, झूठ काहे बोलेंगे?
बहुत अच्छा किया आप, हम्म?
आइए, मुन्ना भैया।
आज हमारे कमरे में?
आइए।
[गहरी साँस लेता है]
[रहस्यमय धुन बजती है]
पापा को लगता है हम चूतिया हैं।
व्यापार नहीं संभाल सकते।
अरे, बिलकुल चूतिया नहीं हैं आप।
हमें तो एकदम यकीन है कि आप व्यापार संभाल सकते हैं,
और अच्छे से संभाल सकते हैं।
बूढ़े हो रहे हैं आपके पापा।
हम तजुर्बे से कह रहे हैं।
देर-सवेर सत्ता आप ही को मिलेगी।
आप बस तैयार रहिए, मुन्ना भैया।
जब वक्त आवे।
आप हमें मुन्ना भैया काहे कहती हैं?
मुन्ना कहिए।
आपका हमारा रिश्ता भी तो कुछ...
ठीक है, मुन्ना कह देते हैं।
मुन्ना।
लेकिन आप रिश्ते के चक्कर में हमें माँ मत कह दीजिएगा।
कैसा महक रहा है?
गुलाब का इत्र है।
यहाँ भी लगाया है।
त्रिपाठी कार्पेट कंपनी
-आदमी : भैयाजी? -हम्म?
कालीन के आठ ट्रक निकलवा दिए हैं।
ठीक है। बहुत बढ़िया।
आदमी : [हिचकिचाते हुए] भैयाजी? एक और चीज थी।
हाँ?
आदमी : हमारे यहाँ लड़की हुई है, भैयाजी।
आपका आशीर्वाद लेने आए हैं।
रखो।
क्या नाम रखी है?
भैयाजी, बहुरानी के नाम पे रखे हैं।
बीना।
ठीक है।
[बीना आहें भरती है]
[हाँफते हुए] और जोर से।
इतना देर तो कभी नहीं कर पाते कालीन भैया।
[और ज़ोर से आहें भरती है]
मिर्ज़ापुर
[जोशीली धुन बजती है]
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