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किसी भी चीज की बारीकी को समझने के लिए
जरूरी है कि उसकी गहराई में जाया जाए बिला
शुभ रियल एस्टेट पाकिस्तान का वोह शोबा है
जिसमें काला धन काफी आसानी के साथ सुफैद
हो सकता है लेकिन फिलहाल यह शोबा आईएमएफ
के रडार पर है और यही वजह है कि रियल
स्टेट पर टैक्स का बोझ बढ़ गया है और इसी
बोझ की वजह से रियल स्टेट की ट्रांजैक्शंस
काफी सुस्त रवी का शिकार हैं लेकिन पिछले
3 महीनों से रियल एस्टेट मार्केट में यह
अफवाह गर्म थी कि आईएमएफ रियल एस्टेट के
टैक्सेस में कोई कमी करने के ऊपर राजी हो
रहा है लेकिन किसी ने क्या खूब कहा है दिल
के अरमा आंसुओं में बह गए आइए समझते हैं
कि हुकूमत पाकिस्तान ने क्या कहा और
आईएमएफ ने क्या जवाब दिया और ऐसी सूरत में
इन्वेस्टर्स को किन चीजों में इन्वेस्ट
करने से फायदा होने का इमकान मौजूद है
[संगीत]
[संगीत]
अस्सलाम वालेकुम गुड मॉर्निंग गुड
आफ्टरनून एंड गुड इवनिंग मैं हूं अमीन
राजपूत पहले तो इस चीज को डिस्कस कर लेते
हैं कि आईएमएफ का वक्त पाकिस्तान आया
क्यों था दरह कीक पिछले 37 माह से जो
पाकिस्तान ने 7 अरब डॉलर का एक आईएमएफ का
बेल आउट प्लान लिया हुआ है उसकी वजह से यह
वक्त हर 6 महीने साल के बाद पाकिस्तान आते
रहते हैं अमूमन अगर हालात ठीक हो तो यह
सूरते हाल वर्चुअल मीटिंग के ऊपर होती है
लेकिन बहुत सारी फिजिकल चीजों को देखने के
लिए यह वफ पाकिस्तान आते रहते हाल ही में
जो वफ पाकिस्तान आया था वो 24 फरवरी 2014
को पाकिस्तान आया और 14 मार्च तक यह
पाकिस्तान में रहा ताकि पाकिस्तान की वो
परफॉर्मेंस देखी जा सके जो उन्होंने लोन
लेते हुए कुछ कमिटमेंट्स और वादे
पाकिस्तान हुकूमत ने आईएमएफ से किए थे
क्या आया उनके ऊपर क्या पेश रफत हुई और
क्या पेश रफ्तहारा हमारा जो रियल एस्टेट
का सेक्टर है उसके हवाले से ही मैं बात
करूंगा पाकिस्तान ने जो अ रिसेंटली जो
विजिट किया था आईएमएफ वफद ने उनसे
दरख्वास्त की कि जी खरीदारी के ऊपर जो है
वह 2 फ विद होल्डिंग टैक्स है उसको कम
किया जाए आईएमएफ ने वाज तौर पर मना कर
दिया और मजीद कोई गुंजाइश देने से इंकार
कर दिया इसका मतलब यह है कि पाकिस्तान से
जो डिमांड की गई थी वह हुकूमत पूरी ना कर
सकी यानी वोह अहदा फ जो अगली किस्त लेने
के लिए पाकिस्तान को पिछले टेनोर में दिए
गए थे व हुकूमत पाकिस्तान वक्त के ऊपर
पूरे नहीं कर सकी जिसमें टैक्स की कलेक्शन
का पूरा ना होना और मुख्तलिफ किस्म की
छोटी या बड़ी सब्सिडीज तो यह वो वादे थे
जो हुकूमत पाकिस्तान ने किए थे और हुकूमत
पाकिस्तान उन वादों को वक्त पर पूरा ना कर
सकी अब ऐसी सूरत हाल में लाजमी सी बात है
अब वो जमाना तो नहीं है जहां पे आईएमएफ
लोन दे दे और उसके बाद फिर वहां बहुत
आसानी के साथ कर ले जैसा कि आपको पता है
कि यह जो आईएमएफ का लोन पाकिस्तान को मिलर
है यह कोई आसान कंडीशन के ऊपर नहीं है यह
बहुत ही सख्त किस्म की कंडीशंस के ऊपर है
इस कंडीशन को पूरा करने के लिए पहले
पाकिस्तान ने मुख्तलिफ मुमा से अरबों डॉलर
के वादे इकट्ठे किए और उसके बाद फिर यह
लोन पाकिस्तान को सैंक्शन हुआ बहरहाल अ
जैसा के बहुत अगर आसानी के साथ समझा जाए
तो आईएमएफ पाकिस्तान से पैसे लेने के लिए
अब तरीका का भी जो है वह जरा सख्ती के साथ
तय कर रहा है तो साथ ही जो है वह रियल
एस्टेट की जो ट्रांजैक्शंस थी उनके ऊपर
बजाय रिलीफ देने के या टैक्स की कमी बेशी
को इंप्लीमेंट करने के जो रियल एस्टेट का
सेक्टर है उसके ऊपर मजीद यह बात नोट करवा
कर के गया है आईएमएफ का चैनल के जो
बैंकिंग सेक्टर है उसको इवॉल्व किया जाए
रियल स्टेट में यानी कि जितने भी फ्लज
मौजूद हैं कैश की लेनदेन है क्योंकि इसमें
तो कोई शक नहीं कि पाकिस्तान में जो रियल
एस्टेट की ट्रांजैक्शंस होती हैं वह अमूमन
कैश पर होती है तो व एक तो व जो ट्रैकिंग
सिस्टम है कि किसने लिया किसको दिया किस
तरह लिया किन चीजों के जरिए लिया और किस
तरीके से आगे या तो वो जो ट्रैक एंड ट्रेस
सिस्टम है उसको इंप्लीमेंट करने के ऊपर
जोर दिया है यानी इसका मतलब हाल फिलहाल यह
है कि आईएमएफ से जो पाकिस्तान की जो रियल
स्टेट इकॉनमी है उसके लिए जो रिलीफ मांगा
गया था उस बजाय उस रिलीफ को दिया जाता
उसके ऊपर मजीद जो है वह थोड़ी सख्ती करके
गया इसका मतलब यह है कि आगे रियल स्टेट के
हालात मजीद सख्त होंगे क्योंकि हुकूमत
पाकिस्तान ने बहरहाल उसकी आईएमएफ की जो
शराय है वो माननी तो है वो पूरी तो करनी
है इसका मतलब यह होगा कि जो रियल स्टेट की
ट्रांजैक्शंस हैं आईएमएफ के इसरार के ऊपर
वो अब प्रॉपर्ली जो है वह बैंकिंग सेक्टर
की तरफ जाएंगे बैंकिंग सेक्टर पर जाने का
मतलब यह है कि कोई भी ट्रांजैक्शन होगी
उसको ट्रैक किया जा सकेगा ट्रेस किया जा
सकेगा अब सूरते हाल जो है वह कोई इतनी
अच्छी हौसला अफजा नहीं है जिस परे हुकूमत
पाकिस्तान रियल एस्टेट में किसी किस्म का
कोई रिलीफ दे सके एक्सप्रेस ट्रिब्यून हो
गया आपका दी न्यूज हो गया इसके अंदर अब
कॉलम भी काफी जरा सारे जो है वो छप चुके
हैं जिनमें यह तमाम की तमाम सर ल वाज हो
गई है अब असल टॉपिक की तरफ आते हैं कि इन
हालात में क्योंकि बहरहाल पाकिस्तान की
इकॉनमी का एक बहुत बड़ा हिस्सा रियल
एस्टेट के अंदर सेल परचेस में इवॉल्व रहता
है उसके लिए क्या किया जाए जो मेरी अपनी
जाती इतने अरसे से मैं चीजों को देख रहा
हूं असिस कर रहा हूं मेरी अपनी जाती राय
यह है कि जो आपका फाइल सिस्टम है लोग उस
तरफ ज्यादा जाएंगे उनकी ट्रांजैक्शन
ज्यादा होगी या सेम लाइक जैसे ओपन फाइल्स
होती है जैसे मैं एक छोटी सी एग्जांपल दे
दूं जैसे डीएचएफ वैली है जो अब डीएचएफ फेस
सेवन में कन्वर्ट हो गया इस्लामाबाद में
वहां पे ओपन फाइलों की सेल परचेस का
ज्यादा रिवाज है एक दफा आपने ओपन करवा ली
उसके बाद फिर वह चलती रहती है गो के
बहरहाल उस के अंदर भी अब वो ट्रांसफर की
तरफ जा रहे हैं तो इस तरह की जो सोसाइट है
या इस तरह की जो लैंड है जो रकबे हैं
अमूमन अब लोग ज्यादा उसकी तरफ माइल होंगे
और जो फिजिकल प्लॉट है लाइक अगर हम एरिया
टाउन डीएचएस तरह की जो भी सोसाइटी जो जहां
पर बाकायदा ट्रांसफर होती है अलॉटमेंट
लेटर इशू होता है उसके टैक्सेस भरे जाते
हैं उस तरफ लोगों का रुझान खासा कम हो
जाएगा क्योंकि एक तो पहले ही ऑलरेडी
टैक्सेस का बोझ बहुत ज्यादा है और उस
टैक्सेस के बोझ की वजह से जो रियल एस्टेट
की शॉर्ट टर्म इन्वेस्टमेंट अपॉर्चुनिटी
थी वो तो तकरीबन ही तहलील हो कर के रह गई
है तो ऐसी सूरत हाल में अगेन वही कि जो
ओपन फाइलों की सेल परचेज है उस तरफ लोगों
का ज्यादा रुझान जाएगा और लोग अपनी
ट्रांजैक्शन उस तरफ करेंगे जो कि बहरहाल
खतरे से खाली नहीं है क्योंकि अमूमन देखा
गया है कि इसके अंदर बहुत बड़े-बड़े स्कैम
हो जाते हैं बहुत बड़े बड़े फ्रॉड हो जाते
हैं और क्योंकि ये फिजिकल होती नहीं है
लेकिन बहरहाल यह चीज उस तरफ डायवर्ट होगी
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