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करते हैं
वाह, सुभान अल्लाह, शायरी और तरणुम का ये शायलाब किधर से आया
विज्जल मिया?
पड़ाओसे, ये आवाज मशूर शायर और तवायफ उम्राओ जान अदा की है सरकार.
जरा देखिये तो, तरद भरे अलफास किस खूबसूरती से निभाए हैं?
इसको आप से बहतर क
हम बहुत दिलों से उनके बारे में सुनते आये हैं, आज मिलना चाहते हैं। अब
इजाज़त दीजिये मिर्चल मिया, हो सकता है हम पर भी उनकी जिन्दगी के
कुछ गोशे रोशन हो जाएं। आमीन।
आदाब, मुझे मिर्जा हादी रुस्वा कहते
हैं, मैं उम्राव जान अ
जी आप इंतजार फर्माईए हम पूछके आते हैं जी बेहतर नमाजश बाई साहब कोई मिर्जर
रुसवा आपसे मिलना चाहते हैं वो मशूर शायर बुला लो नहीं है जी
आईए हुजूर नमाजश
आदाब
तश्रीफ रखे रुस्वा साहब। शुक्रिया।
नवाजिश
करम। मौफ़ कीजेगा, हम आपके
आराम वे खलल हरकिस न डालते, मगर हमें आपकी आवाज ने मजबूर कर दिया।
आपकी जर्रा नवाजी है, वरना हम क्या, हमारी आवाज क्या।
ऐसा ना फर्माएं गजल, तगजुल, संगीत ये
सारी चीजें उम्राव जान अदा के नाम से मन्सूब हैं उन्हीं से जुड़ी हुए हैं मगर
हाँ आज ये क्या हुआ जिन्दगी के साज में दर्द का ये तार कहां से जुड़ के आप
तो जानते हैं मिर्जा रुस्वा साह�
कुछ हमें भी तो सुनाए लुद्ध है कौन सी कहानी में आप बीती कहें
या जग बीती मोहतरमा मैं मैसूस
करता हूँ कि आप ले जिन्दगी को करीब और बहुत करीब से देखा है और आप बीती से बेहतर
कोई कहानी कोई दूसरी कहानी नहीं हो सकती है अब
आप से क्या कहें
आपने तो हमारा नाम ही चुरा लिया। जी, क्या फर्माया आपने?
सारे जमाने में बदनाम हम हैं, और रुस्वा आप हो गए।
बही बहुत खोब, मगर ये बात भी उम्राओ जान अदाही कह
सकती थी। छोड़िये, कौन उम्राओ, किसकी जान,
और कैसी अदाह?
हम तो फैजाबाद की मिट्टी में पहले अमीरन थे और आज भी अमीरन है।
अमीरन? जी हाँ, अमीरन।
चलिए, आज उसी मासूम की दास्ता सुनाती
हूँ।
आपा
क्या ढून रही हो?
हमारा अंगुटी गुम गई है। अम्मा हमें मार डालेगी।
ए
छोड़ी। ये क्या करें? कुछ नहीं। बस ऐसे ही। किसकी छोड़ी है तू? अपने अब्बू की। और
किसकी? वो तो ठीक है। पर तेरे अब्बू है कौन? हमारा अब्बू बस आवत है। ठीक है। अब्�
दिलावर खान, सलाम अलेकुम, तुम आ गए?
तुम तो गवाही देकर हमें साथ साल के लिए भिजवाई दिये थे, वो तो हमें ही थोड़ा
जल्दी आ गए.
देखो दिलावर, हम सच न भी बोलते, लेकिन जब हाथ कुरान शरीफ पर रखवा दिया,
तो हमें सच बोलना ही
प�
घर चलो
साला
हरामी सलाम तो ऐसे करे था जैसे हम जेल से नहीं
हज करके आय रहे यह
छोरी तो मन्ने इसकी जान का टुकड़ा ला गया है
इले बिटिया तौहार पताशे अब्बू आप कितने अच्छे है आप रोज हमारे लिए पताशे लाते है
इले देख बिटवा जमाल तौहार बहन तौह से कितना प्यार करे है
पहले तौहार मुँमे डाले है फिर खावे है बिटिया अल्ला तुझे हमेशा खुश रखे
आ ग�
अस्सलामोलेकुम। वालेकुमसलाम। बड़ी महर्बानी हो गई। याद नहीं। पांडे जी की
बिट्या की शादी में जाय का है। इतनी देर से आए हैं। और हालत तो देखो क्या बना रखी
है। चलो, हाथ मुदव कर तैयार हो जाओ। लुकसत का वक्त हो गया है।
नजा
तो अपने आंचल की छाया से इन सब को धूप से बचाये हैं। और पेड़ भी तो वही करे हैं।
खुद धूप में जले हैं और हम सबका साया देवे हैं। और अमार अब्बू भी तो वही करें।
खुद कमावे और हमका फिलावे। आए, आए, बड़ी से राणी हो गई
तु
ला हाथ.
चल, हाथ धो दू.
ला, दूसरा हाथ ला.
अरे, अंगुठी कहा है?
कहा गई अंगुठी, अमीरन?
अरे, कहा गई तेरी अंगुठी?
खो गई.
खो गई?
जानती है, कितनी मेहनत करके तेरे अबू ने दिलाई थी तुझे?
खो गई.
अब रो क्यों रही है? क्या पहली
तो इसलिए रो रहे हैं कि अब्बू ने इतनी मेहनत से हमें वो अंगूटी दिलवाई थी।
अल्लाह। चल, रो मत, आजा, आजा बिट्टिया।
अब्बू दूसरी दिलवा देंगे। अब रो मत।
जो अब किये हो
जाता, ऐसा न कियो।
जो अब गिये हो दादा ऐसा न की जो
अगले जनन मोरे बिटिया न की जो
अब गिये हो दादा ऐसा न की जो
अब गिये हो दादा ऐसा न की
अब ही ये हो दाता ऐसा नती जो
अबू शादे विहाँ तो खुशी का मौका होता है ना इल्कुल बिटा इल्कुल
अबू तो फिर पांडी जी के घर वाले सब रोवे क्यों थे पेटी
की विदाई के समय रोना तो आवई है बिटा अबू बताओ हमार विदाई होगी तो आप �
अम्मा तो रो रो के बावरी हो जाएगी। मैं तो फिर शादी नहीं करूँगी। ना बिट्टिया,
शादी तो करे का पड़ी। हमने कह दिया ना हम शादी नहीं करेंगे। हम आपी के पास रहेंगे,
कहीं नहीं जाएंगे। आज भमुताबाद से मीर साब आय रहें। अच्
सुई गई। शादी तो कर दें, पर खर्चा बहुत है।
कहां से आवेगा?
उन लोग नजाने कहां समझ बैठे हैं। हमार इतना बड़ा घर देख, कोई भी धोखा खा जावे
है। उनका जाने हमका इरासत में मिला रहे हैं। कुछ भी हो,
शादी तो करनी है।
आज तक कौनों बिटिया को घर में बिठाए रखे हैं?
अमीरन को विदा तो करे का पड़ी.
रही सा, रही सा, देखो चिराग की लोग बुझा चाती
है, इसमें और तेल डालो या कुछ भी करो, पर इसे मरने लगो. जी बेहतर.
ऐसे ही मेरी तक्तिय का चिराग भी बुच गया था जिस दिन मैं एक सक्मी परिंदे को
बचाने के लिए उस कमबक्त तिलावर के साथ उसके यहां चली गई थी
बहाना कोई बुआ थी
ना मौसी बस खाली कमरा था
मेरा मूँ बंद कर गई
हाथ पाउं बांद के, बोरी में बंद करके, बैल काड़ी में डाल दिया।
काड़ी बस जल्दी, अन्जान रहो
गए। अरे
जरा देख के चला करो जमादार। अभाई कोई
हाथसा हो गया होता तो लोग यही कहते ना कि दिलावर ने बदला ले लिया। अरे नहीं दिलावर
भाई, कोई दुश्मनी थोड़े है। बस ये बताशे गिर गए। अब हम अमीरन बिठिया से क्या
कहेंगे। अमीरन बिठिया, चला बेरबक्स। और
उस दिन
मैंने आखरी बार अपनी अब्बू को देखा।
साला या तो बहुत भोला है या बड़ा हुसियार है। कहें है दुस्मनी थोड़े ही है। पता
चलेगा हरामी को। के करे का इरादा है। काट कर फेक दूँगा ससुरी को।
अरे ना रे ऐसा ना करना। मौत के परे भी एक मौत है। वो कान से। अरे
लखनाओं लगी चलाते है
तू तो बड़ा होसियार है।
आपके
मिठु के लिए सोने का पंजरा? और क्यों नहीं?
आप... आप हुकुम फर्माय खानम साहब तो पाव भर मोती भी मंगवाले वो क्यों अरे भाई
रहने को सोने का पेंजरा और खाने के लिए मोती जलती क्यों हमारे मिठु से हम तुम
सब को भी तो सोने का नेवाला खिलाते हैं बेशक खानम साहब बेशक
ये लो जी शुक्रिया
आदा�
आनम साहब, एक और छोटा सा मुझे इंतजार कर रहा है निवाले के लिए। आप कहिए तो हाजर
करूँ। बुलाओ। तीरबाक्ष, आये। आदा बर्जी,
आदाव। यहाँ बिट्या, घबराओ नहीं। आओ हमारे पास बैठो।
जाओ। आओ बिट्या, दर्वों मत आओ�
कहां की रहने वाली हो?
बंगला हाई हाई ये बंगला कहा हुआ? हाई गमार इतना भी नहीं जानती फैजाबाद को कहते हैं
बंगला तो तुम फैजाबाद से आई हो? जी मैं आई नहीं हूँ ये लोग जबरें ले आए
हाई हाई हुदा जाने किसकी लड़की है
क्या हाल
होगा
खुदा जूत न बुलवाए, हम तो बेखुसूर हैं, यहाँ न बिक्ती, कहीं और बिक्ती, खानम
साहब, यहाँ फिर भी सही रहेगी, आपने सुना नहीं, और कोठों पे लौंडियों की क्या गथ
बनती है, तौबा, तौबा, बोलो, अकुम, दूई सो दे
दो, ऐहाई,
दू
जवान हो जाये, तो कमाके भी देये। जड़ा उसकी सकल सुरत भी देखे ना बाई साहब। जबान
बहुत चलती है तुम्हारी। है तो आदमी का बच्चा। 120 मिलेंगे।
हुसैनी। मनजूर है?
अरे नहीं मनजूर तो लौंडिया को ले जाओ, ले जाओ। नहीं, मनजूर ह
आज से अमीरन हमारी हुई। खानम साहब, अमीरन को हमें दे दे।
हम इसे पालेंगे। बच्ची आपकी खिदमा था हमारी। अच्छी बात है। लेकिन हम
इसे अमीरन नहीं, उम्राव कहके पुकारेंगे। वा, कितना शानदार नाम है। आज
से तुम्हारा नाम पढ़ गया
वाह, चलो, आज, चलो बिट्या,
अमीरन
बिट्या, अमीरन, बिट्या, तुम्हारे लिए बता से, अमीरन,
अबू, अबू, अबू, अहे, अबू, अहे,
क्या हुआ बिट्या,
लगता है कोई बुरा खाब देखा जो उठकी बैठ गई खाब तो अच्छा था अब्बू को खाब में देखा
था हाँ आजा बुज़ चल सोचा
चल सोचा बुरा शाबाज
उम्राओ, कहा बाग रहे थी? नहीं आप माना नहीं, मैं माना नहीं. नहीं, यहाँ आओ हमारे
पास, आजा उत्या हमारे पास आओ, यहाँ, हम तुम्हें बिल्कुल नहीं मारेंगे, हम तो
तुम्हारी अम्मी जैसे हैं.
कहा जाना चाह रहे थी?
घर.
तुम्हारा घर तो बहु
इसलिए कहीं जाने के कोशिश मत परना। जब तक हम हैं,
हम तुम्हें तुम्हारी अम्मी, अब्बू, किसी की कमी महसूस नहीं होने देंगे। यही रोग,
अभी आती है तुम्हारी बुआ। यह देखो, क्या लाई है
तुम्हारी बुआ तुम्हारे लिए। यह देखो,
यह
शाबाश ये लो
और ये
अब तो कहीं नहीं जाओगी नहीं शाबाश
और आप पोशाक की रंगीनी
और रेशम के तारों में उलज़ गई
शौक फर्माईये। जी, शुक्रिया, हमाजिश।
और उलजदी ही चले गई।
जरा सोचिये, एक बच्ची, जिसने अतलस और कमखान का नाम भी न
सुना हो,
उसे ये सब पहने को मिला। जिसने बताशी से बहतर कभी कुछ न खाया हो,
उसे जर्दा और मुतंजन खाने को मिलने
साथ खेलने को दोस्त मिले, बिस्मिल्ला, खुर्शीद,
कोहर। उनसे मिलने के बाद, उन्ही की तरह
बनने की खुआईश भी मन में जागी। मौल्वी सहाब और बुआ हुसैनी ने अब्बू और अम्मी की
कमी महसूस नहीं होने दे। आई आई, तौबा तौबा, बिट्या �
क्या होता है बुआ?
तौबा तौबा लेटा, जब घर में किसी का इंतकाल हो जाता है तो उसकी खाट को उल्टा खड़ा
करते हैं सर नीचे और पाँ उपर, चलो इसको सीधा करते हैं चलो चलो, अटो अटो
ऐसे, दिखा? चलो आज तुम्हें हम अपने रस्म
और रिवाज के �
अधब और सलीका भी आ गया। बुआ हुसैनी ने बात करवाना
सिखाया। तो मॉल्वी साहब ने शेरो शायरी से तारुफ कराया।
भाँ साहब ने सुरतार से पहचान करायी। और गुरुजी ने
धिरकना सिखाया। पाव में पासेब की जग़ा घुंगुरू आ गया।
देखते ही देखते बच्पन कहीं बीची छूट गया और जवानी ने दर्वासे पर
दस्तक दी
गोहर मिर्जा ये क्या मज़ाक है चेहरा नजर नहीं आता अच्छा है ना चेहरा नजर ना आये तो
अच्छा है तो इतना हसीन चेहरा हो तो अपनी नजर लग जाती है रहने दो हम
कहां के हसीन है हसीन तो है बिस्मिल्ला खुरशीद अमीर
जिनके चाहने वाले उनके नाज उ�
खादीम आये, और कभी भूले भटके हम उनके आप पहुंच जाये। उम्राओ, अच्छा हुआ तुम आ गई,
वो मेरी जरा पान की तश्टरी लेके आना। तो किसी ना किसी बहाने से भगा देती है हमें।
जानती हो क्यों, दरती है वो तुमसे, कहीं तुम उनके चाहने
वाल
सब खुद ही करना पड़ता है। इजाज़त हो, तो तुम्हारे बाल मैं सवार दूँ।
यह
क्या हरकत है?
ऐसे क्यों छुआ तुमने?
तो क्या हुआ?
पहली बार छु रहा हूँ तुम्हें ऐसे। बच्चपन की बात और थी। और बच्चपन बहुत पीछे रह गया
है, गोहर
बखवास मत कर, मैं तेरी रग-रग से वाकिफ हूँ। जब देखो तब लड़कियों की इर्द-गिर्द
मन रहता रहता है। वो तेरा मुआबाब भी ऐसी था, कहने को नवाब था, पर एक दोमनी टेकवाब
भी सही नहीं छोड़ी। देखो बुआ, अब्बा के खिलाफ कु�
तुम भी कहां उस उबाश के जाल में उलच गई। क्या करती?
इन रूखी उलचे बालों से तंग आ गई थी। आपको भी तो हमारे लिए वक्त नहीं है। सच पूछो तो
किसी को भी नहीं है। हानम साहब को भी नहीं। दिल छोटा नहीं करते बिट्टिया।
वक्त पदलती �
तती तती तती तती तती
क्या बात है बिटिया?
तुम्हारी आँखों में नमी?
यह अच्छा नहीं लगता भाई। यह कुछ नहीं, बस यूँ ही।
बच्पन का सुना गीत यात आ गया। अगली जनम हो है, बिट्या
ना कीजो। अब बच्पन गया,
उसके साथ भाषा भी छूट गयी, अब तो खड़ी बोली में कहना सुनना
होगा। बिट्या। कोई नया शेर कहा होगा तुमने।
वो सुनाओ। सुनाओ। मुलाजा फर्माइये।
पढ़ो। आखे तेरी चाहे जिसे
दिवाना बना दे। आखे तेरी चाहे जिसे दिवाना बना दे। पत्थर भी भी गिर जाये
तो वैमाना बना दे। वाह!
पत्थर... अथर पे भी गिर जाएं तो पैमाना बना दें। बहुत खूब। और बेटे
आखे की जगह नजरें कर दो। आखे नहीं गिरती हैं। नजरें गिरती
हैं। तौबा। ये बात तो उस दादी कह सकते थे न। शुक्रिया।
अरे ऐसे शुक्रिया अदा नहीं होगा। अब हमन
एक मिस्रा हुआ है हमने छोड़ा था जमाना
चिने पाने के लिए अब दूसरा मिस्रा नहीं हो रहा
अब तुम सुझाओ पानी के लिए
जाने के लिए जमाने के लिए
हमने छोड़ा था जमाना जिन्हें पाने के लिए। लो वही छोड़ चले हमको जमाने के
लिए। वाह,
सुभान अल्लाह, क्या दिमाग पाया है तुमने। आज तो
तुम्हें सचमुच इनाम देने को जी चाहता है। बोलो, क्या चाहिए तुम्हें।
मांगलू, आप देंगे
तो एक दोना भर बताशे ला दीजिये ना। बताशे?
मेरे अब्बू हर शाम लाया करते थे मेरे लिए।
किस सोच में बढ़के मौल्वी साहब?
तुमने तो हमें सिंदगी भर के लिए बांध लिया।
अगर सिंदगी ने वफा की,
तो हमारी शफकत हमेशा तुम्हारे साथ रहेगी।
मगर आप बताशे नहीं लाएंगे। अरे,
लाएंगे, वो भी लाएंगे।
बट्टिया, इसे रख
लो। यह अंगूठी हमेशा तुम्हारी इफाज़त करेगी।
आदाव, आदाव, आदाव, आदाव, कश्रीफ रखें, जी, शुक्रें,
बिस्मिल्ला,
जी, जर देखें क्या सीखा है, आओ,
खानुम साहब, उम्राओ। पुरशीद. जी.
बास, सुभानल्ला, जीते रहो, जीते रहो, हमारे कोठे की रोनक हो तुम दोनों,
क्या बात है?
खानम सहब, कोई खातून आपके लिए पैगाम लेकर आई हैं। बुलाब। जी। आईए, तस्रीफ
लाईए। आदाब।
फर्माईए। हुजूर, नवाब शुजा अत अलिखान सहब के यहाँ से पैगाम और पेशकी लेकर हाजर हुए
हैं। हुजूर के यहाँ शादी की
त हुजूर
चाहते हैं कि ये मुझ्रा आपकी कोठे से ही हो। बेहतर। हुजूरू ने ये भी फर्माया है कि
आपकी बेहतरीन तवायफ मुझ्रा करें। कीमत मुझ मांगी दी जाएगी।
नवाब साहब से कहिए हम मम्नून हैं और जरूर हाजर हो जाएगे।
आदाब।
जाहिर
खुरशीद और बिस्मिल्ला दोनों ही तैयार हैं। आप जिसे चुनेंगी, वहीं इंतिहान में खरी
उत्रेंगी। हम चाहते हैं कि युमुझ्रा...
उम्राओ
करें। जी...
मैं?
जी तेरा।
यही सही मौका है।
पहला मुझ्रा, पहली बार,
इतनी बड़ी मेफ़े, पुरा लखनाओं वहाँ होगा। तो अच्छा ही है ना, एक ही
रात में तमाम लखनाओं को अपने फन का जल्वा दिखा दोगे। हीरा अपनी चमक से वाखिफ
नहीं होता, सिर्फ जोहरी को उसकी पह�
और अब वक्त आ गया है मोती को सीफ से बाहर निकालने
का। जाओ, तैयारी
करो। जी खानू साहब।
दुबारक हूँ मेरे बच्चे।
उसता की माफ़। मगर आपने अच्छा नहीं किये।
उम्राव का इंतिफाब करके आपने हम सबको नीचा दिखा है। खानम जो भी करती
है, सोच समझ के करती है। आप मुझे भी तो चुल सकती थी। मैं तो आपकी अपनी अलाद
हूँ। एक बात अच्छी तरह जान लो
बिस हम मम्ता
से महरूम नहीं हैं, लेकिन जो भी करते हैं वो इसलिए कि तुम आसाईश की जिंदगी गुजार
सको। उम्राओ का नाम होगा, तो कोठे को शोहरत मिलेगी, और शोहरती दौलत का
सरचश्मा है।
उपरवाले ने जब सीने में दिल रखा तो उसमें महपत भी अता की
भरबूर महपत और वो
पूरी की पूरी किसी एक शक्स पर लुटाने के लिए वाह, सुभान अल्लाह
जिस रात मेरा पहला मुझ्रा लखनो के किसी रहीस की यहाँ था
वो शक्स मुझे मिल गया
आप इसे
ढूंढ
रहे हैं?
जी.
वाह वाह वाह
जिसे भी हम देख ले पलट कर जिसे
बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत अच्छा कर रही हो। हमारी उम्राव तो पहले ही नजर के
कादिल थी। इस मुझरे के बाद तो सचमुझ बेमिसाल हो गई होगी। ना जाने कैसी कैसी
नजरें लगी होंगी इस पर। हरके रहीस और नवाबीन एक दूसरे पर गिरे पढ़ रहे हैं।
हमारी उम्राव के साथ �
आज से तुम शीश महल में मुन्तकेल करती जाओगी, जहां तुम्हारे एश और असाईश की सब
इंतिजाम होगी। मैं वहाँ अकेली है। बेशत।
मैं कहीं नहीं
जाओगी।
यही रहूँगी आपके पास बच्चपन से आपकी आगोश में पली हूँ दूर कैसे जाओंगी दूर
कहाँ हम लोग आसपास ही तो है और फिर बिट्टिया हमारा एक गोशा
अब तुम्हारी शान के शाया नहीं आप तो ऐसी बाते ना करें
मैं हमेशा आपकी अमेरन रहूँ�
बच्चबन बहुत पीछे छूट गया। अब अपने आपके साथ जीना सीखो।
जाओ बिट्या। शीश महल तुम्हारा इंतजार कर रहा है।
एक पूरी दुनिया तुम्हारा इंतजार कर रही है। रुको।
ये लो। ये आइना साथ लेती जाना।
अब चोरी-चोरी अपने
बुआ, खुश रहे हैं। हाँ, किस मूँ से तारीफ करो उम्राव।
कल रात का मुझ्रा, बस यूँ समझ लो। पहली बार, खुद रागिनी
को गाते सुना, और बिजली को नाशते हुए देखा। इतना भी मत छड़ाओ,
कि गिरूं, तो चक्ना चूर हो जाओ। मेरा खुदा जानता है, तुम इससे भी ज्यादा तारीफ के
काबिल हो। सच पूछो उम्रा, तो बरसों में इतनी खुश नहीं हुई मैं। ये बात तो सच
है, मैंने हमेशा तुम्हें उदास ही देखा है। महबबत की मार ऐसी ही होती है,
मगर महबबत तो खुशी ही
खुशी
खुदा ना करे, तुम पर कभी ऐसा वक्त आये। मगर महब्बत करोगी न,
तो जानोंगी। उम्राओ, खादम साहब तश्रीफ ला रही है।
जुग जुग जियो उम्राओ। तुम्हारे सलाम ने वो कमाल
किया, कि नवाब सुल्तान की रूप की गहराई तक पहुँच गया।
उनका दिल जरूर पहला देना।
चलो
उम्राव, तुम्हें भी तुम्हारा नवाब मिल गया। पर ये नवाब सुल्तान हैं कौन? होंगे
कोई बुढ़े खुसट, एक पाउं कबर में लटका है, उम्राव की महबत का खाब सजाए, जान दे
देंगे। जाने जन्नत पहुँचके भी उम्राव जैसी हूर मिले ना मिले।
जान दे देंगे हुस्न के दर पर, मौत का इंतजार कौन करें।
उम्राव,
नवाब सुल्तान तर्शीफ ला रहे हैं। कैसे हैं वो?
ऐसे हैं। नहीं जो।
आइए, हजूर।
किसी
के दिल का पयाम ले लो,
निगाह भेरो,
सलाम ले लो। आप,
आप हैं?
जी, क्यों आपको...
हेरान के हो रही है?
जी, दर असल यहां सबका यही ख्याल था कि नवाब सुल्तान कोई बड़ी
बुजर्ग होगी.
किलोरी लूजी?
जी नहीं, शुक्रिया.
मै का शौक फर्माएंगे?
जी नहीं.
तो किस चीज़ का शौक है आपको?
हमें तलाश है शौखी और अदाकी और वो दोनों चीजें आपको
देखकर ही मिल गई
बातें
बड़ी खुबसुरत करते हैं आये यहां बैठिये
क्या सोच रहे हैं?
हजारों सालों में करोडों ने आस्मान में चांत को देखा है पर
शायद मैं पहला इंसान हूँ जिसने चांतनी को अपनी बाहों में ले लिया है
गुस्ता की माफ। नवाब साहा, आये आपकी महफिल तयार है।
इतनी भी क्या जल्दी है।
तश्रीफ
रखे नवाब साहा।
हम जो पासा गए हम जो शर्मा गए
राजे दिल पा गए तुम भी
पहले पहल हम भी पहले पहल
जब निगाही मिली दिल भी कलिया खिली
लिखा ये खाब तो दिल है बेचा
जिसका दिल न...
ये लीजिये
ये तो अच्छी
ख़बर सुनाई लेकिन इस बात का ख्याल रहे कि नवाब सुल्तान उम्राओ की गिरफ में इस तरह आ
जाए कि वो उनकी कमसोरी बच जाए उम्राओ के पहलों से वो कि कहीं जा ही न सके इस
तरह के रही साते रोज रोज हाथ नहीं आते जी
खालम
शीद मुबारक हो शीरी नी नोश वर्माईए मुबारक हो बिस्मिल्लाह शीरी नी नोश वर्माईए
हमारी उम्राओं उम्राओं जान हो गई है मुबारक हो बुआ बहुत-बहुत मुबारक हो
आई हाई क्या बात है गौहर मिर्जा नवाबी खून जोर मारा है
चल छोड़ इस
उसकी कड़वाहट का मज़ा तो लेने दो। चल ने गोड़े, कड़वाहट ही रहने दे।
सुना
है नवाब सुल्तान आज शाम फेर आ रहे हैं। बिल्कुल सही सुना है। इसलिए तो हमारी
उम्राव जान को समझ में नहीं आ रहा है कि वो क्या पहने। ओफो, लगता है उम्
हमें भी कुछ ऐसा ही लग रहा है। खूब। लेकिन खानम साहब चाहती है,
कि जादू उनका नहीं, आपका चलना चाहिए, ताकि आप उनकी कमजोरी बन जाए।
और अगर वो हमारी कमजोरी बन गए तो?
तो कमबख दिल को समझा लेना, परना वही खता करोगी, जो कभी मैंन
महापत घता है तो घता ही से
आप कब आए?
हम गई कब थे?
अच्छा जी, जड़ा देखें हमारे
पहलों में आई है
क्या
देख रही है आप?
हमारी तक्दीर?
जी नहीं
अंगोठी, देखना चाहती थी कि आपने पहन रखी है या नहीं। खुदारा इसे हमेशा अपने उंगली
में रखेगा, और कहीं गुम कर दी, तो बहुत मार पड़ीगी। कौन मारेगा हमें?
हम, और कौन?
अच्छा जी, बात यहां तक पहुँच गई।
उससे भी आगे?
जब हम छोटे थे ना, तब एक छल्ला कुंग कर दिया था। माँ ने इतनी
जोर से तमाचा लगाया, कि दिन में तारे नजर आ गए। दर्द तो बहुत हुआ होगा।
दर्द इतना नहीं हुआ, रोना बहुत
आया। अच्छा बता ये, कल रात नींद
ची आई।
आपके ख्याल ने अमें जगाय रखा। और आप?
हम तो रात भर अपने मसीहा के बारे में सोचते रहें। बादा कीजिए,
जब तक सिंदिगी रहें, आप रोज हमसे मिलने आएंगे।
बादा तो कर ले पर निभाना मुश्किल होगा। क्यों?
क्योंकि अब भावजोर ने हमारी शादी सबा से तै कर दी है। सबा?
कौन है ये सबा?
हमारे खाला की बेटी। आपने हमारे होते हुए किसी
और के बारे में सोचा, ये हमारे लिए मौत के पेगाम से कम नहीं है।
चले जाये यहां से, खुदा के वास्ते आप हमें
तनहा छोड
वो बदनसीब प्यार की निशानी, वो अंगूठी लोटा दीजिए।
पहले आप हमारी अंगूठी लोटाईए। कभी नहीं।
क्यूं?
क्यूंकि हमने महपत की हैं, और सिंदी की बहर इस अंगूठी को अपने पास रखेगी।
अंगूठी लोटाईए, और जाईए।
बस सु
बस हम किसी से शादी करने नहीं जा रहे हैं बस यही देखना चाहते थे कि आपकी दिल में
हमारे लिए कितनी मौपब है यानि कि आपको हमारी ववा पर शक था
नहीं हुजूर नहीं
और अगर था तो अब बिल्कुल नहीं है
हम बादा करते हैं कि हम आप ही के साथ रहेंगे हमेशा
हर रोज उम्राह से मिलने आएगी
रोज
अच्छा अब हम से तो वादा करवा लिया है
अब आपकी बात करें
आप
जहां है
वहाँ दिन रात महोबत के सौदे होते हैं। जस्प बिद्दे हैं।
आप यकीन से कह सकती हैं कि आप हमारी हो और सिर्फ हमारी हैं।
इसका मतलब
आप हमें बाकी द्वाइफों की तरह समझते हैं।
ना तो हम कोटे पे पैदा हुए हैं। और
ना ही बाकी। कोठे वालियों की तरह हैं हम अमीरन थे
और आज उम्राव जान है
और
हम भी उसी अमीरन के दिवाने हैं जो फैज़ाबाद के बतनसीब घर में पैदा हुई और
मजबूरी के आलम में यहां लाई गई
हेरान की हो रही है हम अपनी मेरे बुबा के बारे में सब कुछ जान चुके हैं
चलो सुला हो गई
पहली बताई आपकी सब्बा कैसी
है खुबसूरत है हमसे भी ज्यादा
बहुत ज्यादा इतनी की
हमें लगता है कि हम उसके काबिल नहीं है कमाल है
आप उनके काबिल नहीं और हम आपके काबिल नहीं
तो होगा क्या हमने कब कहा कि आप हमारे काबिल नहीं है
अभी अभी तो आपने हमें बेवफा कहा उसके
पहले आपने भी तो हमें बेवफा कहा
फर्क इतना है कि आप बेवफाय करके भी नवा भी
रहेंगे। आराम वफा करके भी दवाई भी रहेंगे।
बेवफा हमने तुमको समझा सनम
तुमने हमको ही
बेवफा समझा
जुटे इलजाम मेरी जान लगाया
ना करो
दिल
है नाजुक इसे तुम ऐसे दुखाया ना
करो
मेरी आँखों में जो अच्छे नहीं
लगते आंसों
तो जलाया ना करो मुझको सताया
ना करो दिल है नाजुक इसे तुम
ऐसे दुखाया ना करो
ये अगर सच भी है तो मुझ को बताया ना
करो
दिल
है नाजुब इसे
सिर्फ एक रस्म निभाने को तो आया ना
करो
दिल
है नाजुक इसे तुम ऐसे दुखाया ना
करो
जब से आप मिलें, तो ऐसा नहीं है। अरे मिया, कहां गुसे आ रहे हैं?
जानते नहीं उम्राओ जान की खाब का है? आप कहां चले जा रहे हैं?
जानते हैं, इसलिए तो अंदर जा रहे हैं। आरे मिया, आप कहां जा रहे हैं? कौन है आप?
और ये क्या बतमीजी है?
देखते लगता है शरीफों में उठने बैठने की आदस नहीं है आपको अरे वाह तबायफ के
कोठे पर बैठे हो और शराफत की दोहाई दे रहे हो आप हद से बढ़ रहे हैं
ऐसा ना हो कि अमारा पठानी खून खौल उठे और आपकी जान की लाले पढ़
जाए बहुत देखा है
ऐसे
महा डाला!
खून! गोहर!
यह! यह क्या कर दिया आपने?
महामाद, अवजल! इन्हें जल्दी हकीम के पास दे जाइए! महा डाला!
महा डाला!
अब क्या होगा?
नवाब साहब, आप यहां से निकल जाएगे, हम यह सब समभाल लेंगे।
हम यहां से नहीं जाएगे, यहीं रहकर हर बात का सम्मा
करेंगे। लिल्ला चाहिए, आपको हमारी जान की
कस्म, इस वक्त यहां से चले चाहिए। क्यों, डर गई?
एक पठान के बच्चे से पाला बढ़ा है, आपकी जान से बढ़कर और कोई चीज नहीं,
आप कह रही हैं तो जा रहे हैं।
हमारे कहने पर वो चले तो गए,
मगर फिर कई दिन तक ना कोई ख़बर आई, और ना वो आए, हम उनसे मिलने की
दूआ करते रहे हैं।
खुदा की कसम, ये उदासी तुम्हारे चेहरे पर बिल्कुल अच्छी नहीं लगती।
तक्तीर में उदासी हो, तो कोई क्या करें। और अगर मैं इस उदासी को खुशी में बदल दूं
तो इनाम मिलेगा। तुम मेरी खुशी का नाम जानते हो। जानता हूँ, वो
कमबक
सु
कहते हैं, हम तो नहीं आ सकते हैं, आप तो आ सकती हैं। कहां?
उनके दोस्त के घर, मैं पता जानता हूँ। तो ले चलो ना, मगर खानम साहब?
उन्हें मैं सभालूँ। खुदा तुम्हें खुश
रखें।
मिटिया।
आदाब मॉल्वी साहब। आदाब। अरे अपने बताशे तो लेती जाओ।
आपको हमारे बताशे याद रहे हैं। लेकिन आप चल्दी में
कोठे से बाहर कहां जा रही हैं। चाहिए भी तो आपसे जूट ना कह सकेंगे।
नवाब सुल्तान से मिलने जा रहे थे। वो बठान। नेक
बनना लगता है। आपको पस
अल्लाह मददकार हो जाइए जाइए जाइए जल्दी कीजिए
जल्दी
आखें तरस गई आपको देखने के लिए। आदाब। आदाब।
आप हैं हमारे दोस्त अश्रफ और आप हैं। उम्राओ। आजकल हमारे दोस्त की जबाँ पर एक
ही नाम है। उम्राओ। महातरमा, ये मेरा गरीब खाना है। और मुझे कबाब में हड्डी बनने की
आदत नह
जानते हैं कि महब्बत की दास्तान लंबी होती है और वक्त कम सो चल दिये।
वैसे महब्बत के दो पल एक उम्र के परापर होते हैं।
बातों में भी वही जादू है जो आपकी आखों में है।
देखा हमें कुछ ऐसे के बहका दिया
हमें तुमने तो खाब
देखना सिखला दिया हमें
देखा हमें कुछ ऐसे के बहका
दिया हमें
आखों में है नशीले बबर जुल्फ में
लहर
दर्या
ये कैसा खुस्न का दिखला दिया
देखा हमें कुछ ऐसे के बहका दिया
मन्जर तमाम रंग में डूबे हुए
से हैं
तुमने
ये किस मकाम पे पहुचा दिया
हमें
देखा हमें कुछ ऐसे के बहका
दिया हमें तुमने तो खाब
देखना सिखला दिया
तुम राव कहां रहे हो? उसे भी बुलाओ.
जी वो तो गई.
गई? किधर?
जी नवाफ सुज़दान से मिलने उनके दोस्त के घर पर.
उसकी ये जुर्रत?
तुमने उसे रोका नहीं?
जी बहुत रोकने कोशिश की पर इश्क पर जोर नहीं.
बिस्मिल्ला, खुदा के वस्ते खुशीच से ताल की तमीज सीखो.
कौन थी वो?
उम्राओ जान, लकनाओ की मशूर तबायो।
रही साह?
आ गई ही बन्नो?
कहा गई थी?
जी वो... नवाब सुल्ता ने बुलवाय था उनकी दोस्त के
हाँ, वही गई थी। हमारी इजासत की बगएर?
तुम जानती हो न?
कि हमारी इजाज़त के बगएर यहां न कोई अंदर आ सकता है न बाहर जा सकता है। यह खानम जान
का कोठा है। नवाब सुल्तान खुदार भी है और समझतार भी है।
जानते हैं हमारे वक्त की कीमत खानम साब की खिदमत में पेश करनी पड़ती है।
यह रही कीमत। तुम त
और हमारे करम को भूलियेगा नहीं। उम्राव जान।
क्या बात है उम्राव?
खानम तुमसे ख़वा क्यों है?
क्या बताएं?
हम नवाब सुल्तान से मिलने क्या चले गए?
बस गुना हो गया.
हाँ, तो आखिर आपको महब्बत हो ही गई.
ऐसा ही समझ लो.
खुदा खैर करें उम्राव जान.
हम महब्बत के सौधा करें.
मगर हमें महब्बत करने का हक नहीं है।
मगर हम मजबूर हैं, इसलिए तो ये शेर लिखा है। क्या
लिखा है, जरह सुनाओ तो। जान देना किसी पे
लाजिन था। सिंदिकी यूँ बसर नहीं होती।
सुभानल्लाह।
हमारे प्यार के बिंगे आस्मान छू रही थी। अर्मान पूरे हो रही
थी। और चाहत थी कि एक दूसरे के सिवाय कुछ दिखाई न देता
था। एक हसीन खाँब देख ही रही थी। कि बस
हमने शेर लिखा है। सुनाइये।
दिल मेरा चुरा कर ले गया। बासपां कमबक्त सब सोते के सोते रहे गये।
अब हम सुनाये।
एक शातिर चोड़नी दिल मेरा चुरा कर ले गयी।
हम जानती थे। आप चोड़ और चोड़नी को जरूर मिलवा देंगे।
हुजूर। नवाब शुजात अलीखा साहब तश्री
बुलाइये। अल्लाह, अब क्या होगा।
आदर्भ।
गालिबन उम्राव नाम
की तावायफ हैं। जी। बेहतर होगा कि आप यहां से तश्टीफ ले जाएं। अभी इसी वक्त। हमें
अपने बेटे से कुछ अकेले में दो बाते करनी है।
अबू
आपने उम्राओ को बेसत करके बाहर निकाल दिया।
इसमें सिर्फ उनकी बेज़ती नहीं है, हमारे भी तोहीन है और हमें यह अच्छा नहीं लगा।
अच्छा, उम्राव की बेज़ती आपको बेज़ती लगी, और आप जो हमारे फर्मान के खिलाब
चाह रहे हैं उसका कुछ नहीं। हमने आपसे कहा था कि उम्राव को मिलना मत�
जो दूआ बनके बाप की सांसों से और दूद बनकर मा की छाती से निकलता है। दौलत
से खरीदी हुई महब्बत, महब्बत नहीं, हवज है। अब्बा उजूर,
अब आप हमारी महब्बत की पाकीज़की पे उंगली उठा रहे हैं। हमारी महब्बत
कितनी पाक है, ये सिर्�
गुफर बखने लगे हैं मत भूलो जो दौलत आप उस तवाय पर लुटा रहे हैं वो आपकी नहीं
हमारी है हम आपको बेदखल कर सकते हैं
तो फिर हमें बेदखल कर दीजिये
क्योंकि उम्राव हमारी सिंदिगी से बार नहीं जाएगी ठीक है
तो हम अभी इसी वक्त आपको ब
घर से और जायदास
से।
आप?
आप आपे गए? सब खैरियत है?
खैरियत ही तो नहीं। उनकी अबा वहाँ पहुँच गए थे। बहुत गुज्जे में थे।
सुल्टान से अकेले में बात करना चाह रहे थे। तो?
तो क्या?
तब से दिल धक्धक कर रहा है। तुम जाओ ना, जाके पता करके आजाओ कि क्या हुआ और क्या
नहीं। मैं?
खुदा के वास्ते जल्दी खबर लेके आना, मैं इंतिजार करूँगी। वा गोहर मिर्जा,
उसन
उम्राव, उम्राव, क्या खबर,
कुछ बोलती क्यों नहीं,
खबर बुरी है, इतनी बुरी भी नहीं, पर अच्छी भी नहीं है,
कुछ मूज़े भूटो तो, बाब बेटे में टकरा हो गया, नौबत यहां
तक आ गई कि नवाव सहाब ने अपने बेटे को बेटखर कर दिया,
अपनी दौलत से, अपनी जायदात से, और शायद, शायद अपनी घर से
भी। मगर क्यों?
नवाब सुल्तान तुम्हारी महौबत का दम भरते हैं, और नवाब साहब को ये बात एक आंक नहीं
भाती।
तश्रीफ लाइए। तुम्हें यकीन है कि तुम्हारे वो नवाब सुल्तान आएंगे। खानम साहब,
आप है नवाब फैज़ अली। आदाब। तस्लीम। तश्रीफ रखिये। आदाब।
अल्लियाब। अल्लियाब। अल्लियाब।
अल्लियाब। अल्लियाब।
अल्लिया जिस
कोटे पे गोली चल जाए, उसका नाम और भी रोशन हो जाता है। लेकिन अभी यकीन
कीजिए, हमारे तमंचे से गोली नहीं चलेगी। फैर,
छोड़िये मुए तमंचे को, जरा कलाई आगे बढ़ाईए। फर्माईए, हमारे
कोटे की कौन सी रौनक पसंद करेंगे आप
आप हमें पान नहीं खिलाएंगी।
उम्रावजान
के हुस्न के चर्चे ही हमें यहां खीचलाएं। खानम सहाब,
कहे दीजिये हम इनकी दिल जोई न कर सकेंगे। हम नवाब सुल्तान की हो चुके हैं
और उनकी वफा का ही दम भरते हैं। सुन लिया आपने, खुदा जूट न
इनकी वफाओं के सामने हम भी मजबूर हो चुके हैं। बहराल हमें उम्राव जान के दीदार हो
गए। जहाँ नसीब। तैज अली साहब, हमारे यहाँ और भी रौनके हैं। जैसे कि
खुरशीर, बिस्मिल्लाह, हुस्ना, जीनत, आप किसी का भी इंतिखाब कर लें। जी नह
अगर सिंदिगी ने वफा की तो फिर मिलेंगे
और हाँ तुम राजान की एक
जलग और आपके वक्त की कीमत शुक्रिया
तैजाली को आपने कदमों में एक पल के लिए जगा
दी उसके लिए बहुत बहुत शुक्रिया
खुदाफिस खुदाफिस
हद्दी
तेड़ी है लेकिन आदमी है दौलतमन नवाब सुजात अली के नाम
सुनिये जी जाइए
हम आजर होते हैं
जी
हम पूछते हैं ये आवारा आशिक कब तक यहाँ पड़े पड़े शराब पीता रहेगा आइस्ता बोलिये
वो सुन लेगा सुन लेगा तो सुना करे हमें परवाह है क्या हम कहे देते हैं हम और
बरदाश न करेंगे पेगम, वो हमारा दोस्त है, समझने की कोशिश कीजिए। तो निभाओ दोस्ती,
हमें एजाज़त दे दो, हम ये घर छोड़कर चले जाते हैं। आपको कहीं जाने की ज़रूरत नहीं
है, हमें बस थोड़ा वक्त दीजिए। अश्रफ मिया,
हमें उम्राव के पास ले चलिये�
शरा पी है हमने खो पी है
पीतेंगी तो नहीं
कैसी बातें कर रहे हैं ये जित कर रहे थे कि हम उम्राव जान के पास
जाएंगे सो हमें नहीं आ लेया करम किया आपने है शुक्रिया
नवाब साथ हमारे पास रहेंगे आदम
आईए चलिए
हम
भी घर हुए हैं बेसहारा नहीं
चलिए
आप हमें सुलाने की कोशिश कर रही हैं?
क्या आपको लगता है कि आज हम पहली बार नशे में हैं?
नशे में हम आज से थोड़ी हैं.
कौन सी गजल थी हाँ इधर जो देखो
सलाम कर ले खुलाम कर ले
ये क्या कह रहे हैं आप तो हमारे सर्दाज
सर्दाज बे घर
बे रोजगार
कंगाल सरताज मज़ाक उड़ाने के लिए और कोई नहीं मिला आपको?
खुदा के वासे ऐसी बाते ना कीजिए क्यों?
यकीन नहीं हो रहा कि अम बेघर है?
जाइए हमारे अब्बा उजूर से पूछे
नवाब सुझात अली खान
चार
महीने के थे उनकी गोध में हमने पिशाब कर दिया तो उन्होंने हमें
उठाके फर्श पे भेग दिया
तो आज अपनी जिंदिगी से बाहर भेग के कौन सी बड़ी बात की?
हाँ, एक बात है। आप हमें अपनी
जिंदिगी से बाहर तो नहीं भेगेंगी। ये क्या कह रहे हैं?
आप ही तो हमारी जिंदिगी है।
हम भी आपको हमारी सिंदिगी से बढ़कर जाते हैं।
लेकिन अगर पेवफाई की,
तो एक बात
याद रहे, ये पठान आपको काट के अपनी सिंदिगी से बाहर भेग
देगा। ठीक है।
काट के भेंग दे, मगर क्यों ऐसी बाते कर रहे हैं आप, सब ठीक हो जाएगा,
आपके अप्पू आपको गले लगा लेंगे, हाँ, शे,
कमाल है, हम यहाँ महबबत की बाते कर रहे हैं,
और आप हमारे अब्बाव जोर की बाते कर रहे हैं,
कहीं आपको हम पे रहम तो नहीं आ रहा?
हम तो खुद ही रहम के काबल हैं। किसी और पे रहम कैसे करेंगे?
जरा इदर दिखें। देखें आपके आँखों में।
साफ नजर आ रहा है। रहम।
रहम वो भी आपके घुलाम के लिए
घुलाम
घुलाम
की जगा यहाँ नहीं है
यहाँ है यह क्या कर रहे हैं यहाँ रहिए
हमारे पास नहीं
हम आपके खुलाम हैं सुनिए
यह क्या बजबड़ा है उठिए
पलंग पर चलिए आजाईए
चलिए उपर लेकिन हम तो
उम्राव जान की गुलाम है
गुलाम
तो फिर हम भी आपकी गुलाम है
हम भी यहीं बैठते हैं
ठीक है फिर
यही सो जाते हैं। ठीक
है। यही सो जाते हैं। मुलाम।
इसकी कढ़ाई देखें।
मुझे सबसे महंगी दोहर है वो दिखाओ नवाब सुल्टान से कहा हूँ नहीं याद किया ये
लीजिए खनम साहब पेशन नहीं चाहिए
हादाव
नवाब सुल्टान साहब आईए आईए हमारे नज़दी बैठके
हबर मिली थी कि आप राथी को तस्चीफ लिया थे और खुदाना खासत आपकी तबियत खराब
थी। आप कैसे हैं आप?
जी ठीक हूँ। अल्लाब को हमेशा ठीक रखे। लेकिन हुआ क्या था?
कुछ खास नहीं। उड़ते उड़ते ख़बर सुनी थी के बड़े नवाब साहब के साथ कुछ कहा सुनी हो
गई थी। नवाब सा
जब चाहे महरबान हो जाए, जब चाहे हाथ रोक ले.
मगर खानू सहाब... तुम बीच में मत बोलो.
हम तो इन्हें दुनियादारी की बात समझा रहे थे.
खुदा जूट न बुलवाई नवाब सहा.
आप जैसे रही सी तवाईफ को एक दर्जा देते हैं.
वरना बिचारी, त�
नवाब सुल्तान ने तो सबको... तुम फिर बीच में बोली?
खैर छोड़िये इन सब बातों को. ये देखे दुशाले आए हैं.
आप परवरिश करें, तो आपकी बदौलत इस बुढ़ावे में एक दुशाला ले लूँ.
कीमत कमबख बता रहा है पांच हजार रुपए.
अब
खानुम साहब अगर आप शाल के लिए हमारी तरफ देख रहे हैं तो हम माजूर हैं और ये कहते
हुए हमें बिल्कुल शर्म नहीं आती कि हमारे पास कुछ भी नहीं है शर्म की बात तो तमाम
अवत के नवाबीन के लिए है हाई तफ़तीर अब हम इस लाइफ हो गए कि एक
जर
और शाल ले लीजिये। ये जूट कह रही है। ये हार हमने इन्हें
नहीं दिया। नवाब
सुल्तान, आप हमारे मौजज़ मेहमान हैं। जब तक चाहे यहां रहें। हाँ, अगर कल को किसी
ने कह दिया कि इतने बड़े नवाब एक तवाइफ की टुकड़ों पे पल रहे हैं
मगर बात कुछ हज से आगे बढ़ गई है।
ये लो, और शाल्क खानम साहब के हवाले कर दो। और हम एक और
लेंगे, और राजान के लिए। और अगर आप और आप इच्छा हैं, तो हम
आप दोनों के लिए भी एक-एक ले देंगे। अब हम
एजासत चाहेंगे।
मगर जाने से पहले इतना ज़रूर कहेंगे कि महबत को दौलत के तरह उसमें तोल कर आपने
सिर्फ हमें ही नहीं इंसानियत को गाली दी है। हाई हाई, लगता आपको
सच सुनने की आदत नहीं है नवाब साहब। सच तो ये है खानम साहब
कि हम नवाब सुल्तान हैं और आप स
सुनिये, कहाँ जा रहे हैं आप?
रुकिये।
हम
भी आपके साथ चलेंगे। नहीं, उम्रौ, आप हमारे साथ नहीं चल
सकती। आपको यहाँ रहकर हमारा इंतजार करना होगा।
जिन लोगों ने आपकी द्वाहिन की हैं, हम उनके साथ एक पल भी
नहीं रह सकते हैं। तो क्या हमारी मुश्किले बढ़ाएंगी आप?
हमारी सिंदिगी यूही अंदेरों में भटक रही है।
समझने
की कोशिश करो, उम्राओ। हम सारी दुनिया से लड़ सकते हैं, लेकिन तक्तीर का लिखावा
नहीं मिटा सकते हैं।
और अब हमारी तक्तीर है चदोचहद। और आपकी तक्तीर है
इंतिसार।
हमारी
जान ले लेगा ये इंतिसार। खुदाफिस।
ये क्या हुलिया बना रखा है? चलो उठो और तैयार हो जाओ। पैजली नीचे इंतिजार कर रहे
हैं। मगर खानम साहब, हम नवाब सुल्तान के हैं। भूल जा उसे। नवाब सुल्ताने खाब
हैं। और तवाइफ की आखें खाब देखने के लिए नहीं होती।
खाब
दि�
उम्राव जान ये एश और इश्रा की जिन्दगी महबत के साहरे नहीं तौलत के
साहरे चलती है ठीक है नवाब सुल्टान लोटेंगे और
तौलत लेके आएंगे कल क्या होगा हमें नहीं मालूं हाँ आज की बात करो हाँ नवाब सुल्टान
कंगाल है और फैजली तौलत मन
छ�
और हमारा भी,
रोनी
से कुछ हासिल नहीं होगा, बिट्या, हम सब हालात के शिकार हैं,
तुम भी, और हम भी, दूआ तुम भी,
फर्स्ट किया है गालिब का एक शेर। आपको चाहिए एक उम्र असर होने दर। कौन जीता है
तेरी जुद्ध के सर्फ होने दर।
आपकी
घरीद हुई लौंडी हाजर है। लौंडी, आप तो हमारे दिल की मलिका हैं। जो
बिक गई हो, वो मलिका नहीं हो सकती।
इस बात का फैसला हमारा दिल ही कर सकता है और कोई नहीं
मगर
हमारी दिल का फैसला कोई नहीं सुनेगा क्यों नहीं हम सुनेंगे और हमेशा सुनते रहेंगे
और हमारी खुशी की तलाश कभी नहीं छोड़ेंगे आपको जिस खुशी की तलाश
है
वो एक जिन्दा लाश से ज्यादा कुछ भी नहीं। और लाश दफनाने की काबल होती है।
महब्बत की काबल नहीं। गुदा के वास्ते ऐसी बातें मत कीजिए। आप
हमें मार दीजिए। और हमारी जुस्तुजू का खोन मत कीजिए।
हमारी खुशी हमें जरूर मिलेगी।
जो तुम से मेरी जोस्त जो ना करना
मैं ना मिल सकूं जो तुम से मेरी जोस्त
जो
सकूं जो तुम से मेरी जोस्त जो ना करना
तुम्हें मेरी ही कसम है
मेरी
आरजो ना करना मैं ना मिल सकूं जो
तुम से मेरी जो
मेरी जूस्त जूना करना
हम
सिर्फ आपको देखना चाहते हैं सिर्फ आपको
खुसूर मैंने वो ही तुम कभू न करना
तुम्हें मेरी ही खसम है मेरी
आरजू न करना मैं न मिल सकूं जो
तुम
नहीं, फैजली, नहीं, नहीं.
आपने सच कहा था, देल के बगएर आप एक सिंदा लाश हो,
अगर फैजली इस लाश को सिंदा करके रहेगा, या तुम्हें एक
लाश बनाके छोड़ेगा.
अश्रव साहब. जरा रुको मिया.
अश्रव साहब.
आदाब. आदाब. कैसी हैं आप?
जिन्दा हैं.
एक एसान कर दीजिए. बोलिए.
सुल्दान साहब का कोई पता हो, तो हमें बता दीजिए.
जी, खबर यह है कि उनके मौसा जनाब नाजिमुद्धीन...
उन्हें अपने साथ गड़ी ले गए हैं। गड़ी?
जी हाँ, वो वहाँ के मुन्सिफे आला है। ये वही मौसा तो नहीं, जिनकी
बेटी का नाम सबा है, जिनसे सुल्टान साफ के वालित उनका निकाह करने की सोच रहे हैं।
गालिबन वही हैं, आपने सही अंदाज़ा
लग
ये क्या कर रहे हैं आये तश्रीफ रखिये आप
भी तश्रीफ रखिये हमारे पास देखिये आपके कहने पर
हमने जुस्त जुबी छोड़ दे और आजू से भी किनाना कर लिया अब खिदमत तो
करने दीजिये ये क्या फर्माया आपने खिदमत करना तो हमारा फर्स है आपको �
ऐसा कब कहा है?
तो फिर चलिए हमारे साथ, खुली हवाओं में, यहाँ तो आपका धम भी गुटता होगा, हमेशा
के लिए नहीं, एक महिने के लिए ही सई.
कहा? हम आ रहे हैं, दौलतबाद.
दौलतबाद है कहा?
यहाँ से काफी दूर, कानपूर से भी परे, गड़ी के रास्
गढ़ी से होकर?
जी.
कुदरत काफी महरबान है अम पर.
आपका दिल भी भल जाएगा.
ठीक फर्माया आपने.
हमारा दम घुटता है यहाँ पर.
हम चलेंगे आपकी साथ.
मगर खानम साहब?
जब आपको हमारा साथ हो, तो खानम साहब क्या है?
किसी का भी खौफ नहीं होना चाहिए।
इजासत।
उम्राव, तुमने फैजली के साथ जाने की जित की, और हमें मुमाँगी कीमत भी मिल
गई। हमारी दुआएं तुम्हारे साथ, लेकिन खुदा जानता है कि हमारा
दिल बहुत घबरा रहा है।
देखो बेटी, हमारी दुनिया जैसी भी है, अपनी है, बाहर
की दुनिया बहुत बदसूरत है, हम बदनाम जरूर हैं, लेकिन जो भी करते हैं, सच्चाई
से करते हैं, इमानदारी से करते हैं,
धोका धड़ी और मकारी से नहीं, बाहर जाके कैसी दुनिया में लेगी तुझे,
अल्लाह मालिक
है।
मैं आप ही से मिलने आ रही थी मॉल्वी साहब। मैं जा रही हूँ। कहां?
फैसली के साथ। एक महीने के लिए। फैसली के साथ। फैसली के साथ मैं गढ़ी पहुंचा हूँगी।
नवाब सुल्धान वही है।
उन्हीं के कदमों में सिंदिगी कुजारने के इरादे से जा रही हूँ। दूआ कीजिए, मेरी दिल
की मुराद भूरी हो जाये। आमीन। खुदा तुम्हें खुश रखें। और
बेठे, फिर पलट कर इधर मत देखना।
मगर वो गड़ी वाली बात आप किसी से ना कहना। �
तुम्हारे लिए दूआ निकलती है जब तुम यहाँ आई थी तो मेरा अपना
कोई नहीं था कोई भी नहीं तुम आई
तो एक बिटिया मिल गई
आज उस बिटिया को खुशी-खुशी विदा कर रहा हूँ
तुम्हारे अब्बा होते तो ना जाने क्या कुछ
देते तुम्हारी विदाई पर। पर मेरे पास तो दुआओं
के सिवा कुछ भी नहीं। खुदा के वास्ते ऐसे न कहिए। आप तो दुनिया के सबसे अमीर बाप
हैं। क्या नहीं दिया आपने। प्यार, शफकत,
अकन। जिसके साहर मैं इस खुदकर्षी से भरी
मैं जहां भी रहूँगी आपको याद करूँगी। अपना क्याल जरूर रखना। अब
जाओ भी। नहीं तो मैं रोतूंगा।
रोकर किसी को विदा नहीं करते। अरे जाओ
ना।
अगले जनम
हम जरूरी काम से जाएंगे। आपको कुछ देरिया रूपना
पड़ेगा। जी। ये गुर्सवार
कौन है आपके साथ ही?
जी, हमारी रयासत के सिबाही हैं ये। चलिए।
अस्सलाम आलेकुम। वालेकुम अस्सलाम।
जी।
मौतरमा कुछ देर के लिए आमपा ना लेंगी। बेशत। शुक्रिया। आप हमें यहाँ
तनहाँ छोड़कर जा रहे हैं। खुदा का घर है। इससे मैं फूच यहाँ और क्या होगी। हम बस यू
गए और यू आए। आप तश्रीव रखें।
खुदा का शुगर है आप आये तो, थोड़ी देर यहीं सुस्ता लीजिये.
या अल्लाह, इनके हाथ में क्या हुआ? कुछ खास नहीं, छुटा सा आदसा हुआ था, उसमें
शायद लग किया हूँ.
चलिए, आप सामान ले लीजिये, हमें जाना होकर, चलिए.
और आपका तमच
आप लोग भी छह
लिये
हम कई सालों से तोहे पकड़ने की फिराग में थे। और आखिर तुम हमारे हथे चड़ गए। हम कल
रात से तुम्हारा पीछा करते आ रहे हैं। तुम्हारे बाकी सब साथी पकड़े गए। और अब
तुहार बारी है। ले चलो इन सब को गढ़ी। इन औरतों को भी।
सुल्
अब आये हैं क्या?
नहीं मिया, उमराओ यहाँ पहुँच गई है। उमराओ?
मगर वो अकेली नहीं, फैजली डाकू और उसका पूरे गिरोग के साथ गिरफतार हुई है। और
हमारी हिरासत में?
फैजली डाकू वो तो नवाब है। नहीं मिया, वो डाकू है जिसकी बरसों से
चेहरों की सफाई पर ना जाईएगा। चेहरे दगाबास भी होते हैं।
क्या मैं उनसे मिल सकता हूँ? क्यों नहीं। जब चाहो।
और वो हमें मिलने के लिए निकल पड़े। लगा हमारी मन्जिर
खोच जल कर हमें कले लगाने आ रही है। कि सितम जरीव सिंदगी ने एक
बा वो कमबखत
फैज़ अली उन्हें मिल गया
सुल्थान
खान?
कड़ी
महरबानी के लिए शुक्रिया। शुक्रिया किस बात का?
लोगों का तन ढखने के लिए दोशाले खरीदते फिरते हो। तुम्हारा नंगा बदन देखा
तो। तरस आ गया।
आखिर असलियत सामने आ गई। नवाब
फैज अली, डाकू फैज अली साबित हुआ।
सल्तान खान, कहाँ जा रहे हैं आप?
आपसे मतलब?
मतलब अगर आपको हमारी जान, मतलब उम्राव जान से मिलने का इरादा है, तो आपको
हमारी इजाज़त लेनी पड़ेगी.
तोकि आपको हमारी खरीदी हुई लौंडी है.
क्या बख रहे हो?
आपकी पीट बलटते ही, वो म
हमें उस मासूम के मुतालिक बकवा सुनने में कोई दिल्जस्पी नहीं है। आपका सुनका
खुशी होगी कि वो मासूम अपनी मरजी से मेरे साथ आई है। और जिसे आप मासूम कहते हैं
वो एक तवायफ है। और तवायफ का दीन और इमान दालत होता है।
सिर्फ दालत है। �
जूत और सच का फैसला, आप खुद उम्रावचान के साथ पैट कर कर लीजेगा।
खुदा कसम, उसके मुझे हमारी सासों की महक आएगी। फेजली।
जी, यकीन नहीं होता।
यहाँ ही है।
यकीन नहीं होता तो, उसकी दाएं
चांग पर एक नज़र डाल लीजियेगा। इतना बड़ा तिल है।
साहर है कि वो तिल आपने भी
देखा है, खान साहब। क्यों?
उम्राओ, तुम जिन्दा रहोगी, मगर लाश बन कर। महतरमा, आपको नवाब
सुल्तान ने बुलवाया है।
आदाब हुजूर, उम्राव जान।
आप
लोग जाईए, अब ये हमारी हिफासत में है। जी हुजूर।
आपने शराब क्यों पी?
अब तो हम आ चुके हैं
हमने
शराब पहली बार इसलिए पी थी क्योंकि हम दुनिया को छोड़कर आपके पास आये थे
आज हमने इसलिए पी क्योंकि
हम आपको छोड़ रहे हैं
छोड़ रहे हैं यकीनन आप मज़ाग
मज़ाग अपनों से किया जाता है
खेरों से नहीं तो अब हम खेर हो
चुके आप किसी और को दुलान बनाएंगे
हम सबा से शादी करने जा रहे हैं
जब हमें घबर मिली, कि आप गड़ी में मौजूद हैं, हमें डरता
को जैसा ही होने वाला है।
हम
आपसे पूछते हैं, क्या हुई वो कस्मे, वो वादे, साथ
जीने मरने के हिरादे, वो अंगूठी, वो प्यार की निशानिया,
क्यों?
आखिर क्यों आप हमें अपनी जिंदगी से निकाल रहे हैं?
क्या कसूर है हमारा?
क्या गुनार किया है हमने?
जवाब बागने का हक तो है हमें?
हक था!
उस उम्राओं को जो वफा की मूरत थी, लेकिन अफसोस वो मर गई.
उस पल जिस पल उसने दौलत की लालच में आके
क्या कह रहे हैं आप?
यादे हमने कहा था, जिस दिन तुम वफा की डोर को तोड़ दोगी,
ये पठान का बच्चा तुम्हें काट के अपनी सिंदिगी से बाहर भेख देगा.
मैं तुम्हारे खरीदार फैज अली डाकू से मिल कर आ रहा हूँ.
हमारा खुदा गवार है.
हमने उसे आप तक पहुँचने का जरिया बनाया था। अपना इमान भेज कर?
अपने जिस्म का सोधा कर के?
ये जूट है। वो आपको बहका रहा है। और हम बहक रहे हैं?
फैजली आपकी जिस्म के लकीरे और गोलाया किनवा सकता है।
यहां तक कि वो उस दिल को भी बहचानत
आप जानते हैं ना हम किस दिल की बात कर रहे हैं?
और कुछ सुनना चाहेंगे आप?
बोलिए, अब आप जवाब दिवजी हैं.
बारे किस्मत, ये छूट है,
सब छूट है.
सब खाबों के या तो
ताभीर बताओ मेरे सब
खाबों के मुन्सिफे आला ने हुकुम दिया है कि इन्हें पाइज़त लखनो भेज दिया जाए
जिन्दिगी की आखरी सांस तक नहीं भूलेंगे। जिस पिंजरे से आजाधी का खाब दिखाये था,
आज उसी सोनी के पिंजरे में वापस दज़वा रहे हो। हम
आपकी जिन्दिगी से तो जा रहे हैं,
बस एक एहसान और कर दीजी। कभी मुहपत की दो पल याद करके,
जि
एक हांसु भी गिरा देना
हाई अल्लाह यह आग कैसी है गाड़ीवान हसल कटगी भाई साहब रहा खेत तो आग दे देवें उसे
पहली जल के राख होई जावे तभी तो नमी आवेगी ना
अगले जनम मोहे बिट्टिया न कीजो
जो
अब किये हो दाता ऐसा न कीजो अगले
जनम मोहे बिट्टिया न कीजो
तुम कैसे रहे गोहर?
अब ठीक हूँ कि तुम आ गई हो। कैसी हो?
अल्ला का शुक्र है। हम लोग सब सुन चुके हैं फैजली की असलियत
और सुल्कान की बेवफाय की दास्तान। काश
तुमने मेरी हालत देकर सबक लिया होता।
जिन्दिगी बहुत कुछ सिखाती है गुर्शीद, दर्द तो दर्दी सही। एक
बात पूछो उम्रा, आपको हमारी यादाई कभी?
मैं भूली ही कब थी, खुदा कसम, हमें आपकी बहुत यादाई।
जैसे उपर तले की दो बेहने होती हैं, मां के
घर तो हमेशा लड़ती र
लेकिन जब एक बिदा हो जाती है ना, तो दूसरी रो रो के मर जाती
है। खानम साहब कहा है?
अंदर है। जी अच्छा नहीं है। घुटने पे,
घुटने पे है। उम्राव। खानम साहब।
लौट आएं बिट्या, यहाँ हाल बना लिया है अपना।
खुदा जूट न बुलवाएं, हम पहले दिन से जाते थे कि जिंदगी की थपेड़े काके
तुम बापस लौट ही आओगे। देख लिया न, बाहर की दुनिया का मक्रूँ
चेहरा। खारम साहब वो, न मैं
पूछू
बेटी, ये घर तुम्हारा अपना है। इसकी चार दिवारी में तुम्हारे लिए हमेशा जगा
है। अब तबेट कैसी है आपकी?
बेटीया लौट आई, तो मा तो ठीक हो ही जाएगी।
बुआ!
बुआ मौल्वी साहब बुआ ये खाट उल्टी कैसे रख दी जबकि बता ये
बुराशा गुर होता है नहीं बिट्या इसे रहने दो तेरे मौल्वी
साहब अब तेरे लिए कभी बताशे नहीं लाएगे
अब वो... बोल भी...
तो लौट आएं आप। जिस कंबख्त की तलाश में आप कड़ी तक गई,
वो किसी और का हो गया। चलो अच्छा हुआ।
शायद उपरवाले को यही मन्जूर था, कि हम दोनों साथ-साथ रहें। क्या बक रहे हो,
तुम नशे में हो। खुदा जानता है कि मैंने तुम्हें क�
इतना बुरा भी नहीं हूँ मैं। ये क्या कर रहे हो गोहर। होश में आओ। उम्राओ
जान। तुम्हारे इश्क में मैंने क्या क्या नहीं किया। नवाब से दलाल तन गया।
तुम्हारे आशे के बेगाम लाता रहा। ले जाता रहा। सिर्फ इसी पल
के इंतजार में।
गोहर गोहर गोहर
हम
अपनी पिखरी हुई जिंदगी से समझाता कर ही रहे थे कि एक और तुफान आ गया
बहुत बड़ा तुफान
जिसने पूरे मुल्क को अपने चबेट में ले लिया आजाधी के परवानों की सरकौपी
के लिए अंग्रीजी फोजों ने लखनों पर भी हमला कर दिया लखनों की गलियों ने करबला
की आतिला दी तो अंग्रेज ने यसीद की
बगावत की चिंगारी जो मेरट से भड़की थी सारी हिंदुसान को आग की तरह जला रही है
बाग्यों का सर कुछल कर अंग्रेजों ने दिल्ली पर तो कभजा कर लिया अब आवध की तरह
रुख कर रहे हैं लखनों की गल्लियों तक पहच गयें कमबख्त
हाई हमारे लखनाओं को तो जैसे नजर ही लग गई। अल्ला खैर करे खारम साहब, बहुत बुरा
वक्त चल रहा है। खुदा खैर करे। ये कौहर मिर्सा
कई दिनों से नजर नहीं आया। किसी को इल्म है कहां गया वो?
खाक डालिये लो उस पर, पड़ा होगा किसी डोमनी के
खून? ये कैसे हो गया?
एक सिर्फ मैं ही नहीं हूँ, खारम साहब। पूरा अवध खून में नाया हुआ है।
बगावत से निपटने के लिए अंग्रेज उन्हें तोपों के मुँँ खोलती हैं।
लोगों को भाजी पे लटकाया जा रहा है। और बच्चों को... बच्चों
को
अरे कोई जाके मरहम लेकर आओ इनके सक्मों पर लगाने के
लिए।
नवाबी लहूने हाथ में तलवार तेही दी हमें फख रहे तुम पर मौलाली तुम्हारे साथ ही
अब और वक्त जाया मत करो खानम साहब आप इन सब को लेके पिछले दरवादे से चले जाओ मैं
उपने साधियों को लेकर उन साले मौका सामना करने जाता हूँ चलो चलो
अपन
गोहर, हमने तुम्हें माफ किया।
ख़दाफिस। ख़दाफिस।
अपना
अपना ख्याल रखना। खैर ये से पहुँचाये खुदा तुम्हें। खुदा हाफिस। खुदा हाफिस। पर आप
ही तो हमारे साथ चलेंगी ना अम्मी। नहीं, हम नहीं जाएंगे। मगर क्यों?
जहाँ खानम का कोठा, वही खानम। कोठा खात में मिलेगा, तो खानम भी साथ ही
जाएगी।
ये
क क्योंकि हम सिर्फ तुम्हारी नहीं, इस कोठे की हर लड़की की अम्मा है। हमें माफ
करते हैं। माफ करते हैं। माफ करते हैं। माफ करते हैं। माफ करते हैं। माफ करते
हैं। माफ करते
हैं।
हु हु
और हमारा कारवाँ फैजाबाद पहुचा। बिस्मिल्ला और खुरशीव ने कहा,
फैजाबाद तो तुम्हारा अपना वतन है, तुम क्यों ना यही पना ले लेती,
हम तो आगे नेपाल पहुँचे ना पहुँचे। मैंने सोचा, क्यों
ना आखरी बार अमीरन से मिल ले।
र
एक मकान हमने किराय पे ले लिया, और रोजी रोटी कमाने के लिए तैयार हो गए। अमीरन,
घर जाकर अपनों से मिलना चाती थी, पर उम्राव जान,
वो तो एक तवाइफ थी, कैसे जाएगी। फिर एक
नवाब साब हमारी कयाम गाह पर तश्रीफ लिया है। आदाब। तश
शुक्रिया फर्माईये हमें खुशी है कि आप जैसी
फंकारा हमारे फैजबाद तश्रीफ लाई है हमारे आज शादी है
और इस मुबारक मौके पर हम ये चाहते हैं कि आप एक मुझ्रा पेश फर्माएं
जी हमें मन्सूर है बिस्मिल्लाह
जैनसीब
फैजाबाद काफी बदल सा क्या है?
आप पहले फैजाबाद आ चुके हैं?
जी, गदर से पहले.
उस वक्त बहु बेगम के मखवरे पर एक जमादार हुआ करते थे, जिनके एक बड़ी सफेदरंग की
कोठी थी.
हाँ, थे, मगर आप उन्हें कैसे जानती हैं?
जी, एक मर्तबा �
बस वो मुझे घर ले गए और मेरी बड़ी खातिर भी की थी। वही जमादार न, जिनकी एक लड़की
निकल गई थी। मुझे क्या मालूम?
यू तो कई जमादार थे, और अब भी हैं, मगर रोशनी वगैरा का इंतिजाम गदर
से पहले वही किया करते थे। उनका एक
लड़क मैंने जिक्र किया था न, मैं उनके साथ उनके घर गई थी,
वही मिली थी। जमादार साहब गदर से पहले ही इंतिकाल फर्मा गए थे। उनका
लड़का आज भी उनके जगा पर नौकरी बजा रहा है।
महतरमा, इजाज़त है?
जी आप चलिए।
हमारी जवारी तैयार करूँ। जी वीरुसान।
वही बच्ची, जिसे तुमने तमाचा मारा था, यही,
इसी जगह, खुदावन्दा,
तुम अमीरन हो,
हमार बिटिया,
अम्मी, अम्मी, अम्मी,
अम्मी, अम्मी, अब वो हम
सबसे रूट कर चले गए, कैसे दुख भाटू तुम्हारा,
चरूर तुक बाठती अपना अगर तुम अमीरन होती मगर तुम तो एक तवायफ
होती तुम एक रोज के लिए फैजाबाद में आकर चमादार साहब की याद
का भी मिट्टी में मिलाए रही ऐसा ना कहो अमी अमी मैं तुम्हारी
बच्ची हूँ तुम्हारी अमीरन अमीरन तो
इस तरह जलील ना होने देती। बस हम भी दिल से निकाल
दिया। निकालने से पहले एक बार तमाचा तो मारती।
एक बार अंगुठी गवाई थी। तो तमाचा मारा था।
आज तो मैं सब कुछ गवा के आई हूँ। इस्मत, इजद, मान, मर्यादा,
घर, बार, मां, बाप, स�
मारो मुझे, जी भर के मारो, मारती क्यों नहीं?
मैं तो भूली गई थी, मारती तो अपनों को है ना?
हाँ, गायर हो तुम,
ये मम्ता की मारी नहीं मारेगी तुम्हें, मगर मैं तुम्हारी खुईच सरूर पूरी कर सकता
हूँ.
ठपड तो क्या, गला भी दबा सकता हूँ तुम्हार। जिस तरह तुमने इस घर की आबरू को
दलदल में धकेला है, तुम्हें तो जीने का भी हक नहीं। जमाल!
अरे तवायफ बनने से पहले, चुल्लू बर पानी में डूप जाना चाहिए था तुम्हार। जब वो
कमभक
द
शायद अमीरन की तलाश में, जो जिन्दिकी की गंधिकी में गुम हो गई थी, या
फिर मरने से पहले, अपनों को गले लगा कर रोनी के लिए। जिन यादों को हम दफना चुके
हैं, उन्हें आवाज देने की कोशिश मत करो। चली जाओ फैज़ाबाद से, हमेशा के
लिए।
एक मां जाया भाए था, आज वो भी अपनी बेहन को फिर उसी बाजार में वापस भेज रहा है।
हाँ,
मैं तो अमेरन की तलाश में आई थी। दोपल के लिए अमेरन मिल भी गई थी,
फिर खो गई। बड़ी भूली थी, और थोड़ी
पागल भी थी।
मैं कभी शादी करके बेदा ना होंगी। घर और परिवार को छोड़कर कभी ना
जाओंगी।
चलती
हूँ। हो सके। तू उस बगली को पाफ कर देना।
इस और सपनों में भी आया न कीजो
अगले जनम मोहे बिटिया न कीजो
जो अब किये होता था ऐसा न कीजो
अगले जनम मोहे
देखा मिया फैजबाद की अमीरन लखनव से तवायफ जान बन कर वापस आ गई है अमा यू कहिए दुलन
सजराल से मही के वापस आ गई है और ससुराल भी कैसी ससुराल?
प्रस्ति की एजाल
रहें
अपनां सकते थे सच है हमें
अपनाए क्या दाग ये
दिल ने पाए है कैसे उनको
हम समझाए क्या पूछ
रहे
दिल
छोड़ो तुम्हें गिनवाए क्या
दाभी दिल ने पाए
कैसे उनको हम
समझाए क्या पूछ रहे
काड़ी बान, रुक क्यों गए?
रस्ते में कोणों पड़ल बा.
कौन है? हम देखाते हैं भाई साब.
ये तो कोणों कोड़ी बा. ए, उठ!
अरे, रुको, मत मारो इसे.
अल्लाह के नाम पर देद है बाबा.
बहुत भूख लगे.
रहें करूँ, अगर मैं निकोबू आया लो वो पल भर में भूखके ही से ठीक कर देगी दिलावर
का? रहें के नाम पर कुछ रहें कर बेटा बेटा कुछ दे दे बाबा को इस खरीब का कुछ दे दे
बेटा
तुम
जो भी हो
अल्लाह वाली हो बेटा बहुत रहम है तुम्हारे दिन में
तुम्हारे जैसे नेक लोगों के अल्लाह जरूर सुनता है
बेटा हो सके तो मेरे हाख में दुआ करना बहुत बड़ा गुनेगार हूँ
बहुत बड़ा गुनेगार हूँ
और उम्राव जाने फैजाबाद को हमेशा के लिए अलविता कह दिया। और साथ ही घटम हो गई
मेरी दास्तान। कहना तो बहुत कुछ चाहता हूँ,
शायद कह न पाऊं। समझ भी नहीं आता कि इस
दास्तान को क्या नाम दूँ। अमीरन की कहानी कहूँ या उम्राव की।
बहरहाल जिन्दगी का सफर भी क्या अजीब सफर है। अगर इस सफर
का निचोड आप अपने अंदाज में पेश कर दें तो इनायत होगी, करम होगा,
नवाजिश होगी।
तो मुझे नमोना करना
तो मेरी मिसाल
देना
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